नीतीश की 7 निश्चय योजना को सम्राट ने बदला: स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड में अब 4 लाख की जगह 2 लाख मिलेंगे; तेजस्वी बोले- सरकार का खजाना खाली

बिहार में स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना की सीमा 4 लाख से घटाकर 2 लाख रुपये की गई। तेजस्वी यादव ने सरकार पर खजाना खाली होने का आरोप लगाया।
नीतीश की 7 निश्चय योजना को सम्राट ने बदला: स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड में अब 4 लाख की जगह 2 लाख मिलेंगे; तेजस्वी बोले- सरकार का खजाना खाली
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पटना: बिहार में सरकार बदलने के बाद नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में बड़ा बदलाव किया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने शिक्षा ऋण की अधिकतम सीमा को 4 लाख रुपये से घटाकर 2 लाख रुपये कर दिया है। इस बदलाव के बाद उच्च शिक्षा के लिए ज्यादा रकम की जरूरत वाले छात्रों को अब बाकी राशि के लिए केंद्र की प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना का सहारा लेना होगा।

स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना बिहार में 7 निश्चय कार्यक्रम के तहत शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक मदद उपलब्ध कराना था, जिनके परिवार के पास पढ़ाई का खर्च उठाने के पर्याप्त साधन नहीं हैं। पहले इस योजना के तहत पात्र छात्रों को अधिकतम 4 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण मिल सकता था। अब राज्य सरकार ने इसकी सीमा आधी कर दी है।

नई व्यवस्था के तहत जिन विद्यार्थियों को 2 लाख रुपये से अधिक की जरूरत है, वे प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी पोर्टल के जरिए अतिरिक्त शिक्षा ऋण के लिए आवेदन कर सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस केंद्रीय योजना के तहत 7.5 लाख रुपये तक के शिक्षा ऋण की व्यवस्था है। यानी राज्य की योजना की सीमा घटने के बावजूद छात्रों के लिए दूसरी वित्तीय व्यवस्था उपलब्ध रहेगी।

इस बदलाव को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने सरकार पर हमला बोलते हुए बिहार की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की वित्तीय स्थिति खराब है और सरकार का खजाना खाली होने की वजह से छात्रों को मिलने वाली सुविधा में कटौती की जा रही है। तेजस्वी ने सरकार से यह भी पूछा कि राज्य का पैसा आखिर कहां जा रहा है।

वहीं सरकार की ओर से योजना को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को आगे भी जारी रखने का फैसला किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार योजना को 2026 से 2031 की अवधि के लिए आगे बढ़ाया गया है और 2026-27 के लिए करीब 950 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी गई है।

स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ 12वीं पास कर उच्च शिक्षा में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को मिलता है। योजना के जरिए छात्र फीस, किताब, हॉस्टल और पढ़ाई से जुड़े अन्य खर्चों के लिए शिक्षा ऋण प्राप्त कर सकते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह रहा है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा जारी रखने का रास्ता मिला।

पहले अधिकतम 4 लाख रुपये तक की सीमा होने के कारण छात्रों को एक ही योजना के माध्यम से अपेक्षाकृत बड़ी राशि का शिक्षा ऋण मिल जाता था। अब सीमा 2 लाख रुपये किए जाने के बाद महंगे प्रोफेशनल कोर्स, निजी संस्थानों या दूसरे राज्यों में पढ़ाई करने वाले छात्रों के सामने अतिरिक्त वित्तीय व्यवस्था करने की चुनौती बढ़ सकती है।

हालांकि सरकार ने 2 लाख रुपये से अधिक की जरूरत वाले छात्रों के लिए प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना को वैकल्पिक रास्ते के रूप में बताया है। इससे छात्रों को दूसरे स्रोत से शिक्षा ऋण लेने का विकल्प मिलेगा, लेकिन दोनों योजनाओं की पात्रता, प्रक्रिया और शर्तें अलग हो सकती हैं। इसलिए छात्रों को आवेदन करने से पहले संबंधित नियमों की जानकारी लेना जरूरी होगा।

यह बदलाव इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को बिहार में युवाओं और विद्यार्थियों के लिए नीतीश कुमार सरकार की प्रमुख योजनाओं में गिना जाता रहा है। योजना की शुरुआत 2 अक्टूबर 2016 को 7 निश्चय कार्यक्रम के तहत हुई थी। इसके तहत सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए अधिकतम 4 लाख रुपये तक के शिक्षा ऋण का प्रावधान रहा है।

अब सम्राट चौधरी सरकार के फैसले के बाद राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर बहस तेज हो सकती है। विपक्ष इसे छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला फैसला बता रहा है, जबकि सरकार के सामने यह तर्क है कि 2 लाख रुपये तक राज्य की योजना के जरिए सहायता और उससे अधिक राशि के लिए केंद्रीय योजना का विकल्प उपलब्ध है।

छात्रों के बीच भी इस बदलाव को लेकर सवाल उठ सकते हैं। खासकर ऐसे विद्यार्थियों के लिए जिन्हें कॉलेज फीस, हॉस्टल, किताबों और दूसरे खर्चों के लिए 2 लाख रुपये से ज्यादा की जरूरत पड़ती है। उन्हें अब अतिरिक्त राशि के लिए अलग योजना में आवेदन करना होगा।

वित्तीय दृष्टि से देखें तो सरकार के लिए इस बदलाव का मतलब राज्य की ओर से सीधे वहन किए जाने वाले ऋण की सीमा को कम करना है। लेकिन राजनीतिक रूप से यह फैसला संवेदनशील है, क्योंकि शिक्षा ऋण से जुड़ी योजना का सीधा असर राज्य के युवाओं और उच्च शिक्षा की आकांक्षा रखने वाले विद्यार्थियों पर पड़ता है।

तेजस्वी यादव ने इसी मुद्दे को सरकार की आर्थिक नीति से जोड़ते हुए हमला बोला है। उनका कहना है कि अगर सरकार के पास पैसा नहीं है तो उसे यह बताना चाहिए कि राज्य की वित्तीय स्थिति इस स्तर तक कैसे पहुंची। विपक्ष इस मुद्दे को आने वाले दिनों में छात्रों और युवाओं के बीच भी उठा सकता है।

दूसरी तरफ, योजना को पूरी तरह खत्म नहीं किया गया है। सरकार ने इसे जारी रखने के लिए वित्तीय प्रावधान किया है। इसलिए यह बदलाव योजना बंद करने का नहीं, बल्कि राज्य सरकार के स्तर पर मिलने वाली अधिकतम ऋण सीमा घटाने का फैसला है।

अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि 2 लाख रुपये से अधिक की जरूरत वाले छात्रों को प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना के तहत कितनी आसानी और कितनी तेजी से अतिरिक्त ऋण मिल पाता है। यदि दोनों व्यवस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय रहता है तो छात्रों को बड़ी परेशानी नहीं होगी। लेकिन आवेदन प्रक्रिया जटिल होने या ऋण मंजूरी में देरी होने पर इस बदलाव का असर विद्यार्थियों पर पड़ सकता है।

फिलहाल बिहार की राजनीति में स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक तरफ सरकार का कहना है कि योजना जारी है और अधिक राशि के लिए केंद्र की योजना उपलब्ध है, वहीं तेजस्वी यादव इसे सरकार की आर्थिक कमजोरी से जोड़कर निशाना बना रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से इस फैसले के वित्तीय कारणों और छात्रों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर और स्पष्टीकरण सामने आ सकता है।

 

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