भवन निर्माण निगम के GM के ठिकानों पर EOU रेड, आय से ₹3.12 करोड़ अधिक संपत्ति का आरोप

बिहार भवन निर्माण निगम के GM कमलेश कुमार के 4 ठिकानों पर EOU रेड हुई। उन पर ज्ञात आय से 3.12 करोड़ रुपये अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है।
भवन निर्माण निगम के GM के ठिकानों पर EOU रेड, आय से ₹3.12 करोड़ अधिक संपत्ति का आरोप
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बिहार की राजधानी पटना में आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU ने बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक (तकनीकी) कमलेश कुमार के ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई शुरू की है। आय से अधिक संपत्ति के मामले में EOU की अलग-अलग टीमों ने कमलेश कुमार से जुड़े चार परिसरों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया। जांच एजेंसी के मुताबिक, कमलेश कुमार पर अपनी ज्ञात और वैध आय के स्रोतों की तुलना में 3 करोड़ 12 लाख 51 हजार रुपये अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। यह राशि उनकी ज्ञात आय से करीब 103.30 प्रतिशत अधिक बताई गई है। विशेष न्यायालय निगरानी, पटना से प्राप्त तलाशी वारंट के आधार पर यह कार्रवाई की जा रही है।

EOU की कार्रवाई मंगलवार को शुरू हुई। जांच एजेंसी की टीमें कमलेश कुमार से जुड़े पटना और वैशाली के अलग-अलग ठिकानों पर पहुंचीं। इनमें वैशाली जिले के जंदाहा स्थित उनका पैतृक आवास, पटना के नॉर्थ एसके पुरी इलाके में मनमोहन अपार्टमेंट का फ्लैट, राजीव नगर रोड नंबर 25C स्थित मेघा बिल्डिंग और बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड के पटना स्थित कार्यालय का कमरा शामिल है। इन सभी जगहों पर टीम दस्तावेजों और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

कमलेश कुमार मूल रूप से वैशाली जिले के जंदाहा के रहने वाले बताए गए हैं। EOU के मुताबिक उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने को लेकर मामला दर्ज किया गया है। जांच में उनकी ज्ञात आय और संपत्तियों के बीच अंतर सामने आने के बाद तलाशी की कार्रवाई के लिए विशेष न्यायालय निगरानी से वारंट लिया गया। इसके बाद अलग-अलग टीमों को चार ठिकानों पर भेजकर एक साथ जांच शुरू की गई।

पटना में जिस आवास पर EOU की टीम पहुंची, वहां कार्रवाई के दौरान स्थिति कुछ अलग रही। रिपोर्ट के मुताबिक, घर बंद मिला और टीम मौके पर इंतजार करती रही। जांच एजेंसी की कार्रवाई के दौरान संबंधित परिसर में आने-जाने पर भी रोक रखी गई। ऐसे मामलों में तलाशी टीम घर के अंदर मौजूद दस्तावेज, संपत्ति के कागजात, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय जानकारी की जांच करती है। घर बंद होने की स्थिति में टीम संबंधित प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई करती है।

EOU की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि कमलेश कुमार के नाम पर या उनसे जुड़े लोगों के नाम पर मौजूद संपत्तियां उनकी वैध आय के अनुरूप हैं या नहीं। आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जांच एजेंसी अधिकारी की नौकरी से मिलने वाली आय, अन्य घोषित स्रोतों, जमीन-मकान, बैंक खातों, निवेश और दूसरी चल-अचल संपत्तियों का मिलान करती है। इसी प्रक्रिया के तहत कमलेश कुमार से जुड़े चार ठिकानों पर दस्तावेजों और रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है।

जांच एजेंसी ने फिलहाल आरोप की रकम को लेकर स्पष्ट आंकड़ा जारी किया है। EOU के अनुसार कमलेश कुमार पर 3 करोड़ 12 लाख 51 हजार रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। यह उनकी ज्ञात आय से लगभग 103.30 प्रतिशत ज्यादा बताई गई है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह जांच एजेंसी की ओर से लगाया गया आरोप है। तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही मामले की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

जंदाहा स्थित पैतृक आवास भी EOU की जांच के दायरे में है। टीम यहां संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के साथ-साथ अन्य जरूरी रिकॉर्ड की जांच कर रही है। किसी अधिकारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में पैतृक आवास की तलाशी का उद्देश्य यह भी हो सकता है कि वहां रखे जमीन, मकान, निवेश या दूसरे वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी हासिल की जा सके। जांच एजेंसी बरामद कागजातों का अधिकारी की घोषित आय और संपत्ति के रिकॉर्ड से मिलान कर सकती है।

पटना के नॉर्थ एसके पुरी स्थित मनमोहन अपार्टमेंट का फ्लैट भी तलाशी के चार ठिकानों में शामिल है। EOU ने फ्लैट नंबर 302, सी ब्लॉक को जांच के दायरे में लिया है। इसके अलावा राजीव नगर रोड नंबर 25C स्थित मेघा बिल्डिंग में भी टीम ने तलाशी शुरू की है। इन परिसरों से मिलने वाले दस्तावेजों और रिकॉर्ड को जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है।

चौथा ठिकाना बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड के पटना स्थित कार्यालय में कमलेश कुमार का महाप्रबंधक तकनीकी के रूप में इस्तेमाल किया जाने वाला कार्यालय कक्ष है। सरकारी कार्यालय में तलाशी का मकसद अधिकारी की निजी संपत्ति के अलावा उनके पद से संबंधित रिकॉर्ड और उन दस्तावेजों को देखना भी हो सकता है, जो जांच से जुड़े हों। EOU की कार्रवाई पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कार्यालय से किस तरह के रिकॉर्ड मिले हैं।

छापेमारी के दौरान जांच टीमों ने संबंधित परिसरों में लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी। EOU की ओर से बताया गया कि तलाशी पूरी होने तक विस्तृत जानकारी सामने नहीं आएगी। फिलहाल टीम दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। तलाशी पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितनी संपत्ति, दस्तावेज या अन्य सामग्री जांच एजेंसी के हाथ लगी है।

आय से अधिक संपत्ति के मामलों में सिर्फ किसी संपत्ति का होना अपने आप में अवैध संपत्ति साबित नहीं करता। जांच एजेंसी को यह देखना होता है कि संपत्ति खरीदने या बनाने के लिए इस्तेमाल की गई रकम का स्रोत क्या था और क्या वह अधिकारी की वैध आय और घोषित वित्तीय संसाधनों से मेल खाती है। इसी आधार पर संपत्ति के मूल्य और आय के बीच अंतर की जांच की जाती है। कमलेश कुमार के मामले में भी EOU इसी तरह के वित्तीय मिलान की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।

जांच के दौरान बैंक खातों, जमीन और मकान से जुड़े दस्तावेज, निवेश, बीमा, वित्तीय लेनदेन और अन्य संपत्तियों की जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है। अगर किसी संपत्ति की खरीद या निर्माण के लिए बड़ी रकम खर्च हुई है तो उसके भुगतान का स्रोत भी जांच का विषय बन सकता है। इसी तरह परिवार या अन्य संबंधित व्यक्तियों के नाम पर मौजूद संपत्तियों के रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है, यदि वे मामले से संबंधित पाए जाते हैं।

EOU की कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब बिहार में आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। इससे पहले भी भवन निर्माण विभाग से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामलों में तलाशी अभियान चल चुके हैं। हालांकि हर मामले के तथ्य अलग होते हैं और किसी दूसरे अधिकारी के खिलाफ हुई कार्रवाई को कमलेश कुमार के मामले से सीधे जोड़ना उचित नहीं होगा।

कमलेश कुमार के खिलाफ दर्ज मामले में अब तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होगी। एजेंसी यह देखेगी कि प्रारंभिक जांच में सामने आई संपत्ति और वित्तीय रिकॉर्ड तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों से कितने मेल खाते हैं। अगर कोई अतिरिक्त संपत्ति या निवेश सामने आता है तो उसे भी जांच में शामिल किया जा सकता है।

पैत्रिक घर से लेकर पटना के आवासीय परिसरों और सरकारी कार्यालय तक चार अलग-अलग स्थानों पर एक साथ कार्रवाई किए जाने से जांच का दायरा व्यापक होने का संकेत मिलता है। हालांकि EOU की तलाशी अभी जारी है और आधिकारिक तौर पर बरामदगी का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है। इसलिए फिलहाल किसी रकम, दस्तावेज या संपत्ति को अंतिम रूप से अवैध घोषित करना उचित नहीं होगा।

पटना में घर बंद मिलने की जानकारी के बाद स्थानीय स्तर पर भी लोगों की नजर EOU की कार्रवाई पर बनी हुई है। टीम मौके पर मौजूद रहकर आगे की प्रक्रिया पूरी कर रही है। तलाशी के दौरान किसी परिसर में प्रवेश या बाहर निकलने पर रोक लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इससे जांच टीम को रिकॉर्ड और दस्तावेजों को व्यवस्थित तरीके से देखने में मदद मिलती है।

EOU की जांच पूरी होने के बाद बरामद दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का मूल्यांकन किया जाएगा। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कमलेश कुमार की कुल संपत्ति कितनी है, उसमें से कितनी संपत्ति ज्ञात आय के अनुरूप है और जिस संपत्ति को आय से अधिक बताया गया है उसका स्रोत क्या है। इस प्रक्रिया में बैंकिंग रिकॉर्ड और संपत्ति के दस्तावेज अहम भूमिका निभा सकते हैं।

मामले में आगे की कार्रवाई जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी। अगर तलाशी के दौरान ऐसे दस्तावेज या वित्तीय रिकॉर्ड मिलते हैं जो आरोपों को पुष्ट करते हैं, तो जांच एजेंसी उसके आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई कर सकती है। वहीं संबंधित अधिकारी को भी कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। अभी कार्रवाई जांच के स्तर पर है और अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

फिलहाल EOU की टीम कमलेश कुमार के चार ठिकानों पर तलाशी कर रही है। जांच एजेंसी के अनुसार, उनके खिलाफ ज्ञात आय से 3 करोड़ 12 लाख 51 हजार रुपये अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। पैतृक आवास, दो पटना स्थित आवासीय परिसरों और भवन निर्माण निगम के कार्यालय को जांच के दायरे में लिया गया है। तलाशी पूरी होने के बाद ही यह पता चलेगा कि टीम को कौन-कौन से दस्तावेज और अन्य साक्ष्य मिले हैं।

इस कार्रवाई के बाद अब जांच का अगला चरण तलाशी में मिले रिकॉर्ड के सत्यापन का होगा। EOU आय, संपत्ति और वित्तीय लेनदेन का मिलान कर मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने की कोशिश करेगी। फिलहाल 3.12 करोड़ रुपये से अधिक की आय से अधिक संपत्ति का आरोप जांच के केंद्र में है और इस आरोप की पुष्टि या आगे की कानूनी स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

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