एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पास पटना में 10 करोड़ का मकान: पूर्णिया में भवन निर्माण विभाग में पोस्टेड हैं सत्येंद्र

पूर्णिया में पोस्टेड भवन निर्माण विभाग के इंजीनियर सत्येंद्र कुमार चौधरी के पटना-पूर्णिया ठिकानों पर छापा पड़ा। संपत्ति और बैंक लेनदेन की जांच शुरू हुई।
एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पास पटना में 10 करोड़ का मकान: पूर्णिया में भवन निर्माण विभाग में पोस्टेड हैं सत्येंद्र
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बिहार में आय से अधिक संपत्ति के मामले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने भवन निर्माण विभाग के एक कार्यपालक अभियंता के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। पूर्णिया में पदस्थापित कार्यपालक अभियंता सत्येंद्र कुमार चौधरी से जुड़े पटना और पूर्णिया के तीन ठिकानों पर बुधवार को एक साथ छापेमारी की गई। निगरानी की अलग-अलग टीमों ने इन ठिकानों पर पहुंचकर जमीन-मकान से जुड़े कागजात, बैंक खातों के लेनदेन, निवेश और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच शुरू की। कार्रवाई का उद्देश्य यह पता लगाना है कि अधिकारी की घोषित और वैध आय की तुलना में उनके और उनके परिवार से जुड़े लोगों के नाम पर कितनी चल-अचल संपत्ति मौजूद है।

निगरानी ब्यूरो की कार्रवाई ऐसे मामले में की जा रही है जिसमें अधिकारी की संपत्ति और आय के बीच संभावित असमानता की जांच की जा रही है। आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जांच एजेंसी आम तौर पर संबंधित अधिकारी की वैध आय, वेतन, निवेश, बैंक खातों, जमीन-मकान और अन्य संपत्तियों का आकलन करती है। इसके बाद जांच अवधि में अर्जित संपत्ति और उस दौरान हुई वैध आय के बीच तुलना की जाती है। सत्येंद्र कुमार चौधरी के मामले में भी जांच टीम इसी तरह वित्तीय रिकॉर्ड को खंगाल रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक निगरानी टीमों ने पटना में दो और पूर्णिया में एक ठिकाने पर एक साथ तलाशी शुरू की। पटना के फुलवारी शरीफ इलाके में एम्स के पास निकुंज कॉलोनी स्थित मकान भी जांच के दायरे में है। रिपोर्ट में इस मकान को ‘स्वास्तिक’ नाम से बताए जाने की जानकारी सामने आई है। यह मकान सत्येंद्र कुमार चौधरी और उनकी पत्नी से जुड़ा बताया गया है। जांच टीम अब इस संपत्ति के स्वामित्व, इसके निर्माण पर हुए खर्च और उस खर्च के स्रोत से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन कर रही है।

इस कार्रवाई में पटना के एजी कॉलोनी स्थित कृषि नगर सी-9 के एक आवास की भी जांच की जा रही है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार इस मकान में सत्येंद्र कुमार चौधरी के दो भाई अपने परिवार के साथ रहते हैं। निगरानी टीम परिवार के सदस्यों के नाम पर मौजूद संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल कर रही है। आय से अधिक संपत्ति की जांच में केवल अधिकारी के नाम पर मौजूद संपत्तियां ही नहीं, बल्कि जांच के दायरे में आने वाले परिवार से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्ति के स्वामित्व की स्थिति भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

पटना में स्थित मकान की कीमत करीब 10 करोड़ रुपये होने की बात इस मामले के शीर्षक में सामने आई है, लेकिन संपत्ति का वास्तविक मूल्य और आय से अधिक संपत्ति की गणना जांच एजेंसी द्वारा दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही निर्धारित की जा सकती है। किसी संपत्ति की बाजार कीमत, निर्माण लागत, जमीन की कीमत और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज मूल्य अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए निगरानी की जांच में केवल मकान की अनुमानित कीमत नहीं, बल्कि उसके स्वामित्व और खरीद या निर्माण में इस्तेमाल धन के स्रोत की भी पड़ताल की जा रही है।

जांच टीम जमीन और मकान से जुड़े दस्तावेजों को खंगाल रही है। इसके साथ ही बैंक खातों में हुए लेनदेन और निवेश की जानकारी भी जुटाई जा रही है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि संपत्ति खरीदने या निर्माण कराने में रकम कहां से आई। यदि किसी संपत्ति के लिए भुगतान बैंकिंग माध्यम से हुआ है तो उससे जुड़े रिकॉर्ड भी जांच में महत्वपूर्ण होंगे। इसी तरह निवेश, जमा राशि और अन्य वित्तीय साधनों का विवरण भी आय और संपत्ति के बीच तुलना के लिए देखा जा सकता है।

सत्येंद्र कुमार चौधरी वर्तमान में भवन निर्माण विभाग में कार्यपालक अभियंता के पद पर पूर्णिया में तैनात बताए गए हैं। सरकारी इंजीनियरिंग विभाग में कार्यपालक अभियंता का पद निर्माण कार्यों और विभागीय परियोजनाओं की निगरानी से जुड़ा होता है। हालांकि इस मामले में किसी परियोजना या ठेके से जुड़ी अनियमितता का आरोप सामने नहीं आया है। वर्तमान कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामले की जांच के रूप में की जा रही है।

निगरानी ब्यूरो की टीमों द्वारा एक साथ कई ठिकानों पर तलाशी लेने से जांच का दायरा व्यापक होने का संकेत मिलता है। पटना और पूर्णिया दोनों स्थानों पर दस्तावेजों की जांच की जा रही है। अलग-अलग जगहों से मिलने वाले रिकॉर्ड को आपस में मिलाकर संपत्तियों के स्वामित्व और धन के स्रोत की जानकारी जुटाई जा सकती है। अगर किसी संपत्ति का संबंध अधिकारी या उनके परिवार से पाया जाता है तो उसकी खरीद, निर्माण और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड भी जांचे जाएंगे।

आय से अधिक संपत्ति के मामलों में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आय और संपत्ति का तुलनात्मक आकलन होता है। किसी सरकारी कर्मचारी की संपत्ति अधिक होना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। जांच एजेंसी को यह देखना होता है कि संबंधित संपत्ति वैध आय, पैतृक संपत्ति, ऋण, निवेश, अन्य वैध स्रोत या किसी दूसरे माध्यम से हासिल हुई है। इसी कारण दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि जांच एजेंसी को किन संपत्तियों और लेनदेन को लेकर आपत्ति है।

पटना स्थित संपत्तियों की जांच के दौरान जमीन के कागजात, मकान से संबंधित दस्तावेज और बैंकिंग रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यदि किसी संपत्ति के निर्माण में बड़ी रकम खर्च हुई है तो निर्माण से संबंधित भुगतान, ठेकेदारों और सामग्री से जुड़े दस्तावेज भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। इसी तरह जमीन की खरीद के मामले में रजिस्ट्री दस्तावेज और भुगतान के स्रोत को देखा जा सकता है।

जांच एजेंसी परिवार से जुड़े वित्तीय लेनदेन पर भी नजर डाल रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना हो सकता है कि अधिकारी की आय और संपत्ति के अतिरिक्त परिवार के सदस्यों के नाम पर ऐसी संपत्तियां या निवेश तो नहीं हैं, जिनका वास्तविक वित्तीय स्रोत अधिकारी की आय से जुड़ा हो। हालांकि किसी रिश्तेदार के नाम पर संपत्ति होना मात्र इस आधार पर अवैध नहीं माना जा सकता। प्रत्येक संपत्ति के स्वामित्व और धन के स्रोत का अलग-अलग सत्यापन जरूरी होता है।

पूर्णिया में पदस्थापना के दौरान अधिकारी से जुड़े किसी वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट में निगरानी कार्रवाई का मुख्य फोकस संपत्ति, बैंक लेनदेन और निवेश से जुड़े दस्तावेजों पर बताया गया है। जांच के दौरान बरामद दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड का विश्लेषण होने के बाद ही मामले में संपत्ति की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

निगरानी ब्यूरो की इस कार्रवाई के बाद सरकारी विभागों में भी संपत्ति और वित्तीय लेनदेन से जुड़े मामलों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। सरकारी अधिकारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की जांच में एजेंसियां आम तौर पर दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाती हैं। तलाशी के दौरान मिले कागजात जांच के अगले चरण के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

फिलहाल यह कार्रवाई तलाशी और जांच के स्तर पर है। सत्येंद्र कुमार चौधरी के खिलाफ लगाए गए आय से अधिक संपत्ति के आरोपों का अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों के आधार पर निगरानी ब्यूरो आगे की कार्रवाई तय कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक जांच टीम संपत्ति के स्वामित्व, निर्माण या खरीद पर खर्च हुई रकम तथा उसके स्रोत का सत्यापन कर रही है।

पटना में बताए जा रहे मकान और अन्य संपत्तियों के साथ-साथ बैंक खातों और निवेश की जांच से अब यह पता लगाने की कोशिश होगी कि अधिकारी की घोषित आय और उनकी कुल संपत्ति के बीच कितना अंतर है। जांच में यदि किसी संपत्ति का वैध स्रोत दस्तावेजों से सामने आता है तो उसे उसी आधार पर आकलन में शामिल किया जाएगा। वहीं जिन संपत्तियों या लेनदेन का संतोषजनक स्रोत सामने नहीं आता, उनके बारे में जांच एजेंसी अपनी कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ सकती है।

फिलहाल निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीमें पटना और पूर्णिया में दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं। तीन ठिकानों पर एक साथ शुरू हुई इस कार्रवाई में जमीन-मकान के कागजात, बैंकिंग लेनदेन और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड जुटाए जा रहे हैं। आने वाले चरण में इन दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित आय से अधिक संपत्ति कितनी है और इस मामले में आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है।

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