झुंझुनूं में स्कॉर्पियो हादसे में युवक की मौत के बाद परिजनों और समर्थकों ने क्रेन से दुर्घटनाग्रस्त वाहन को शहर में घुमाकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने वाहन की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाते हुए कंपनी से सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की।
भुवनेश्वर: ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के पत्रपाड़ा क्षेत्र में सोमवार सुबह एक कॉटन फैक्ट्री और उससे जुड़े कपड़ा गोदाम में अचानक आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग तेजी से फैली क्योंकि फैक्ट्री और गोदाम में बड़ी मात्रा में कपास और कपड़े जैसी ज्वलनशील सामग्री मौजूद थी। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई टीमें मौके पर पहुंचीं और तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। अधिकारियों के अनुसार, इस घटना में किसी भी व्यक्ति की मौत या घायल होने की सूचना नहीं है।
सुबह करीब 8:40 बजे शुरू हुआ बचाव अभियान
दमकल विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आग लगने की सूचना मिलते ही भुवनेश्वर, जटनी और तामांडो फायर स्टेशन से दमकल वाहन और कर्मियों को तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। सुबह लगभग 8:40 बजे टीमें मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने के लिए संयुक्त अभियान शुरू किया।
दमकल कर्मियों ने कई घंटों की मशक्कत के बाद आग को फैलने से रोक दिया। समय पर कार्रवाई होने के कारण आग आसपास की अन्य औद्योगिक इकाइयों तक नहीं पहुंच सकी, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
आग पर काबू, लेकिन जारी रहा कूलिंग ऑपरेशन
अधिकारियों ने बताया कि आग पर नियंत्रण तो पा लिया गया, लेकिन कॉटन फैक्ट्री के कुछ हिस्सों से लगातार धुआं निकलता रहा। कपास जैसी सामग्री में आग लंबे समय तक अंदर ही अंदर सुलगती रहती है, इसलिए दमकल विभाग ने कूलिंग ऑपरेशन जारी रखा।
कूलिंग ऑपरेशन के दौरान फैक्ट्री के प्रत्येक हिस्से की जांच की गई ताकि दोबारा आग भड़कने की कोई संभावना न रहे। दमकल कर्मियों ने पानी और अन्य अग्निशमन उपकरणों की मदद से पूरे परिसर को सुरक्षित बनाया।
कोई जनहानि नहीं, राहत की खबर
इस घटना की सबसे बड़ी राहत यह रही कि आग लगने के समय किसी भी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं मिली। अधिकारियों के अनुसार, सभी लोग समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

हालांकि, आग से फैक्ट्री और गोदाम में रखे कच्चे माल, कपास और अन्य सामान को काफी नुकसान पहुंचने की आशंका है। नुकसान का सही आकलन जांच पूरी होने के बाद किया जाएगा।
आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं
दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। प्रारंभिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आग शॉर्ट सर्किट, तकनीकी खराबी, मानवीय लापरवाही या किसी अन्य वजह से लगी।
अधिकारियों ने कहा कि विशेषज्ञों की टीम घटनास्थल का निरीक्षण करेगी और सभी संभावित कारणों की जांच करेगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आग लगने की वास्तविक वजह सामने आएगी।
ज्वलनशील सामग्री के कारण बढ़ी चुनौती
कॉटन फैक्ट्री और कपड़ा गोदाम में बड़ी मात्रा में कपास, धागे और कपड़े रखे होने के कारण आग बुझाने का कार्य चुनौतीपूर्ण रहा। कपास अत्यधिक ज्वलनशील होती है और इसके भीतर आग लंबे समय तक सुलग सकती है।
यही वजह रही कि आग पर नियंत्रण मिलने के बाद भी दमकल विभाग ने एहतियात के तौर पर कूलिंग ऑपरेशन जारी रखा, ताकि किसी भी प्रकार की पुनः आग लगने की संभावना समाप्त की जा सके।
औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा उपायों पर फिर उठे सवाल
इस घटना के बाद औद्योगिक क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिन फैक्ट्रियों में ज्वलनशील सामग्री का भंडारण किया जाता है, वहां नियमित फायर सेफ्टी ऑडिट, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता और कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण देना बेहद जरूरी है। समय-समय पर सुरक्षा मानकों की समीक्षा और उपकरणों की जांच से इस प्रकार की घटनाओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
प्रशासन ने शुरू की विस्तृत जांच
स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग ने संयुक्त रूप से मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच टीम यह पता लगाएगी कि आग कैसे लगी, सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किन अतिरिक्त उपायों की आवश्यकता है।
फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और दमकल विभाग क्षेत्र की निगरानी कर रहा है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और जांच पूरी होने तक आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।











