बिहार के एक दिव्यांग खिलाड़ी ने अपनी मेहनत, संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश और राज्य का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि की चर्चा पूरे देश में हो रही है। खिलाड़ी की सफलता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी उपलब्धि की सराहना की, जिसके बाद यह प्रेरणादायक कहानी लोगों के बीच और अधिक चर्चा में आ गई।
इस सफलता के पीछे वर्षों का कठिन संघर्ष छिपा है। खिलाड़ी के पिता ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। घर का खर्च चलाने के लिए वे वर्षों तक सब्जी बेचने का काम करते रहे। इसी कमाई से बेटे की खेल सामग्री, अभ्यास, प्रतियोगिताओं में भागीदारी और यात्रा का खर्च उठाया गया। कई बार आर्थिक तंगी आई, लेकिन उन्होंने बेटे के सपनों को कभी टूटने नहीं दिया।
पिता ने भावुक होकर कहा कि परिवार ने कई मुश्किल दौर देखे, लेकिन बेटे ने कभी हार नहीं मानी। सुबह-शाम नियमित अभ्यास, अनुशासन और लगातार मेहनत के बल पर उसने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई और फिर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने में सफलता हासिल की। उन्होंने कहा कि आज बेटे का मेडल केवल उनके परिवार का नहीं, बल्कि पूरे बिहार का सम्मान है।










