भोपाल मेट्रो टनलिंग के बीच हमीदिया रोड पर जलभराव का खतरा, अधूरी ड्रेनेज बढ़ा रही चिंता

भोपाल मेट्रो ऑरेंज लाइन की टनलिंग के बीच हमीदिया रोड पर अधूरी ड्रेनेज व्यवस्था से मानसून में जलभराव का खतरा बढ़ गया है, स्थानीय लोग चिंतित हैं।

भोपाल मेट्रो की ऑरेंज लाइन के लिए सुरंग निर्माण कार्य तेजी से जारी है, लेकिन हमीदिया रोड और अल्पाना तिराहे पर अधूरी ड्रेनेज व्यवस्था के कारण मानसून में जलभराव की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय लोग और व्यापारी संभावित परेशानी को लेकर चिंतित हैं।

भोपाल: राजधानी भोपाल में मेट्रो परियोजना का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। ऑरेंज लाइन के लिए भूमिगत टनलिंग जारी है, जबकि ऊपर हमीदिया रोड और आसपास के क्षेत्रों में मानसून के दौरान जलभराव का खतरा बढ़ गया है। अधूरी ड्रेनेज लाइन और मिट्टी के पूरी तरह स्थिर नहीं होने से स्थानीय नागरिकों की चिंता बढ़ गई है।

ऑरेंज लाइन के लिए तेज हुई टनलिंग

भोपाल मेट्रो परियोजना के तहत ऑरेंज लाइन स्टेशन क्षेत्र में भूमिगत सुरंग निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। हाल ही में दूसरी टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) ने भी खुदाई शुरू कर दी है। पहली मशीन अब तक करीब 94.5 मीटर की दूरी तय कर चुकी है, जबकि दूसरी मशीन भी शुरुआती चरण में लगभग 20 मीटर तक आगे बढ़ चुकी है।

भोपाल मेट्रो टनलिंग के बीच हमीदिया रोड पर जलभराव का खतरा, अधूरी ड्रेनेज बढ़ा रही चिंता

मेट्रो परियोजना को शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों का लक्ष्य निर्धारित समय सीमा के भीतर निर्माण कार्य को आगे बढ़ाना है। हालांकि भूमिगत निर्माण गतिविधियों के बीच सतह पर रहने वाले लोगों की चिंताएं भी बढ़ने लगी हैं।

हमीदिया रोड पर मंडरा रहा जलभराव का खतरा

टनलिंग क्षेत्र के ऊपर स्थित हमीदिया रोड और अल्पाना तिराहे को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। बताया जा रहा है कि टनलिंग जोन के ऊपर की मिट्टी अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुई है और जल निकासी से जुड़ा ड्रेनेज डायवर्जन कार्य भी अधूरा है।

इंजीनियरों का मानना है कि यदि मानसून के दौरान तेज बारिश होती है तो रेलवे ट्रैक और आसपास के निचले क्षेत्रों में पानी जमा होने की आशंका बढ़ सकती है। इससे यातायात प्रभावित होने के साथ-साथ स्थानीय व्यापारियों और यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

मामूली बारिश में भी हो रही परेशानी

स्थानीय लोगों के अनुसार वर्तमान स्थिति पहले से ही चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। उनका कहना है कि हल्की बारिश होने पर भी पानी की निकासी में काफी समय लग रहा है। कई स्थानों पर बारिश का पानी दो से तीन घंटे तक जमा रहता है, जिससे आवाजाही प्रभावित होती है।

व्यापारियों का कहना है कि यदि भारी बारिश होती है तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। रेलवे स्टेशन के आसपास का इलाका शहर के सबसे व्यस्त क्षेत्रों में शामिल है, इसलिए जलभराव का असर बड़ी संख्या में लोगों पर पड़ सकता है।

पिछले साल भी हुई थी बड़ी समस्या

हमीदिया रोड पर जलभराव की समस्या नई नहीं है। पिछले वर्ष भी भारी बारिश के दौरान यहां बाढ़ जैसी स्थिति बन गई थी। इसके बाद भोपाल नगर निगम ने पानी की निकासी बेहतर बनाने के लिए कुछ अस्थायी उपाय किए थे।

नगर निगम ने पानी मोड़ने के लिए पंप लगाए और भूमिगत पाइपलाइन की व्यवस्था भी की थी। इसके बावजूद रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर छह की ओर जाने वाले मार्ग पर लंबे समय तक पानी जमा रहा था। इस अनुभव के कारण स्थानीय लोग इस बार भी संभावित जलभराव को लेकर चिंतित हैं।

विभागों के बीच जिम्मेदारी को लेकर मतभेद

जलभराव की आशंका के बीच विभिन्न एजेंसियों के बीच जिम्मेदारी को लेकर मतभेद भी सामने आए हैं। मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन का कहना है कि सड़क पर पानी भरने की समस्या का समाधान करना उनकी जिम्मेदारी नहीं है और यह कार्य नगर निगम तथा लोक निर्माण विभाग के दायरे में आता है।

दूसरी ओर, भोपाल नगर निगम का दावा है कि उसने आवश्यक तैयारियां कर रखी हैं और जरूरत पड़ने पर पंपों की मदद से पानी निकाला जाएगा। वहीं लोक निर्माण विभाग की ओर से इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

मानसून से पहले समाधान की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि मेट्रो परियोजना जैसे बड़े निर्माण कार्यों के दौरान जल निकासी व्यवस्था को प्राथमिकता देना आवश्यक होता है। यदि समय रहते ड्रेनेज लाइन का काम पूरा नहीं किया गया तो मानसून के दौरान शहर के इस महत्वपूर्ण हिस्से में गंभीर जलभराव की स्थिति बन सकती है।

स्थानीय नागरिकों का भी कहना है कि संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम कर जल्द समाधान निकालना चाहिए, ताकि विकास कार्यों के साथ-साथ लोगों की दैनिक जिंदगी प्रभावित न हो। फिलहाल सभी की नजर मानसून की पहली तेज बारिश और उससे पहले की तैयारियों पर टिकी हुई है।

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