रोम में पीएम मोदी और इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी ने भारत-इटली संबंधों को नई ऊंचाई देने पर सहमति जताई। दोनों देशों ने स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप, व्यापार बढ़ाने, AI सहयोग और IMEC कॉरिडोर को मजबूत करने पर जोर दिया।
रोम: प्रधानमंत्री Narendra Modi और इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni ने रोम में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत और इटली के संबंधों को नई दिशा देते हुए दोनों देशों के रिश्तों को “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” का दर्जा देने की घोषणा की। इस महत्वपूर्ण बैठक में व्यापार, तकनीक, रक्षा, ऊर्जा, कृषि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वैश्विक कनेक्टिविटी जैसे कई रणनीतिक मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई।
यह बैठक प्रधानमंत्री मोदी के पांच देशों के दौरे के अंतिम चरण का हिस्सा थी और इसे भारत-यूरोप संबंधों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। दोनों नेताओं ने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक सहयोग और वैश्विक स्थिरता को भविष्य की साझेदारी का आधार बताया।
मेलोनी ने हिंदी में कहा – “परिश्रम ही सफलता की कुंजी
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जॉर्जिया मेलोनी ने हिंदी में “परिश्रम ही सफलता की कुंजी है” कहकर सभी का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि भारत में “परिश्रम” शब्द केवल मेहनत का प्रतीक नहीं, बल्कि समर्पण, निरंतर प्रयास और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतिनिधित्व करता है।
मेलोनी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और इटली के संबंधों में उल्लेखनीय मजबूती आई है और अब दोनों देश सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने बताया कि उनकी प्रधानमंत्री मोदी के साथ पिछले साढ़े तीन वर्षों में सात मुलाकातें हो चुकी हैं, जिसने दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को और मजबूत किया है।
पीएम मोदी ने रोम और काशी को बताया “इटरनल सिटी
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि रोम को दुनिया “इटरनल सिटी” यानी शाश्वत शहर के रूप में जानती है। उन्होंने अपनी संसदीय सीट वाराणसी का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में काशी को भी इसी प्रकार अनंत और जीवंत सभ्यता का प्रतीक माना जाता है।
उन्होंने कहा कि जब दो प्राचीन सभ्यताएं मिलती हैं, तो संवाद केवल राजनीतिक एजेंडे तक सीमित नहीं रहता, बल्कि संस्कृति, इतिहास और साझा मूल्यों का भी आदान-प्रदान होता है।
भारत और इटली के बीच व्यापार बढ़ाने का लक्ष्य
दोनों देशों ने 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। वर्तमान में भारत और इटली के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है और कई रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश तेज हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इटली अपनी डिजाइन क्षमता, उन्नत तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग के लिए प्रसिद्ध है, जबकि भारत प्रतिभा, नवाचार और कम लागत वाले टेक्नोलॉजिकल समाधानों के लिए दुनिया में पहचान बना चुका है। उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर वैश्विक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मेलोनी ने भी घोषणा की कि नई दिल्ली में एक नया इनोवेशन सेंटर स्थापित किया जाएगा, जो तकनीकी सहयोग और रिसर्च को बढ़ावा देगा।
AI, स्पेस और न्यूक्लियर एनर्जी में सहयोग बढ़ेगा
बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्पेस रिसर्च, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग और सिविल न्यूक्लियर एनर्जी जैसे भविष्य के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
दोनों देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स, ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में साझेदारी मजबूत करने का भी फैसला किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग यूरोप और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन को नया आयाम दे सकता है।
आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इटली दोनों आतंकवाद को मानवता के लिए गंभीर खतरा मानते हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवाद की फंडिंग रोकने और वैश्विक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दोनों देश मिलकर काम करेंगे।
मेलोनी ने भी आतंकवाद विरोधी सहयोग को भविष्य की साझेदारी का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक अस्थिरता के दौर में लोकतांत्रिक देशों के बीच सहयोग और अधिक आवश्यक हो गया है।

पीएम मोदी को मिला एग्रीकोला मेडल
रोम यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को Food and Agriculture Organization द्वारा प्रतिष्ठित “एग्रीकोला मेडल” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें कृषि उत्पादन बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा मजबूत करने और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भारत के योगदान के लिए दिया गया।
यह सम्मान FAO के महानिदेशक क्यू डोंग्यू ने प्रदान किया। प्रधानमंत्री मोदी ने यह पुरस्कार भारत के किसानों, पशुपालकों, मछुआरों और कृषि वैज्ञानिकों को समर्पित किया।
उन्होंने कहा कि भारत में खेती केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है। “हम धरती को मां और किसान को धरती पुत्र मानते हैं,” उन्होंने कहा।
IMEC कॉरिडोर पर भारत-इटली की विशेष नजर
भारत और इटली ने इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) परियोजना को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। यह परियोजना भारत, मध्य-पूर्व और यूरोप के बीच एक विशाल आर्थिक और लॉजिस्टिक नेटवर्क विकसित करने की योजना है।
IMEC के तहत रेलवे, बंदरगाह, ऊर्जा नेटवर्क और डिजिटल कनेक्टिविटी को जोड़ा जाएगा। इसे चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस कॉरिडोर के बनने से भारत और यूरोप के बीच व्यापार तेज होगा, ट्रांसपोर्ट लागत कम होगी और सप्लाई चेन अधिक सुरक्षित बनेगी।
इटली के लिए यह परियोजना मेडिटेरेनियन क्षेत्र में उसकी रणनीतिक स्थिति को और मजबूत कर सकती है, जबकि भारत के लिए यह यूरोप तक तेज और अधिक भरोसेमंद व्यापार मार्ग उपलब्ध कराएगी।
स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का क्या मतलब है
भारत और इटली के रिश्तों को “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” का दर्जा मिलना दोनों देशों के संबंधों में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इसका अर्थ है कि दोनों देश रक्षा, सुरक्षा, तकनीक, ऊर्जा और वैश्विक नीति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर दीर्घकालिक और गहरा सहयोग करेंगे।
भारत इससे पहले अमेरिका, फ्रांस, जापान, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ इस प्रकार की विशेष साझेदारी स्थापित कर चुका है। अब इटली भी इस रणनीतिक समूह का हिस्सा बन गया है।
प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में कई अहम मुद्दों पर चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी और मेलोनी के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत में विदेश मंत्री S. Jaishankar और इटली के विदेश मंत्री Antonio Tajani भी शामिल रहे।
बैठक में व्यापार, निवेश, संस्कृति, रक्षा, एआई, स्पेस टेक्नोलॉजी और ऊर्जा सहयोग जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों पर भी विचार साझा किए और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
भारत और इटली के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को वैश्विक राजनीति और आर्थिक संतुलन के लिहाज से एक महत्वपूर्ण विकास माना जा रहा है।








