सुप्रीम कोर्ट में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया Justice Surya Kant की अगुवाई वाले कॉलेजियम ने हाल ही में इन नामों की सिफारिश राष्ट्रपति को भेजी थी। इनमें चार विभिन्न हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एक वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं।
नई दिल्ली: भारत की न्यायपालिका में एक महत्वपूर्ण विकास के तहत देश के सर्वोच्च न्यायालय में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है। केंद्रीय विधि मंत्रालय ने सोमवार को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की। इन नियुक्तियों के साथ सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद पांच नामों को मंजूरी दी, जिनकी सिफारिश हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम द्वारा की गई थी। नए नियुक्त न्यायाधीशों में चार उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश और एक वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किए गए नए न्यायाधीश

नियुक्त किए गए पांच नए न्यायाधीशों में विभिन्न न्यायिक पृष्ठभूमियों से आने वाले प्रतिष्ठित कानूनी विशेषज्ञ शामिल हैं। इनमें बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा तथा जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली शामिल हैं।
- बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर
- पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू
- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा
- जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली
- वरिष्ठ अधिवक्ता वी. सुब्रमणि मोहना
इसके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता वी. सुब्रमणि मोहना को भी सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति विशेष रूप से उल्लेखनीय मानी जा रही है क्योंकि वे सीधे बार (वकालत) से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बनने वाले चुनिंदा कानूनी विशेषज्ञों में शामिल हो गई हैं।
कानून मंत्री ने दी आधिकारिक जानकारी
केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री Arjun Ram Meghwal ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इन नियुक्तियों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत राष्ट्रपति ने मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद इन नियुक्तियों को मंजूरी दी है। मंत्री ने सभी नए न्यायाधीशों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति न्यायपालिका को और अधिक मजबूत बनाने में सहायक होगी।
वरिष्ठ अधिवक्ता V. Subramani Mohana की नियुक्ति को कानूनी जगत में विशेष महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वकालत से की और न्यायिक सेवा में प्रवेश किए बिना सीधे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने तक का सफर तय किया। कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने भारत में शुरू किए गए शुरुआती पांच वर्षीय एकीकृत विधि पाठ्यक्रम के पहले बैच में अध्ययन किया था। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि उनका व्यापक अनुभव सर्वोच्च न्यायालय में विविध दृष्टिकोण और विशेषज्ञता जोड़ने में मदद करेगा।










