भारत को विश्वगुरु बनाने की तैयारी: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा-“भविष्य हमारी प्रतीक्षा नहीं करेगा”

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में बड़ा संदेश देते हुए कहा, 'भविष्य हमारी प्रतीक्षा नहीं करेगा।' जानें उनके संबोधन की प्रमुख बातें

नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि वैश्विक मंच पर भारत के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर का समय है और दुनिया अब भारत की ओर उम्मीद से देख रही है।

नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि भारत के पास वैश्विक नेतृत्व का अवसर मौजूद है, लेकिन इस दिशा में सफलता केवल संभावनाओं से नहीं बल्कि ठोस तैयारी से तय होगी। नागपुर में आयोजित एक स्वयंसेवक प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया आज भारत की ओर नई उम्मीदों से देख रही है, लेकिन इस भरोसे को वास्तविक नेतृत्व में बदलने के लिए देश को अपनी क्षमताओं को और मजबूत करना होगा।

कार्यक्रम में प्रमुख उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला भी मौजूद थे। उन्होंने भी वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत के लिए बढ़ते अवसरों की ओर इशारा किया और कहा कि मौजूदा समय भारत के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

भारत के वैश्विक नेतृत्व पर भागवत का जोर

मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि “भारत को विश्वगुरु बनाने की बात हम लंबे समय से करते आ रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि हमें कौन रोक रहा है? असल बाधा हमारी तैयारी की कमी है।” उन्होंने आगे कहा कि वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है और शक्ति-संतुलन के नए केंद्र उभर रहे हैं। ऐसे समय में भारत के पास यह अवसर है कि वह न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बने, बल्कि वैश्विक विमर्श में भी अपनी निर्णायक भूमिका स्थापित करे।

भागवत ने यह भी कहा कि दुनिया अक्सर उसी की बात सुनती है जो शक्ति और क्षमता के साथ सामने आता है। इसलिए भारत को हर स्तर पर—आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी और रणनीतिक—खुद को सशक्त बनाना होगा।

“भविष्य हमारा इंतजार नहीं करेगा”

अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि वर्तमान समय को केवल अवसर के रूप में नहीं बल्कि जिम्मेदारी के रूप में भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “भविष्य हमारी प्रतीक्षा नहीं करेगा, वह पहले ही आ चुका है। अब सवाल यह है कि क्या हम उसके लिए तैयार हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत के सामने चुनौती केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय क्षमता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और सामाजिक एकता को भी मजबूत करना आवश्यक है।

भागवत ने पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं और ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया इस समय अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है। ऐसे में भारत के लिए यह अवसर है कि वह स्थिरता और विकास का एक नया मॉडल प्रस्तुत करे। उन्होंने कहा कि देश को अपनी सभ्यतागत मूल्यों के साथ आगे बढ़ते हुए आधुनिक तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी मजबूती हासिल करनी होगी।

कुमार मंगलम बिड़ला की टिप्पणी

कार्यक्रम में मौजूद उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में युद्ध, ऊर्जा संकट और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के कारण दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को एक नई औद्योगिक क्रांति बताते हुए कहा कि यह तकनीक आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था और रोजगार संरचना को पूरी तरह बदल सकती है।

बिड़ला ने कहा कि भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह इस वैश्विक बदलाव को अवसर में कैसे बदलता है। उन्होंने कहा कि “यह भारत का समय है, लेकिन इसे सही दिशा देने के लिए मजबूत दृष्टि और कार्यान्वयन क्षमता जरूरी है।”

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