बिहार के सब्जी बेचने वाले के बेटे के मुरीद हुए पीएम मोदी कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता ब्रॉन्ज मेडल पिता बोले- सब्जी बेचकर बेटे का सपना किया पूरा

बिहार के दिव्यांग खिलाड़ी ने कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी उपलब्धि की सराहना की, जबकि पिता ने बताया कि सब्जी बेचकर बेटे की प्रैक्टिस कराई।
बिहार के सब्जी बेचने वाले के बेटे के मुरीद हुए पीएम मोदी कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता ब्रॉन्ज मेडल पिता बोले- सब्जी बेचकर बेटे का सपना किया पूरा
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बिहार के एक दिव्यांग खिलाड़ी ने अपनी मेहनत, संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश और राज्य का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि की चर्चा पूरे देश में हो रही है। खिलाड़ी की सफलता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी उपलब्धि की सराहना की, जिसके बाद यह प्रेरणादायक कहानी लोगों के बीच और अधिक चर्चा में आ गई।

इस सफलता के पीछे वर्षों का कठिन संघर्ष छिपा है। खिलाड़ी के पिता ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। घर का खर्च चलाने के लिए वे वर्षों तक सब्जी बेचने का काम करते रहे। इसी कमाई से बेटे की खेल सामग्री, अभ्यास, प्रतियोगिताओं में भागीदारी और यात्रा का खर्च उठाया गया। कई बार आर्थिक तंगी आई, लेकिन उन्होंने बेटे के सपनों को कभी टूटने नहीं दिया।

पिता ने भावुक होकर कहा कि परिवार ने कई मुश्किल दौर देखे, लेकिन बेटे ने कभी हार नहीं मानी। सुबह-शाम नियमित अभ्यास, अनुशासन और लगातार मेहनत के बल पर उसने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई और फिर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने में सफलता हासिल की। उन्होंने कहा कि आज बेटे का मेडल केवल उनके परिवार का नहीं, बल्कि पूरे बिहार का सम्मान है।

खिलाड़ी की इस उपलब्धि के बाद उनके गांव और जिले में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोग इसे बिहार के युवाओं के लिए प्रेरणा बता रहे हैं। पड़ोसियों और शुभचिंतकों का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद जिस तरह खिलाड़ी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की है, वह हर युवा के लिए मिसाल है।

प्रधानमंत्री द्वारा सराहना मिलने के बाद खिलाड़ी के परिवार की खुशी और बढ़ गई। पिता ने कहा कि उनके बेटे की मेहनत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलना उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में सरकार और खेल संस्थाओं से खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, ताकि आर्थिक तंगी किसी प्रतिभा के रास्ते की बाधा न बने।

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सफलताएं ग्रामीण और साधारण परिवारों से आने वाले खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाती हैं। उचित प्रशिक्षण, संसाधन और परिवार के सहयोग से कोई भी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है।

कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले इस खिलाड़ी की कहानी संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास का ऐसा उदाहरण बन गई है, जो यह साबित करती है कि सीमित संसाधन भी बड़े सपनों को रोक नहीं सकते। सब्जी बेचने वाले पिता की मेहनत और बेटे के जुनून ने मिलकर वह मुकाम हासिल किया, जिस पर आज पूरा बिहार गर्व कर रहा है।

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