बिहार के भूमिहीनों को बड़ी राहत अभियान बसेरा के आवेदन के लिए अब पटना नहीं जाना होगा

बिहार में अभियान बसेरा के पात्र भूमिहीन लाभुकों को आवेदन के लिए पटना मुख्यालय नहीं जाना होगा। अब संबंधित अंचल कार्यालय में ही आवेदन जमा किया जा सकेगा।\
बिहार के भूमिहीनों को बड़ी राहत अभियान बसेरा के आवेदन के लिए अब पटना नहीं जाना होगा
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बिहार में जमीन के अभाव में लंबे समय से परेशानी झेल रहे भूमिहीन परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राज्य सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 'अभियान बसेरा' के तहत पात्र भूमिहीन लाभुकों के आवेदन को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। अब ऐसे लाभुकों को आवेदन जमा करने के लिए पटना स्थित राज्य मुख्यालय का चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। पात्र भूमिहीन परिवार अपने संबंधित अंचल कार्यालय में ही आवेदन जमा कर सकेंगे। विभाग की ओर से अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि लाभुकों को आवेदन की प्रक्रिया के बारे में सही और स्पष्ट जानकारी स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध कराई जाए।

दरअसल, बिहार में ऐसे बड़ी संख्या में परिवार हैं जिनके पास अपना घर बनाने के लिए जमीन नहीं है। आर्थिक रूप से कमजोर इन परिवारों के लिए रहने की स्थायी व्यवस्था लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है। 'अभियान बसेरा' के माध्यम से सरकार का उद्देश्य ऐसे पात्र भूमिहीन परिवारों को वासभूमि उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपनी जमीन पर घर बना सकें और उन्हें रहने के लिए स्थायी आधार मिल सके। इसी दिशा में अभियान बसेरा-2 के तहत भी बड़ी संख्या में परिवारों को जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। विभाग की ओर से पहले चरण में अब तक 71,569 भूमिहीन परिवारों को योजना का लाभ दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आवेदन प्रक्रिया को लेकर भूमिहीन लाभुकों के बीच जो भ्रम बना हुआ था, उसे दूर करने का प्रयास किया गया है। कई लोगों को यह जानकारी नहीं थी कि अभियान बसेरा के लिए आवेदन कहां जमा करना है और क्या इसके लिए पटना स्थित राज्य मुख्यालय जाना जरूरी है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि पात्र भूमिहीन लाभुकों को आवेदन जमा करने के लिए राज्य मुख्यालय आने की आवश्यकता नहीं है। वे अपने संबंधित अंचल कार्यालय में ही आवेदन जमा कर सकते हैं। इसका सीधा फायदा ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उन लोगों को मिलेगा, जिनके लिए पटना तक आने-जाने में समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं।

स्थानीय स्तर पर आवेदन जमा होने की व्यवस्था से प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ-साथ लाभुकों की परेशानी भी कम होने की उम्मीद है। बिहार के अलग-अलग जिलों में बड़ी संख्या में भूमिहीन परिवार ग्रामीण इलाकों में रहते हैं। इनमें से कई परिवारों के लिए जिला मुख्यालय या राज्य मुख्यालय तक पहुंचना भी आसान नहीं होता। ऐसे में अगर आवेदन अंचल कार्यालय के स्तर पर ही स्वीकार किया जाता है तो उन्हें अपने क्षेत्र के नजदीक सरकारी कार्यालय में जाकर प्रक्रिया पूरी करने का मौका मिलेगा। इससे अनावश्यक यात्रा और अतिरिक्त खर्च से भी राहत मिल सकती है।

विभाग ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि भूमिहीन लाभुकों को योजना से जुड़ी सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए। आवेदन प्रक्रिया को लेकर किसी भी तरह की गलत सूचना या भ्रम की स्थिति नहीं बनने दी जाए। खास तौर पर लाभुकों को यह समझाने की जरूरत है कि पात्रता और आवेदन से जुड़े मामलों में उन्हें किन अधिकारियों या कार्यालयों से संपर्क करना है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति लाभुकों को गलत जानकारी देकर भ्रमित करता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

अभियान बसेरा के दूसरे चरण यानी 'अभियान बसेरा-2' के तहत भी बिहार सरकार ने बड़ी संख्या में भूमिहीन परिवारों को वासभूमि उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। इस अभियान के तहत राज्य के करीब 30 हजार पात्र भूमिहीन परिवारों को वासभूमि के बंदोबस्ती प्रमाण-पत्र देने की योजना पर काम किया गया है। अलग-अलग जिलों को लाभुकों की पहचान, सत्यापन और प्रमाण-पत्र तैयार करने का लक्ष्य दिया गया था।

सरकार की योजना के तहत पात्र परिवारों को घर बनाने के लिए वासभूमि उपलब्ध कराने पर जोर है। कई जिलों में लाभुकों की पहचान और भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया चल चुकी है। मुजफ्फरपुर समेत कई जिलों में अभियान बसेरा-2 के तहत बड़ी संख्या में परिवारों को जमीन देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। विभाग की ओर से अधिकारियों को लंबित मामलों की समीक्षा कर पात्र परिवारों को अभियान में शामिल करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

इस योजना का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि केवल मकान निर्माण की योजना होने से ऐसे परिवारों की समस्या पूरी तरह हल नहीं होती जिनके पास अपना भूखंड ही नहीं है। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण जैसी योजनाओं के पात्र भूमिहीन परिवारों के सामने जमीन का अभाव एक बड़ी बाधा बन सकता है। बिहार सरकार ने ऐसे मामलों में भूमिहीन परिवारों को जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में भी कदम उठाए हैं। हालिया निर्देशों में करीब 11 हजार पात्र भूमिहीन परिवारों को आवास निर्माण के लिए 15 से 30 दिनों के भीतर भूखंड उपलब्ध कराने की बात कही गई है और सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होने पर नियमानुसार जमीन खरीदने के लिए एक लाख रुपये तक देने का प्रावधान बताया गया है।

अभियान बसेरा के तहत जमीन मिलने का मतलब केवल एक भूखंड मिलना नहीं है, बल्कि पात्र परिवारों के लिए स्थायी आवास की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी है। जिन परिवारों के पास वर्षों से रहने के लिए अपनी जमीन नहीं थी, उनके लिए वासभूमि का बंदोबस्ती प्रमाण-पत्र भविष्य में घर बनाने की आधारशिला बन सकता है। हालांकि इसका लाभ उन्हीं परिवारों को मिलेगा जो सरकार द्वारा निर्धारित पात्रता और सत्यापन प्रक्रिया में योग्य पाए जाएंगे।

अधिकारियों की जिम्मेदारी भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण रहेगी। राजस्व विभाग की हालिया समीक्षा में अंचल अधिकारियों को राजस्व से जुड़े विभिन्न मामलों की नियमित निगरानी और समय पर निष्पादन के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने यह भी कहा है कि अधिकारियों को केवल अधीनस्थ कर्मचारियों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि अंचल में चल रहे राजस्व कार्यों की जानकारी स्वयं रखनी चाहिए और उनकी प्रगति की समीक्षा करनी चाहिए। अभियान बसेरा के पात्र लाभुकों के आवेदन भी इसी प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

भूमिहीन लाभुकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि आवेदन जमा करने के लिए पटना जाने की जरूरत नहीं है। उन्हें अपने संबंधित अंचल कार्यालय से संपर्क करना होगा और वहां उपलब्ध प्रक्रिया के अनुसार आवेदन देना होगा। आवेदन से जुड़ी जानकारी के लिए स्थानीय राजस्व अधिकारियों से संपर्क किया जा सकता है। बिहार भूमि पोर्टल पर भी राजस्व विभाग की कई ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध हैं और आवेदन की स्थिति देखने की सुविधा मौजूद है।

इस व्यवस्था से सरकार के सामने एक और महत्वपूर्ण चुनौती भी जुड़ी है और वह है पात्र लाभुकों तक सही सूचना पहुंचाना। ग्रामीण इलाकों में कई बार सरकारी योजनाओं की जानकारी सही समय पर नहीं पहुंच पाने के कारण पात्र परिवार आवेदन या सत्यापन प्रक्रिया से बाहर रह जाते हैं। इसलिए विभाग ने अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि लाभुकों को आवेदन की प्रक्रिया के बारे में सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए। इससे फर्जी दावों और बिचौलियों की भूमिका पर भी अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।

कुल मिलाकर अभियान बसेरा के तहत नया निर्देश उन भूमिहीन परिवारों के लिए राहत लेकर आया है जो आवेदन को लेकर पटना मुख्यालय जाने की चिंता कर रहे थे। अब उन्हें अपने संबंधित अंचल कार्यालय में ही आवेदन जमा करने की सुविधा मिलेगी। इससे प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर आसान होने की उम्मीद है। हालांकि जमीन का लाभ पाने के लिए पात्रता, दस्तावेज, सर्वेक्षण और सत्यापन जैसी निर्धारित प्रक्रियाओं को पूरा करना जरूरी रहेगा। सरकार की ओर से अभियान बसेरा-2 के माध्यम से बड़ी संख्या में भूमिहीन परिवारों को वासभूमि उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है और आने वाले समय में स्थानीय स्तर पर आवेदन तथा सत्यापन की प्रक्रिया इसके क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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