Vikram Doraiswami तिब्बत में स्थानीय अधिकारियों के साथ बातचीत करने और Kailash Mansarovar यात्रा के लिए भारतीय तीर्थयात्रियों की व्यवस्थाओं की संयुक्त समीक्षा करने पहुंचे हैं। यह उनके मई में पदभार संभालने के बाद इस क्षेत्र का पहला दौरा है।
बीजिंग: भारत और चीन के बीच धार्मिक और कूटनीतिक सहयोग से जुड़ा एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। Vikram Doraiswami तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की यात्रा पर पहुंचे हैं, जहां उन्होंने कैलाश मानसरोवर यात्रा की तैयारियों और व्यवस्थाओं की समीक्षा की। यह उनकी हाल ही में पदभार ग्रहण करने के बाद तिब्बत का पहला आधिकारिक दौरा है।
इस दौरे को भारत-चीन संबंधों में चल रही सतर्क लेकिन निरंतर संवाद प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब दोनों देश सीमावर्ती और राजनयिक मुद्दों पर बातचीत बनाए हुए हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रा की तैयारियों की समीक्षा
भारतीय राजदूत दोरैस्वामी और दूतावास के अन्य अधिकारियों ने ल्हासा में स्थानीय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान आगामी कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए तीर्थयात्रियों की सुविधाओं, मार्ग प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। स्थानीय प्रशासन ने तीर्थयात्रियों के लिए आवास, परिवहन और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी तैयारियों की जानकारी साझा की। भारतीय तीर्थयात्रियों के इस वर्ष के जत्थे के जल्द पहुंचने की संभावना है, जिसे देखते हुए दोनों पक्षों ने समन्वय को मजबूत करने पर जोर दिया।
दौरे के दौरान राजदूत दोरैस्वामी ने तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के उपाध्यक्ष झाओ पेंग से भी मुलाकात की। बैठक में तीर्थयात्रा से संबंधित तैयारियों के साथ-साथ भारत-चीन सहयोग के अन्य पहलुओं पर भी चर्चा हुई। इसके बाद आयोजित एक रात्रिभोज में दोनों पक्षों ने सौहार्दपूर्ण संवाद जारी रखा। इसे द्विपक्षीय संबंधों में व्यावहारिक सहयोग बनाए रखने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

यात्रा फिर से शुरू होने की पृष्ठभूमि
Kailash Mansarovar यात्रा भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए अत्यंत धार्मिक महत्व रखती है। यह यात्रा कई वर्षों तक बाधित रही थी, मुख्य रूप से COVID-19 महामारी और बाद में भारत-चीन सीमा तनाव के कारण। 2020 के बाद यह यात्रा रोक दी गई थी और लंबे अंतराल के बाद पिछले वर्ष इसे आंशिक रूप से पुनः शुरू किया गया। यह कदम दोनों देशों के बीच धीरे-धीरे बढ़ते संवाद और विश्वास बहाली की प्रक्रिया का हिस्सा माना गया था।
पिछले कुछ वर्षों में पूर्वी लद्दाख में सीमा पर तनाव के कारण भारत और चीन के संबंधों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। हालांकि, हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर पर बातचीत फिर से शुरू हुई है। विशेष रूप से 2024 में कजान में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों को पुनः स्थिर करने की दिशा में प्रयास तेज हुए। इसके बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा का पुनरारंभ द्विपक्षीय विश्वास बहाली के पहले ठोस कदमों में से एक माना गया।











