भारत-पाक तनाव में थर्ड पार्टी नहीं, अमेरिकी इंटेलिजेंस ने मानी भारत की बात

भारत-पाक तनाव और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर ट्रंप के दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं। अमेरिकी सीनेटर ने साफ किया कि यह मसला दोनों देशों के बीच ही सुलझा, थर्ड पार्टी

भारत-पाकिस्तान तनाव और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं। अमेरिकी सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के चेयरमैन ने कहा कि तनाव कम होना दोनों देशों के बीच का फैसला था।

World News: भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कोई नया विषय नहीं है। सीमा पार आतंकवाद पाकिस्तान की तरफ से होता रहा है और भारत की नीति हमेशा स्पष्ट रही है कि हर हमले का जवाब दिया जाएगा। इसी कड़ी में जब हालात बिगड़े, तो भारत ने जवाबी सैन्य कार्रवाई की। इस दौरान एयर और ग्राउंड लेवल पर मूवमेंट हुई। हालात ऐसे बने कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने कहना शुरू कर दिया कि दो परमाणु ताकतें आमने-सामने खड़ी हैं। इसके बावजूद भारत ने शुरुआत से साफ कहा कि यह भारत-पाकिस्तान का द्विपक्षीय मामला है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं होगी।

भारत का यह रुख पूरी तरह स्पष्ट था। पाकिस्तान ने जरूर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और खास तौर पर अमेरिका से मदद की गुहार लगाई। लेकिन भारत ने किसी भी स्तर पर थर्ड पार्टी मेडिएशन (third party mediation) को स्वीकार नहीं किया। भारत का स्टैंड यह था कि तनाव अगर कम हुआ है, तो वह दोनों देशों के बीच बातचीत और स्थिति के आकलन के आधार पर हुआ है, न कि किसी बाहरी दबाव या हस्तक्षेप से।

ट्रंप का दावा और वर्ल्ड पीस मेकर की छवि

डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित युद्ध को रोका। कई मंचों पर, कई इंटरव्यू में और अलग-अलग मौकों पर ट्रंप ने कहा कि अगर उन्होंने दखल नहीं दिया होता, तो भारत-पाकिस्तान युद्ध में चले जाते। ट्रंप ने यहां तक कहा कि उन्होंने दोनों देशों को चेतावनी दी थी कि अगर जंग जारी रही, तो अमेरिका ट्रेड रोक देगा और भारी टैरिफ (tariff) लगा देगा।

इन बयानों के जरिए ट्रंप खुद को एक ग्लोबल पीस मेकर (global peacemaker) के तौर पर पेश करना चाहते थे। यही नैरेटिव उनके लिए अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक मजबूत छवि बनाने का जरिया बन गया। इतना ही नहीं, इसी छवि के दम पर ट्रंप नोबेल पीस प्राइज (Nobel Peace Prize) की उम्मीद भी लगाए बैठे थे। लेकिन भारत ने हर बार इन दावों को खारिज किया और साफ कहा कि भारत ने कोई भी फैसला अमेरिकी दबाव में नहीं लिया।

भारत का स्पष्ट जवाब

भारत ने ट्रंप के दावों पर कभी भी अस्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी। भारत का जवाब सीधा और स्पष्ट था। भारत ने कहा कि हमें किसी भी तरह की थर्ड पार्टी की जरूरत नहीं है। भारत ने यह भी साफ किया कि अमेरिका की ओर से कोई मेडिएशन नहीं हुआ। तनाव कम होने की प्रक्रिया पाकिस्तान की रिक्वेस्ट और ग्राउंड सिचुएशन के आकलन के आधार पर हुई।

भारत का यह स्टैंड उस समय भी मजबूत था और समय के साथ यह और ज्यादा स्पष्ट होता गया। भारत ने बार-बार कहा कि यह मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच है और रहेगा। किसी भी बाहरी देश को इसमें दखल देने का अधिकार नहीं है। भारत की इस नीति को उसकी कूटनीतिक मजबूती और रणनीतिक आत्मनिर्भरता के रूप में देखा गया।

अमेरिकी सीनेटर ने खोली ट्रंप के दावे की पोल

अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब अमेरिका के ही एक वरिष्ठ नेता ने ट्रंप के दावों की सच्चाई सामने रख दी। यूएस सेनेट इंटेलिजेंस कमेटी (US Senate Intelligence Committee) के चेयरमैन मार्क वार्नर ने एक इंटरव्यू में जो कहा, उसने ट्रंप के पूरे नैरेटिव को हिला कर रख दिया।

मार्क वार्नर कोई आम नेता नहीं हैं। वह अमेरिकी इंटेलिजेंस सिस्टम के शीर्ष पदों में से एक पर हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि मौजूदा जानकारी इस बात का समर्थन नहीं करती कि वाशिंगटन ने अकेले ही भारत-पाकिस्तान तनाव को सुलझाया। उनके इस बयान के बाद ट्रंप का यह दावा कि उन्होंने जंग रोकी, पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गया।

इंटेलिजेंस इनपुट और भारत-पाक समाधान

मार्क वार्नर ने आगे कहा कि उन्होंने भारतीय सरकार, खुफिया समुदाय और अमेरिकी इंटेलिजेंस कमेटी से जो कुछ सुना है, उससे यह साफ होता है कि यह मसला भारत और पाकिस्तान के बीच ही सुलझा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसमें अमेरिका की कोई निर्णायक भूमिका नहीं थी।

यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि यह किसी पत्रकार या किसी भारतीय अधिकारी का नहीं है। यह बयान अमेरिका की सबसे अहम इंटेलिजेंस कमेटी के चेयरमैन का है। वार्नर ने माना कि अमेरिका ने सहयोगी भूमिका निभाने की कोशिश की होगी। डिप्लोमेटिक चैनल्स खुले रहे होंगे। बातचीत के रास्ते मौजूद रहे होंगे। लेकिन उन्होंने ट्रंप के उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि अमेरिका ने सीधे तौर पर जंग रुकवाई या ट्रेड थ्रेट्स के जरिए दबाव बनाया।

ट्रंप के नैरेटिव पर बड़ा सवाल

मार्क वार्नर के बयान के बाद ट्रंप के उस नैरेटिव पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है, जिसमें वह खुद को भारत-पाक संकट का समाधानकर्ता बताते रहे हैं। वॉर स्टॉपिंग क्लेम्स (war stopping claims), ट्रेड थ्रेट नैरेटिव्स और सीधी दखलअंदाजी की बातें अब कमजोर पड़ती नजर आती हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने भारत के उस स्टैंड को और मजबूत कर दिया है, जो उसने शुरुआत से लिया था। भारत ने कभी भी यह स्वीकार नहीं किया कि किसी बाहरी ताकत ने उस पर दबाव बनाया। भारत की नीति स्पष्ट रही कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक फैसले खुद भारत तय करेगा।

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