Bihar Exit Polls: बिहार एग्जिट पोल्स में एनडीए की बढ़त, 11 सर्वे में स्पष्ट बहुमत का अनुमान

Bihar Exit Polls: बिहार एग्जिट पोल्स में एनडीए की बढ़त, 11 सर्वे में स्पष्ट बहुमत का अनुमान

बिहार एग्जिट पोल्स में एनडीए को सत्ता में वापसी का अनुमान है। 11 में से 10 सर्वे में एनडीए को बहुमत दिखाया गया है। एक्सिस माई इंडिया ने कांटे की टक्कर बताई है। असली नतीजे 14 नवंबर को आएंगे।

Bihar Exit Polls: बिहार विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल नतीजे सामने आ चुके हैं और इनमें से ज्यादातर सर्वे एनडीए को सत्ता में वापसी करते हुए दिखा रहे हैं। कुल 11 एग्जिट पोल में से 10 में एनडीए गठबंधन को बहुमत मिलते हुए दिखाया गया है, जबकि एक एग्जिट पोल में कांटे की टक्कर का संकेत दिया गया है। इस अनुमान ने चुनाव नतीजों को लेकर उत्सुकता और रोमांच दोनों बढ़ा दिए हैं।

दो चरणों में हुआ बिहार विधानसभा चुनाव

बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों के लिए दो चरणों में मतदान हुआ। पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को और दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को हुआ। अब राज्य की जनता 14 नवंबर का इंतजार कर रही है, जब आधिकारिक नतीजे सामने आएंगे।

इस बार का चुनाव एनडीए और महागठबंधन के बीच सीधी टक्कर के रूप में देखा गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए, जबकि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन मैदान में उतरा था।

ज्यादातर एग्जिट पोल में एनडीए की सरकार

मतदान खत्म होने के बाद सामने आए मैट्रिज, पी मार्क, जेवीसी पोल, पीपल्स पल्स, पीपल्स इनसाइड, चाणक्य स्ट्रैटजीज और एनडीटीवी पोल ऑफ पोल्स जैसे सर्वेक्षणों ने एनडीए को बहुमत के साथ सरकार बनाते हुए दिखाया है।

इन सर्वे के मुताबिक, एनडीए को 125 से 170 सीटों के बीच जीत मिल सकती है, जो बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में स्पष्ट बहुमत के लिए पर्याप्त है। वहीं, महागठबंधन 90 से 115 सीटों के बीच सीमित रह सकता है।

एक्सिस माई इंडिया ने दिया अलग अनुमान

इन सभी अनुमानों के बीच एक्सिस माई इंडिया का सर्वे कुछ अलग कहानी कह रहा है। इस सर्वे के अनुसार, बिहार में एनडीए बहुमत के आंकड़े से थोड़ा पीछे रह सकता है। एक्सिस माई इंडिया ने एनडीए को 121 से 140 सीटें, महागठबंधन को 98 से 118 सीटें और प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को 0 से 2 सीटों के बीच सीमित बताया है।

बिहार विधानसभा में बहुमत के लिए 122 सीटों की जरूरत होती है। ऐसे में यदि एक्सिस माई इंडिया का अनुमान सही साबित होता है तो एनडीए एक सीट से बहुमत के आंकड़े से पीछे रह सकता है। यह स्थिति चुनाव के नतीजों को रोमांचक बना देती है।

वोट शेयर में सिर्फ दो प्रतिशत का अंतर

एक्सिस माई इंडिया के अनुसार, बिहार में वोट शेयर का अंतर बहुत मामूली है। सर्वे में एनडीए को 43 प्रतिशत और महागठबंधन को 41 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान लगाया गया है। यानी दोनों के बीच केवल दो प्रतिशत का अंतर है।

यह मामूली अंतर तय करेगा कि बिहार की सत्ता पर कौन काबिज होगा। अगर यह अनुमान सही साबित हुआ, तो नतीजे बेहद करीबी हो सकते हैं और कई सीटों पर मुकाबला आखिरी वोट तक पहुंच सकता है।

एनडीए को कई सर्वे में स्पष्ट बहुमत

कई अन्य एग्जिट पोल ने एनडीए को स्पष्ट बहुमत दिया है। सीएनएक्स (CNX) के मुताबिक, एनडीए 150 से 170 सीटों तक पहुंच सकता है, जो दो-तिहाई बहुमत से भी ज्यादा है। इस अनुमान के मुताबिक, एनडीए राज्य की राजनीति में मजबूत वापसी कर सकता है।

वहीं, वोट वाइब (Vote Vibe) ने अपने सर्वे में एनडीए को 125 से 145 सीटें और महागठबंधन को 95 से 115 सीटें दी हैं। इन आंकड़ों से यह साफ होता है कि ज्यादातर सर्वे एनडीए की सरकार बनने का अनुमान लगा रहे हैं।

2020 के नतीजों से तुलना

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और उसे 75 सीटें मिली थीं। उस समय एनडीए गठबंधन को कुल 125 सीटें हासिल हुई थीं। भाजपा ने 74 और जेडीयू ने 43 सीटें जीती थीं।

इस बार के एग्जिट पोल संकेत दे रहे हैं कि जेडीयू का प्रदर्शन सुधर सकता है, जबकि भाजपा को कुछ सीटों का नुकसान हो सकता है। सर्वे के मुताबिक, जेडीयू को 56 से 62 सीटें और भाजपा को 50 से 56 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, कांग्रेस को 17 से 21 सीटों के बीच सीमित बताया गया है।

महागठबंधन के लिए उम्मीद की किरण

हालांकि ज्यादातर सर्वे एनडीए की जीत का संकेत दे रहे हैं, लेकिन महागठबंधन पूरी तरह निराश नहीं है। एक्सिस माई इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, यदि महागठबंधन को ऊपरी अनुमान यानी 118 सीटें मिलती हैं, तो वह बहुमत के बेहद करीब पहुंच जाएगा।

तेजस्वी यादव ने एग्जिट पोल को खारिज करते हुए कहा है कि बिहार की जनता इस बार बदलाव चाहती है और वास्तविक नतीजे एनडीए के अनुमानों को गलत साबित करेंगे। उन्होंने दावा किया है कि 2020 की तरह इस बार भी कई एग्जिट पोल गलत साबित होंगे।

जन सुराज पार्टी का असर सीमित

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को लेकर लोगों में काफी चर्चा थी, लेकिन एग्जिट पोल्स के अनुसार इस पार्टी का असर बहुत सीमित रहने वाला है। लगभग सभी सर्वे ने इसे 0 से 2 सीटों के बीच दिखाया है। इसका मतलब है कि जन सुराज पार्टी फिलहाल बिहार की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने की स्थिति में नहीं है।

मतदाताओं की भूमिका रही अहम

इस चुनाव में मतदाताओं ने काफी उत्साह दिखाया। दो चरणों में हुए मतदान में लगभग 60 प्रतिशत से ज्यादा लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि युवाओं और महिलाओं का वोट इस बार परिणामों को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकता है।

पिछले एग्जिट पोल्स से सीख

बिहार में 2020 के विधानसभा चुनाव में भी कई एग्जिट पोल गलत साबित हुए थे। उस समय लगभग सभी सर्वेक्षणों ने महागठबंधन को बढ़त दिखाई थी, लेकिन वास्तविक नतीजों में एनडीए ने बढ़त बना ली थी। इस बार भी राजनीतिक विशेषज्ञ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं और कह रहे हैं कि अंतिम फैसला 14 नवंबर को मतगणना के बाद ही साफ होगा।

नतीजों से पहले बढ़ी सियासी सरगर्मी

एग्जिट पोल्स आने के बाद बिहार की राजनीति में सरगर्मी बढ़ गई है। एनडीए के नेता जहां इसे जनता के समर्थन का प्रमाण बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे आंकड़ों का खेल कहकर खारिज कर रहा है। सभी दल अपने-अपने स्तर पर संभावित परिणामों की तैयारी में जुट गए हैं। पटना में राजनीतिक दलों के दफ्तरों पर हलचल तेज है। भाजपा और जेडीयू ने अपनी रणनीति पर चर्चा शुरू कर दी है, जबकि आरजेडी ने भी अपने वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की है।

जनता की निगाहें 14 नवंबर पर

अब बिहार की जनता की निगाहें 14 नवंबर पर टिकी हैं, जब असली नतीजे सामने आएंगे। एग्जिट पोल ने तो तस्वीर का एक अनुमान भर पेश किया है, लेकिन अंतिम फैसला जनता के वोटों से तय होगा।

यदि एनडीए को बहुमत मिलता है, तो नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। लेकिन अगर एक्सिस माई इंडिया का अनुमान सही साबित हुआ, तो राज्य में राजनीतिक समीकरण पलट भी सकते हैं।

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