बिहार में बाढ़ का कहर: गंगा में फंसा राजमहल क्रूज, 9 विदेशी टूरिस्ट सुरक्षित निकाले गए; 2360 गांवों में पानी

बिहार में बाढ़ से 14 जिलों के 2360 गांव और 44 लाख लोग प्रभावित हैं। गंगा में फंसे राजमहल क्रूज से 9 विदेशी समेत 11 पर्यटक सुरक्षित निकाले गए।
बिहार में बाढ़ का कहर: गंगा में फंसा राजमहल क्रूज, 9 विदेशी टूरिस्ट सुरक्षित निकाले गए; 2360 गांवों में पानी
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बिहार में बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। गंगा समेत कई नदियों के बढ़े जलस्तर के कारण राज्य के 14 जिलों के 2,360 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार करीब 44 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। कई इलाकों में लोगों का सामान्य जनजीवन प्रभावित है और प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव कार्य जारी है। इसी बीच भागलपुर में गंगा के बढ़े जलस्तर के कारण कोलकाता से वाराणसी जा रहा राजमहल गंगा क्रूज कई दिनों से फंसा हुआ था। क्रूज पर सवार 9 विदेशी समेत 11 पर्यटकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है।

राजमहल क्रूज कोलकाता से वाराणसी की यात्रा पर निकला था। गंगा के रास्ते चल रहे इस क्रूज को भागलपुर पहुंचने के बाद आगे बढ़ने में परेशानी हुई। नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण पुल के नीचे क्रूज के निकलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची थी। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए क्रूज को रोक दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक यह क्रूज 5 सितंबर को विक्रमशिला सेतु पार कर भागलपुर पहुंचा था और 6 सितंबर से गंगा में लंगर डालकर खड़ा था।

गंगा में पानी बढ़ने के कारण बड़े जहाज के लिए पुलों के नीचे से निकलना जोखिम भरा हो जाता है। पानी का स्तर बढ़ने के साथ नदी की सतह और पुल के निचले हिस्से के बीच की दूरी कम हो जाती है। ऐसी स्थिति में क्रूज के ऊपरी हिस्से के पुल से टकराने का खतरा रहता है। यही वजह है कि यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए क्रूज को आगे नहीं बढ़ाया गया और वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए पर्यटकों को सुरक्षित निकालने का फैसला लिया गया।

क्रूज में सवार 9 विदेशी पर्यटकों समेत कुल 11 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। विदेशी पर्यटकों को सुरक्षित निकालने के बाद उन्हें आगे की यात्रा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। इस पूरी कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि गंगा में बाढ़ की स्थिति के बीच पर्यटक किसी जोखिम में न रहें।

राजमहल क्रूज का फंसना बिहार में बाढ़ की गंभीरता को भी दिखाता है। आमतौर पर गंगा के रास्ते पर्यटक क्रूज कोलकाता और वाराणसी के बीच यात्रा करते हैं। लेकिन इस समय नदी का जलस्तर सामान्य नहीं है। गंगा में तेज बहाव और बढ़े पानी के कारण नदी परिवहन के लिए भी अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है। क्रूज के मामले में भी यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उसे रोकना पड़ा।

बिहार में बाढ़ का दायरा भी लगातार बड़ा हुआ है। राज्य के 14 जिलों के करीब 2,360 गांव बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं। इन इलाकों में करीब 44 लाख लोगों पर बाढ़ का असर पड़ा है। कई जगह लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि प्रशासन की ओर से नावों और अन्य साधनों के जरिए राहत सामग्री पहुंचाने का काम किया जा रहा है।

बाढ़ के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा परेशानी आवागमन को लेकर है। जिन गांवों में सड़क संपर्क पानी में डूब गया है, वहां नाव ही लोगों के लिए मुख्य साधन बन गई है। दैनिक जरूरतों के सामान, दवाइयां और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए प्रशासन को जलमार्ग का सहारा लेना पड़ रहा है। कई परिवारों के सामने पशुओं के चारे और सुरक्षित ठिकाने की भी समस्या बनी हुई है।

बिहार में बाढ़ की स्थिति उस समय और चुनौतीपूर्ण हो गई है जब मानसून की गतिविधियां एक बार फिर बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। ताजा मौसम पूर्वानुमान के अनुसार 15 से 17 सितंबर के बीच राज्य के कई हिस्सों में बारिश बढ़ सकती है। उत्तर-पूर्वी बिहार में कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना भी जताई गई है।

आज यानी 14 सितंबर को राज्य के कई जिलों में हल्की बारिश की संभावना बताई गई है। पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीवान, सारण, गोपालगंज, बक्सर, भोजपुर, रोहतास और कैमूर में हल्की बूंदाबांदी की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल मानसून कुछ कमजोर है, लेकिन अगले कुछ दिनों में इसकी गतिविधि फिर बढ़ सकती है।

पटना में भी बारिश दर्ज की गई है। पिछले 24 घंटे के दौरान राजधानी में करीब 6 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। वहीं किशनगंज के टेढ़ागाछ में 67 मिलीमीटर बारिश हुई। इससे पता चलता है कि राज्य में बारिश का वितरण एक समान नहीं है। कुछ जिलों में हल्की बारिश हो रही है, जबकि कुछ इलाकों में नदी के बढ़े जलस्तर के कारण बाढ़ का संकट ज्यादा गंभीर बना हुआ है।

बाढ़ की मौजूदा स्थिति के बीच राज्य की कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार आठ नदियां खतरे के निशान से ऊपर हैं। गंगा के बढ़े जलस्तर का असर उसके आसपास के इलाकों के साथ-साथ सहायक नदियों पर भी पड़ रहा है। जब मुख्य नदी का जलस्तर काफी ऊपर चला जाता है तो सहायक नदियों का पानी भी आसानी से बाहर नहीं निकल पाता। इससे निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ की स्थिति लंबे समय तक बनी रह सकती है।

बिहार में इस साल बाढ़ की स्थिति इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि मानसून के बड़े हिस्से में राज्य में सामान्य से कम बारिश हुई थी। इसके बावजूद सितंबर में अचानक नदियों का जलस्तर बढ़ा और कई जिलों में बाढ़ आ गई। विशेषज्ञों ने इस स्थिति को जटिल नदी प्रवाह, अलग-अलग क्षेत्रों में हुई तेज बारिश और गंगा के बढ़े जलस्तर से जोड़कर समझाया है।

गंगा का बढ़ा जलस्तर भागलपुर, पटना और आसपास के क्षेत्रों के लिए विशेष चिंता का विषय बना हुआ है। भागलपुर में पहले से ही कई निचले इलाकों में बाढ़ का असर है। ऐसे में गंगा में चलने वाले बड़े क्रूज का रुकना नदी की मौजूदा स्थिति की गंभीरता को सामने लाता है। राजमहल क्रूज को सुरक्षित स्थान पर रोकने के बाद यात्रियों को निकालना इसलिए जरूरी समझा गया क्योंकि नदी की स्थिति सामान्य होने तक जहाज को आगे बढ़ाना जोखिम भरा हो सकता था।

राजमहल क्रूज पर सवार विदेशी पर्यटकों के सुरक्षित निकाले जाने के बाद प्रशासन और यात्रियों के परिवारों ने राहत की सांस ली है। अगर क्रूज को बढ़े जलस्तर के बीच आगे बढ़ाने की कोशिश की जाती तो पुलों के नीचे कम जगह होने के कारण खतरा बढ़ सकता था। ऐसे में समय रहते यात्रियों को निकालना सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम रहा।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान भी लगातार चल रहा है। खगड़िया में बाढ़ प्रभावित लोगों के इलाज के लिए नाव पर ही अस्पताल जैसी व्यवस्था की गई है। जलमग्न इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना बड़ी चुनौती है, इसलिए मोबाइल मेडिकल टीमों और नाव आधारित स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत बढ़ गई है।

बाढ़ का असर केवल घरों और सड़कों तक सीमित नहीं है। खेती, पशुपालन, स्थानीय कारोबार और बच्चों की पढ़ाई तक प्रभावित हो रही है। लंबे समय तक पानी जमा रहने से खेतों में लगी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। पशुपालकों के सामने चारे की समस्या पैदा होती है और गांवों में रोजमर्रा की जरूरतों का सामान पहुंचाना मुश्किल हो जाता है।

हालांकि कुछ इलाकों में जलस्तर में धीरे-धीरे कमी के संकेत भी मिल रहे हैं, लेकिन प्रशासन अभी खतरा पूरी तरह टलने की बात नहीं कर रहा है। भागलपुर समेत कई क्षेत्रों में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। इसलिए निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को अभी भी सतर्क रहने की जरूरत है।

मौसम विभाग के अगले कुछ दिनों के पूर्वानुमान ने भी प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। अगर 15 से 17 सितंबर के बीच राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश तेज होती है तो पहले से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मुश्किलें बढ़ सकती हैं। खासकर उत्तर-पूर्वी बिहार में भारी बारिश होने पर नदियों के जलस्तर में फिर वृद्धि हो सकती है।

फिलहाल बिहार में बाढ़ और बारिश दोनों मोर्चों पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। एक तरफ 14 जिलों के 2,360 गांवों में करीब 44 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, दूसरी तरफ आने वाले दिनों में बारिश बढ़ने का अनुमान है। इसी बीच भागलपुर में गंगा में फंसे राजमहल क्रूज से 9 विदेशी समेत 11 पर्यटकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। क्रूज की यात्रा बाढ़ और गंगा के बढ़े जलस्तर के कारण प्रभावित हुई, लेकिन यात्रियों को सुरक्षित निकालकर एक बड़ी चिंता दूर कर दी गई है।

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