बिहार आने वाली ट्रेनों में अभी से नो रूम, नवंबर तक कन्फर्म टिकट नहीं; दुर्गापूजा-दीपावली पर घर लौटना मुश्किल

दुर्गापूजा, दीपावली और छठ से पहले बिहार आने वाली कई ट्रेनों में नो रूम है। नवंबर मध्य तक कन्फर्म टिकट नहीं, प्रवासियों की नजर स्पेशल ट्रेनों पर टिकी है।
बिहार आने वाली ट्रेनों में अभी से नो रूम, नवंबर तक कन्फर्म टिकट नहीं; दुर्गापूजा-दीपावली पर घर लौटना मुश्किल
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दुर्गापूजा, दीपावली और छठ महापर्व जैसे बड़े त्योहारों के नजदीक आते ही बिहार के बाहर रहने वाले प्रवासियों की घर वापसी की चिंता बढ़ने लगी है। त्योहारों पर परिवार के साथ समय बिताने और अपने गांव-शहर लौटने की तैयारी कर रहे लोगों के सामने सबसे बड़ी परेशानी अब रेल टिकट को लेकर खड़ी हो गई है। बिहार आने वाली कई प्रमुख ट्रेनों में अभी से सीटें तेजी से भर गई हैं और कई ट्रेनों में नवंबर के मध्य तक कन्फर्म टिकट उपलब्ध नहीं है। गोपालगंज सहित बिहार के अलग-अलग जिलों में रहने वाले ऐसे परिवार, जिनके सदस्य दिल्ली, मुंबई, सूरत, अहमदाबाद, कोलकाता और दूसरे बड़े शहरों में नौकरी या कारोबार करते हैं, उन्हें त्योहार के समय घर लौटने के लिए अभी से वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में सोचना पड़ रहा है।

त्योहारों के दौरान बिहार की ओर आने वाली ट्रेनों में हर साल यात्रियों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है। इस बार भी आरक्षण खुलने के साथ ही लंबी दूरी की ट्रेनों की सीटें तेजी से भर रही हैं। स्थिति यह है कि कई महत्वपूर्ण ट्रेनों में अलग-अलग तारीखों के लिए नो रूम यानी आरक्षण उपलब्ध नहीं होने की स्थिति सामने आ रही है। इसका सीधा असर उन प्रवासियों पर पड़ रहा है, जो कई महीने पहले से त्योहार के दौरान घर आने की योजना बनाते हैं। परिवार के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए समस्या और बढ़ जाती है, क्योंकि एक साथ कई सीटें उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा है।

गोपालगंज के यात्रियों के लिए भी यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। जिले के बड़ी संख्या में लोग रोजी-रोजगार के सिलसिले में दूसरे राज्यों और महानगरों में रहते हैं। दुर्गापूजा, दीपावली और छठ के समय इनमें से बड़ी संख्या में लोग अपने घर लौटते हैं। इस दौरान बिहार आने वाली ट्रेनों में पहले से ही भारी मांग रहती है। अब जब प्रमुख ट्रेनों में कई तारीखों तक आरक्षण उपलब्ध नहीं है, तो प्रवासियों को यात्रा की तारीख बदलने, दूसरी ट्रेन तलाशने या रेलवे की ओर से घोषित होने वाली पूजा स्पेशल ट्रेनों का इंतजार करने जैसे विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।

रेलवे आरक्षण केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक, लिच्छवी एक्सप्रेस में 14 नवंबर तक नो रूम की स्थिति बताई गई है। इसी तरह गरीब रथ में 13 नवंबर और बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में 15 नवंबर तक आरक्षण उपलब्ध नहीं है। वैशाली एक्सप्रेस में भी पांच नवंबर तक सीटें फुल बताई गई हैं। आम्रपाली एक्सप्रेस में भी त्योहार के आसपास सीटों की उपलब्धता बेहद सीमित हो गई है। इन ट्रेनों में बिहार आने वाले यात्रियों की बड़ी संख्या निर्भर करती है, इसलिए इनका फुल होना यात्रियों की परेशानी को और बढ़ा रहा है।

सिर्फ दिल्ली या उत्तर भारत से बिहार आने वाली ट्रेनों में ही दबाव नहीं है। अलग-अलग रूट से बिहार पहुंचने वाली कई ट्रेनों में भी आरक्षण की स्थिति खराब बताई जा रही है। न्यू जलपाईगुड़ी एक्सप्रेस में 13 अक्टूबर तक आरक्षण नहीं मिल रहा है। अवध-असम एक्सप्रेस में करीब 60 दिनों तक नो रूम की स्थिति बताई गई है। बाघ एक्सप्रेस में 13 नवंबर, पवन एक्सप्रेस में 10 नवंबर और गोरखधाम एक्सप्रेस में नौ नवंबर तक कन्फर्म टिकट मिलने की गुंजाइश नहीं है। इससे साफ है कि त्योहारों की मांग का असर एक-दो रूट तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार से जुड़े कई प्रमुख रेल कॉरिडोर पर इसका दबाव दिखाई दे रहा है।

बलिया-सियालदह एक्सप्रेस में भी 31 अक्टूबर तक नो रूम की स्थिति है। अहमदाबाद-गोरखपुर एक्सप्रेस में 11 नवंबर और गंगा-कावेरी एक्सप्रेस में 15 नवंबर तक आरक्षण उपलब्ध नहीं होने की जानकारी सामने आई है। इन ट्रेनों से बिहार और आसपास के इलाकों तक पहुंचने वाले यात्रियों के लिए भी त्योहार के दौरान यात्रा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। खासकर वे यात्री जो नौकरी, व्यवसाय या पढ़ाई के कारण लंबे समय से घर से बाहर हैं, वे त्योहार के कुछ दिन परिवार के साथ बिताने के लिए घर लौटना चाहते हैं। लेकिन टिकट की स्थिति देखकर उन्हें अभी से अपनी यात्रा की रणनीति बदलनी पड़ सकती है।

कन्फर्म टिकट नहीं मिलने के बाद बड़ी संख्या में यात्री वेटिंग टिकट का सहारा लेते हैं। हालांकि त्योहारों की भीड़ के दौरान लंबी वेटिंग वाले टिकट के कन्फर्म होने की कोई निश्चित गारंटी नहीं होती। ऐसे में केवल वेटिंग टिकट लेकर यात्रा की योजना बनाना जोखिम भरा हो सकता है, खासकर तब जब यात्री के साथ परिवार के सदस्य, बच्चे या बुजुर्ग हों। यही कारण है कि कई यात्री अब रेलवे की ओर से घोषित होने वाली अतिरिक्त और पूजा स्पेशल ट्रेनों पर नजर बनाए हुए हैं।

त्योहारों के मद्देनजर रेलवे की ओर से स्पेशल ट्रेनों की तैयारी भी की जा रही है। हाल के दिनों में बिहार से जुड़े कई रूट पर फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों की घोषणाएं हुई हैं। उदाहरण के लिए, छपरा और आनंद विहार टर्मिनल के बीच थावे होकर पूजा स्पेशल ट्रेन चलाने की घोषणा की गई है। यह ट्रेन छह अक्टूबर से 24 नवंबर तक निर्धारित दिनों में चलेगी और दोनों दिशाओं में आठ-आठ फेरे तय किए गए हैं। इस ट्रेन के परिचालन से गोपालगंज और आसपास के यात्रियों को त्योहार के समय दिल्ली क्षेत्र से आने-जाने के लिए एक अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है।

इसी तरह बिहार के दूसरे हिस्सों के लिए भी रेलवे ने त्योहारों के दौरान अतिरिक्त ट्रेनों की तैयारी की है। भागलपुर से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और अन्य रूटों पर स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की गई है। इससे संकेत मिलता है कि रेलवे त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली मांग को देखते हुए नियमित ट्रेनों के अलावा अतिरिक्त सेवाओं के जरिए यात्रियों को राहत देने की कोशिश कर रहा है।

मुजफ्फरपुर और दरभंगा रूट पर भी फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन की घोषणा की गई है। नई दिल्ली और दरभंगा के बीच चलने वाली विशेष सेवा को त्योहारों में बढ़ने वाली भीड़ को ध्यान में रखते हुए शुरू किया जा रहा है। इसी तरह आनंद विहार टर्मिनल से जोगबनी के बीच भी फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन का रूट और ठहराव तय किया गया है। इन अतिरिक्त ट्रेनों का उद्देश्य त्योहार के दौरान बढ़ने वाली यात्री मांग को संभालना और नियमित ट्रेनों पर पड़ने वाले दबाव को कम करना है।

फिर भी गोपालगंज के यात्रियों के लिए किसी विशेष ट्रेन का लाभ तभी स्पष्ट होगा, जब उसके रूट में जिले या आसपास के उपयोगी स्टेशनों को ठहराव मिले। अभी यात्रियों की सबसे बड़ी उम्मीद ऐसी ट्रेनों से है, जिनसे उन्हें नजदीकी स्टेशन तक पहुंचने का विकल्प मिल सके। रेलवे द्वारा अलग-अलग जोन और रूट के लिए स्पेशल ट्रेन की घोषणा किए जाने के बाद यात्रियों को उनके ठहराव, परिचालन की तारीख और टिकट उपलब्धता की जानकारी देखनी होगी।

त्योहारी सीजन में टिकट की मांग अचानक बढ़ने की एक बड़ी वजह यह भी है कि बिहार के लाखों लोग रोजगार और पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों में रहते हैं। दिल्ली-एनसीआर, महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और दूसरे राज्यों से बिहार आने वाले यात्रियों की संख्या त्योहार के समय काफी बढ़ जाती है। दुर्गापूजा और दीपावली के बाद छठ महापर्व भी बिहार लौटने वाले प्रवासियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर होता है। इसलिए कई लोग एक ही अवधि में यात्रा की योजना बनाते हैं और सीमित सीटों पर अचानक दबाव बढ़ जाता है।

ऐसे समय में यात्रियों के सामने सिर्फ टिकट की समस्या नहीं होती, बल्कि यात्रा की तारीख और ट्रेन का चुनाव भी चुनौती बन जाता है। जिस तारीख पर सामान्य दिनों में आसानी से सीट मिल सकती है, उसी तारीख पर त्योहार के आसपास आरक्षण खुलते ही सीटें तेजी से भर जाती हैं। परिवार के साथ आने वाले यात्रियों को एक ही ट्रेन और एक ही श्रेणी में कई सीटें चाहिए होती हैं, जिससे उपलब्ध सीटों का विकल्प और सीमित हो जाता है। इसके कारण कई यात्रियों को अलग-अलग तारीखों में टिकट देखने या वैकल्पिक ट्रेनों की तलाश करने की जरूरत पड़ सकती है।

त्योहार के समय वेटिंग टिकट की संख्या बढ़ने के साथ यात्रियों की चिंता भी बढ़ती है। कई लोग महीनों पहले अपनी यात्रा तय कर लेते हैं, लेकिन अगर टिकट कन्फर्म नहीं होता तो अंतिम समय में दूसरी व्यवस्था करना कठिन हो जाता है। बस और हवाई यात्रा के विकल्प उपलब्ध जरूर हैं, लेकिन लंबी दूरी की पारिवारिक यात्रा में यात्रियों की प्राथमिकता अक्सर रेल यात्रा रहती है। इसलिए स्पेशल ट्रेनों की घोषणा और उनमें टिकट उपलब्ध होना उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है, जिन्हें नियमित ट्रेनों में जगह नहीं मिल पा रही है।

रेलवे की ओर से त्योहारों के लिए अतिरिक्त ट्रेनों के साथ जरूरत के अनुसार ट्रेनों के फेरे बढ़ाने और अतिरिक्त कोच लगाने की तैयारी भी की जा रही है। इससे नियमित ट्रेनों पर दबाव कम करने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि किसी खास यात्री को कब और किस ट्रेन में कन्फर्म सीट मिलेगी, यह संबंधित ट्रेन की उपलब्धता और बुकिंग पर निर्भर करेगा। इसलिए यात्रियों के लिए जरूरी है कि वे केवल एक ट्रेन पर निर्भर रहने के बजाय उपलब्ध विकल्पों की जानकारी लेते रहें।

गोपालगंज सहित बिहार के प्रवासियों के लिए इस समय सबसे अहम बात यह है कि त्योहारों की यात्रा को आखिरी समय तक न टालें। जिन लोगों ने अभी तक यात्रा की तारीख तय नहीं की है, वे अलग-अलग तारीखों और रूट की उपलब्धता देख सकते हैं। जिन ट्रेनों में नो रूम है, उनमें टिकट मिलने की उम्मीद के भरोसे रहने के बजाय दूसरी ट्रेनों और घोषित होने वाली स्पेशल सेवाओं पर नजर रखना उपयोगी होगा। रेलवे की नई घोषणाओं के साथ सीटों की स्थिति बदल सकती है, इसलिए टिकट बुक करने से पहले संबंधित ट्रेन का ताजा आरक्षण स्टेटस जरूर देखना चाहिए।

दुर्गापूजा, दीपावली और छठ बिहार के लिए केवल त्योहार नहीं बल्कि बड़ी संख्या में प्रवासी परिवारों की घर वापसी का समय भी होते हैं। ऐसे में रेल यात्रा की मांग सामान्य दिनों के मुकाबले कई गुना बढ़ जाती है। इस बार नवंबर के मध्य तक कई प्रमुख ट्रेनों में आरक्षण उपलब्ध नहीं होने की स्थिति सामने आने से यात्रियों की चिंता पहले ही बढ़ गई है। अब उनकी नजर रेलवे की ओर से घोषित की जा रही और आने वाले दिनों में घोषित होने वाली पूजा स्पेशल ट्रेनों पर है। अगर अतिरिक्त सेवाओं में पर्याप्त सीटें उपलब्ध होती हैं, तो नियमित ट्रेनों पर बने दबाव को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। फिलहाल जिन यात्रियों को त्योहार पर बिहार आना है, उनके लिए टिकट की स्थिति लगातार जांचते रहना और वैकल्पिक ट्रेन या यात्रा तारीख तैयार रखना सबसे जरूरी है।

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