बृहन्मुंबई नगर निगम में सत्ता परिवर्तन हुआ है। भाजपा की रितु तावड़े निर्विरोध मेयर चुनी गईं। 25 साल बाद शिवसेना का वर्चस्व खत्म हुआ। महायुति के बहुमत ने मुंबई की नगर राजनीति की दिशा बदल दी।
Maharashtra: मुंबई की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) पर अब भारतीय जनता पार्टी का कब्जा हो गया है। भाजपा की वरिष्ठ पार्षद रितु तावड़े निर्विरोध मेयर चुनी गई हैं। इसके साथ ही ठाकरे परिवार का वह किला ढह गया है, जिस पर शिवसेना का पिछले 25 सालों से वर्चस्व था। यह बदलाव केवल एक पद तक सीमित नहीं है, बल्कि मुंबई की नगर राजनीति की दिशा और भविष्य को भी प्रभावित करने वाला माना जा रहा है।
निर्विरोध चुनाव ने बदली तस्वीर
रितु तावड़े का मेयर बनना इसलिए भी खास है क्योंकि यह चुनाव निर्विरोध हुआ। शिवसेना (UBT) ने मेयर पद के लिए कोई उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया। इसी निर्णय ने भाजपा के लिए रास्ता साफ कर दिया। महायुति गठबंधन के पास पहले से ही स्पष्ट बहुमत था, जिससे यह तय माना जा रहा था कि इस बार BMC की सत्ता शिवसेना के हाथ से निकल सकती है। उम्मीदवार न उतारे जाने के बाद चुनाव औपचारिकता बनकर रह गया और भाजपा ने बिना किसी मुकाबले के यह अहम पद हासिल कर लिया।
चार दशक बाद BJP को मिला मेयर पद
पिछले चार दशकों में यह पहली बार है जब भाजपा का कोई नेता बृहन्मुंबई नगर निगम के मेयर पद तक पहुंचा है। मुंबई देश का सबसे धनी नगर निकाय माना जाता है और यहां सत्ता हासिल करना किसी भी पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि होती है। रितु तावड़े की जीत ने भाजपा के लिए मुंबई में संगठनात्मक मजबूती और बढ़ती स्वीकार्यता को भी दर्शाया है।
ठाकरे परिवार का 25 साल पुराना वर्चस्व खत्म
1997 से लेकर अब तक BMC पर शिवसेना का दबदबा रहा है। इस लंबे दौर में ठाकरे परिवार का प्रभाव नगर निगम की राजनीति में साफ नजर आता था। लेकिन इस बार हालात बदल गए। शिवसेना (UBT) के कमजोर प्रदर्शन और रणनीतिक फैसलों ने इस वर्चस्व को समाप्त कर दिया।
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रितु तावड़े का राजनीतिक सफर
53 वर्षीय रितु तावड़े घाटकोपर पश्चिम से तीन बार पार्षद रह चुकी हैं। उन्हें जमीनी राजनीति का अनुभवी चेहरा माना जाता है। उन्होंने 2012 में वार्ड 127 से पार्षद बनकर बृहन्मुंबई नगर निगम में कदम रखा था। इसके बाद 2017 में वे घाटकोपर के वार्ड 121 से दोबारा चुनी गईं। हाल ही में 15 जनवरी को हुए नगर निगम चुनावों में उन्होंने वार्ड 132 से जीत हासिल की, जिससे उनकी स्थिति और मजबूत हो गई।
रितु तावड़े को नगर प्रशासन और जन कल्याण से जुड़े कामों का एक दशक से ज्यादा का अनुभव है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि वे एक सक्रिय और सुलझी हुई नेता हैं, जिनका स्थानीय लोगों से मजबूत जुड़ाव है। पार्षद के रूप में उन्होंने शिक्षा, बुनियादी सुविधाओं और नागरिक समस्याओं पर लगातार काम किया है। वे BMC की शिक्षा समिति की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं, जहां उन्होंने स्कूलों और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर अहम फैसले लिए।
उप महापौर पद पर भी बदलाव
मेयर के साथ साथ उप महापौर पद पर भी सत्ता संतुलन बदला है। शिवसेना नेता संजय घड़ी उप महापौर चुने गए हैं। यह दिखाता है कि नगर निगम में भले ही भाजपा का दबदबा हो, लेकिन विपक्ष की मौजूदगी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। आने वाले समय में BMC की बैठकों और नीतिगत फैसलों में यह संतुलन अहम भूमिका निभा सकता है।
चुनावी आंकड़ों में दिखा महायुति का दम
227 सदस्यीय बृहन्मुंबई नगर निगम के चुनावों में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। उसकी सहयोगी शिवसेना ने 29 सीटें जीतीं। इस तरह महायुति गठबंधन के पास कुल 118 पार्षदों का समर्थन रहा, जो मेयर पद हासिल करने के लिए पर्याप्त था। दूसरी ओर शिवसेना (UBT) ने 65 सीटें जीतीं, जो सत्ता बचाने के लिए नाकाफी साबित हुईं।
अन्य दलों का सीमित प्रभाव
इस चुनाव में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को 6 सीटें और शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को केवल 1 सीट मिली। इन दलों का प्रभाव सीमित रहने के कारण सत्ता समीकरण पर खास असर नहीं पड़ा। यह भी साफ हो गया कि मुंबई की नगर राजनीति अब मुख्य रूप से भाजपा और शिवसेना के इर्द गिर्द ही सिमटी हुई है।










