भारत में LPG आयात रणनीति में बदलाव, US से खरीद बढ़ाने की तैयारी

भारत LPG आयात रणनीति में बड़ा बदलाव कर रहा है। US से रिकॉर्ड खरीद, नए टेंडर, चार्टर्ड जहाजों से लागत में कमी और 2026 तक अमेरिकी LPG आयात में कई गुना विस्तार

भारत LPG आयात रणनीति में बदलाव करते हुए अमेरिका से खरीद बढ़ाने की योजना बना रहा है। नए टेंडर, रिकॉर्ड स्पॉट खरीद और 2026 तक बड़े आयात विस्तार के साथ भारत लागत घटाने और सप्लाई स्रोत विविध करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

Indian Refiners: भारत अगले कुछ महीनों में अमेरिका से चार और LPG कार्गो खरीदने के लिए दूसरा टेंडर जारी करने की तैयारी कर रहा है। यह खरीद फ्री ऑन बोर्ड आधार पर होगी, जिससे रिफाइनर पहली बार US से लंबी दूरी की LPG ढुलाई के लिए अपने चार्टर्ड जहाजों का इस्तेमाल कर सकेंगे। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य शिपिंग लागत को कम करना और आयात प्रक्रिया को अधिक लचीला बनाना है। सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिफाइनर 2025 की शुरुआत में स्पॉट आधार पर भी नए LPG टेंडर जारी करने की योजना बना रहे हैं। इससे भारत को वैश्विक बाजार में बेहतर दरों का लाभ मिल सकता है।

US से रिकॉर्ड स्तर की LPG खरीद

Kpler के आंकड़े बताते हैं कि जनवरी से नवंबर 2025 के बीच भारत ने अमेरिका से 1.42 मिलियन टन LPG स्पॉट आधार पर खरीदी है। यह अब तक का सबसे बड़ा स्तर है। 2024 में यह खरीद केवल 0.1 मिलियन टन और 2023 में 0.4 मिलियन टन थी। भारत अपनी LPG जरूरतों का 60% से ज्यादा आयात करता है और अब तक अधिकांश सप्लाई Middle East देशों से आती थी। लेकिन इस वर्ष वैश्विक कीमतों में अस्थिरता और US से उपलब्ध सस्ती आपूर्ति ने भारत को अपने आयात स्रोतों को विविध करने के लिए प्रेरित किया है।

Middle East कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर

एक वरिष्ठ ट्रेडर के अनुसार वर्ष की शुरुआत में Middle East में LPG कीमतें 600 डॉलर प्रति टन के ऊपर थीं जबकि कच्चे तेल की कीमतें नीचे आ रही थीं। इस असमानता ने भारत को विकल्प तलाशने के लिए मजबूर किया। जैसे ही भारत ने पहली बार US से बड़ी मात्रा में LPG खरीदने का निर्णय लिया, Middle East सप्लायरों ने अपनी कीमतों में कटौती शुरू कर दी। सऊदी अरामको ने दिसंबर के लिए प्रोपेन की कीमत 495 डॉलर प्रति टन और ब्यूटेन की कीमत 485 डॉलर प्रति टन कर दी है, जो नवंबर के निचले स्तरों के पास है।

2026 में अमेरिकी LPG आयात का बड़ा विस्तार

भारत 2026 में अमेरिकी LPG आयात को कई गुना बढ़ाने जा रहा है। अगर मौजूदा स्पॉट खरीद और टर्म कॉन्ट्रैक्ट को मिलाकर देखा जाए तो 2026 में US से कुल LPG आयात का मूल्य लगभग 2 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह 2024 में केवल 60 मिलियन डॉलर था। यह बदलाव न केवल भारत की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करेगा बल्कि अमेरिका के साथ भारत के ट्रेड सरप्लस को भी कम करेगा। इस वर्ष भारत ने तीन वैश्विक ट्रेडरों के साथ समझौते किए हैं जिसके तहत 2026 में 2 मिलियन टन तक US LPG टर्म आधार पर आयात की जाएगी।

चार्टर्ड जहाजों से घटेगी शिपिंग लागत

इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम अमेरिकी LPG की ढुलाई के लिए अपने चार्टर्ड जहाजों का उपयोग करेंगे। US से LPG ट्रांसपोर्ट की लागत Middle East की तुलना में तीन गुना ज्यादा होती है। FOB खरीद से भारत को जहाजों पर नियंत्रण मिलेगा और लॉजिस्टिक्स खर्च कम होंगे। सूत्रों का कहना है कि यदि भारतीय रिफाइनर अपने चार्टर का उपयोग करते हैं तो भविष्य में US LPG और Middle East LPG की लागत में संतुलन बनाना संभव होगा। 2026 के लिए भारत ने 48 LPG कार्गो का सौदा किया है जिनमें से 24 कार्गो इंडियन ऑयल को और बाकी BPCL तथा HPCL को मिलेंगे।

US LPG और Middle East LPG के बीच मूल्य तुलना

भारत ने 2024 में 21.5 मिलियन टन LPG आयात की थी और 2025 के पहले 11 महीनों में 21.2 मिलियन टन आयात हो चुका है। अधिकांश सप्लाई UAE, क़तर, कुवैत और सऊदी अरब से आई थी। हालांकि 2026 में US LPG भारत के लिए लगभग 10% महंगी पड़ सकती है क्योंकि यह Mont Belvieu कीमतों से जुड़ी है और फ्रेट लागत 130 से 140 डॉलर प्रति टन है। Middle East से आने वाली शिपिंग लागत इससे काफी कम है। इसके बावजूद US LPG आमतौर पर अरामको कीमतों से 100 डॉलर प्रति टन सस्ती होती है। हाल के महीनों में Middle East की कीमतों में बड़ी गिरावट ने दोनों के बीच मूल्य अंतर को कम कर दिया है।

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