आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नए वित्तीय रास्ते तलाश रहा है। इसी कड़ी में उसने ब्रिक्स समर्थित न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) में शामिल होने के लिए चीन से औपचारिक समर्थन मांगा है।
इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति और नकदी संकट के बीच ब्रिक्स समर्थित न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) में शामिल होने के लिए चीन से समर्थन की मांग की है। इस कदम का उद्देश्य नए कर्ज और वित्तीय सहायता के रास्ते खोलना है, जिससे देश की डगमगाई अर्थव्यवस्था को संभाला जा सके। हालांकि, पाकिस्तान की इस कोशिश को भारत के विरोध का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि भारत ब्रिक्स समूह का एक प्रमुख सदस्य है और दोनों देशों के रिश्ते पिछले कुछ महीनों से बेहद तनावपूर्ण चल रहे हैं।
यदि पाकिस्तान को इस बैंक में प्रवेश मिल जाता है, तो यह उसके लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहयोग का एक नया अवसर साबित हो सकता है, लेकिन इसके लिए उसे भू-राजनीतिक चुनौतियों से भी गुजरना पड़ेगा।
ब्रिक्स बैंक में एंट्री के लिए पाकिस्तान की कोशिशें
निक्केई एशिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने इस साल की शुरुआत में NDB की सदस्यता के लिए आवेदन किया था, जो फिलहाल समीक्षा के अधीन है। यह बैंक ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका द्वारा वर्ष 2015 में स्थापित किया गया था, जिसका उद्देश्य उभरते बाजारों में विकास परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के अनुसार, देश के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने हाल ही में बीजिंग में चीन के उप वित्त मंत्री लियाओ मिन से मुलाकात की। इस बैठक में पाकिस्तान ने ब्रिक्स बैंक में अपनी सदस्यता के लिए चीन से समर्थन का औपचारिक अनुरोध किया। इस्लामाबाद को उम्मीद है कि उसके “आयरन ब्रदर” कहे जाने वाले चीन के सहयोग से उसे इस बैंक में प्रवेश मिल सकता है।

भारत का विरोध तय, चुनौती बड़ी
ब्रिक्स बैंक (NDB) में प्रवेश के लिए किसी भी नए सदस्य को पांच संस्थापक देशों में से कम से कम चार का अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक है। ऐसे में पाकिस्तान को चीन के अलावा रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका से भी समर्थन जुटाना होगा। हालांकि, भारत की ओर से इस आवेदन का विरोध लगभग तय माना जा रहा है। भारत और पाकिस्तान के बीच हाल के महीनों में बढ़े तनाव और सीमा पार आतंकी गतिविधियों के कारण संबंध पहले से ही अत्यधिक संवेदनशील बने हुए हैं। भारत पहले भी पाकिस्तान की किसी भी ब्रिक्स मंच पर भागीदारी का विरोध करता रहा है।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस समय गंभीर संकट में है। देश को विदेशी मुद्रा भंडार की कमी, बढ़ते कर्ज, महंगाई और राजनीतिक अस्थिरता ने झकझोर कर रख दिया है। ऐसे में ब्रिक्स बैंक की सदस्यता उसे एक नया वित्तीय सहारा दे सकती है।
चीन देगा पाकिस्तान का साथ?
चीन पहले से ही पाकिस्तान में भारी निवेश कर चुका है, खासकर चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) के तहत। इसके बावजूद, कई परियोजनाएं धीमी प्रगति के कारण विवादों में रही हैं। विश्लेषकों का कहना है कि चीन के लिए पाकिस्तान का NDB में शामिल होना उसके क्षेत्रीय रणनीतिक हितों को भी मजबूत करेगा। बीजिंग चाहता है कि ब्रिक्स समूह को एक वैकल्पिक वैश्विक वित्तीय संस्था के रूप में उभारा जाए, जो पश्चिमी नियंत्रित IMF और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं का संतुलन कर सके।
ऐसे में पाकिस्तान का शामिल होना चीन के लिए भी एक भूराजनीतिक (geopolitical) लाभ साबित हो सकता है। शंघाई स्थित इस बैंक में वर्तमान में पाँच संस्थापक सदस्य देशों की बराबर 18.76% हिस्सेदारी है। नए सदस्यों में मिस्र (2.24%), बांग्लादेश (1.77%), अल्जीरिया (1.15%) और संयुक्त अरब अमीरात (1.04%) शामिल हैं।











