बॉलीवुड म्यूजिक इंडस्ट्री में जेंडर गैप पर सोना महापात्रा का सवाल, कहा- ‘दिल टूटने वाले गाने सिर्फ पुरुषों तक क्यों सीमित?’

गायिका सोना महापात्रा ने बॉलीवुड म्यूजिक इंडस्ट्री में जेंडर गैप को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि दिल टूटने वाले गाने अक्सर सिर्फ पुरुष गायकों तक सीमित

गायिका Sona Mohapatra ने बॉलीवुड संगीत उद्योग में मौजूद जेंडर असंतुलन को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। उनका कहना है कि दिल टूटने और भावनात्मक दर्द पर आधारित अधिकांश लोकप्रिय गाने पुरुष गायकों को दिए जाते हैं, जबकि महिला गायिकाओं को ऐसे अवसर अपेक्षाकृत कम मिलते हैं।

एंटरटेनमेंट न्यूज़: भारतीय संगीत जगत की चर्चित गायिका Sona Mohapatra ने बॉलीवुड म्यूजिक इंडस्ट्री में जेंडर असमानता को लेकर खुलकर अपनी राय रखी है। उनका कहना है कि हिंदी फिल्म संगीत में दिल टूटने, प्रेम और भावनात्मक संघर्ष जैसे विषयों पर आधारित अधिकांश गाने पुरुष गायकों के हिस्से में जाते हैं, जबकि महिला गायिकाओं को अपेक्षाकृत कम अवसर दिए जाते हैं।

सोना महापात्रा की यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक मनोरंजन उद्योग में समान प्रतिनिधित्व, अवसरों की बराबरी और महिलाओं की भागीदारी को लेकर व्यापक चर्चा चल रही है। उनके बयान ने भारतीय संगीत उद्योग में भी इस मुद्दे को नई बहस का विषय बना दिया है।

‘जालिमा’ गीत का उदाहरण देकर उठाया सवाल

एक साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान सोना महापात्रा ने लोकप्रिय गीत Zaalima का उदाहरण दिया, जिसे Arijit Singh और Harshdeep Kaur ने गाया था। उन्होंने कहा कि जब उन्हें इस गीत के लिए रिकॉर्डिंग का प्रस्ताव मिला, तब उन्हें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि एक डुएट गीत होने के बावजूद महिला गायिका की भूमिका अपेक्षाकृत सीमित थी। 

उनके अनुसार, यह केवल एक गीत का मामला नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाता है जिसमें महिला कलाकारों को अक्सर कम स्थान दिया जाता है। सोना ने सवाल उठाया कि यदि किसी गीत को युगल गीत के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, तो उसमें दोनों गायकों को समान महत्व क्यों नहीं मिलता।

महिला गायिकाओं के लिए कम अवसरों की चिंता

बॉलीवुड म्यूजिक इंडस्ट्री में जेंडर गैप पर सोना महापात्रा का सवाल, कहा- ‘दिल टूटने वाले गाने सिर्फ पुरुषों तक क्यों सीमित?’

सोना महापात्रा का मानना है कि बॉलीवुड में लंबे समय से एक ऐसा पैटर्न देखने को मिलता है जिसमें भावनात्मक और दिल टूटने वाले गीतों का केंद्र पुरुष पात्र और पुरुष आवाजें होती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अनुभव, भावनाएं और दृष्टिकोण भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं, लेकिन समय के साथ ऐसे गीतों की संख्या कम होती गई है जिनमें महिला गायिकाएं भावनात्मक कथानक का मुख्य हिस्सा हों।

उनके अनुसार, यह केवल गानों की संरचना का मुद्दा नहीं है बल्कि यह इस बात से भी जुड़ा है कि संगीत उद्योग किस तरह की कहानियों और भावनाओं को प्राथमिकता देता है।

अरिजीत सिंह को नहीं ठहराया जिम्मेदार

अपने वक्तव्य में सोना महापात्रा ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी किसी व्यक्तिगत कलाकार की आलोचना नहीं है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि अरिजीत सिंह एक प्रतिभाशाली और सम्मानित कलाकार हैं। उनकी आपत्ति गीतों की रचना और प्रस्तुति के उस ढांचे को लेकर है, जिसमें महिला गायिकाओं की भूमिका सीमित हो जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी चर्चा का उद्देश्य किसी कलाकार को निशाना बनाना नहीं बल्कि उद्योग के भीतर मौजूद संरचनात्मक असंतुलन पर ध्यान आकर्षित करना है।

पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक संगीत उद्योग में विविधता और समावेशन को लेकर कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। महिला कलाकारों, गीतकारों और संगीतकारों को अधिक अवसर देने की मांग लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि सामाजिक सोच और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का भी प्रतिबिंब होता है। ऐसे में विभिन्न दृष्टिकोणों और अनुभवों को समान रूप से प्रस्तुत करना आवश्यक है।

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