बंगाल चुनाव: फालता सीट पर दोबारा मतदान से बढ़ा सियासी तनाव, अभिषेक बनर्जी ने BJP को दी खुली चुनौती

पश्चिम बंगाल की फालता सीट पर दोबारा मतदान से पहले TMC और BJP में बयानबाजी तेज हो गई है। अभिषेक बनर्जी ने भाजपा को खुली चुनौती दी। 21 मई को वह दोबारा वोटिंग होगी

पश्चिम बंगाल की फालता विधानसभा सीट पर दोबारा मतदान से पहले TMC और भाजपा के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। अभिषेक बनर्जी ने भाजपा नेताओं को फालता से चुनाव लड़ने की चुनौती दी, जबकि चुनाव आयोग ने 21 मई को री-पोलिंग कराने का फैसला किया है।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में Falta सीट पर दोबारा मतदान कराने के चुनाव आयोग के फैसले के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। सत्तारूढ़ All India Trinamool Congress (TMC) और Bharatiya Janata Party (BJP) के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तीखे राजनीतिक हमले तेज हो गए हैं।

टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और Abhishek Banerjee ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि “बांग्ला विरोधी गुजराती गैंग” उनके “डायमंड हार्बर मॉडल” को नुकसान पहुंचाने में सफल नहीं होगी। उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि अगर हिम्मत है तो पार्टी अपने सबसे बड़े नेताओं को फालता से चुनाव लड़ाकर दिखाए।

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग ने फालता विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 पोलिंग स्टेशनों पर 21 मई को दोबारा मतदान कराने का आदेश दिया है। मतगणना अब 24 मई को होगी।

चुनाव आयोग ने क्यों कराया री-पोलिंग का फैसला?

Election Commission of India (ECI) के अनुसार, 29 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान कई पोलिंग बूथों से हिंसा, ईवीएम में गड़बड़ी और चुनावी नियमों के उल्लंघन की शिकायतें मिली थीं।

कुछ बूथों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में भाजपा के चुनाव चिह्न वाले बटन पर टेप लगाए जाने के आरोप भी सामने आए। चुनाव आयोग ने जांच के बाद कहा कि जहां शिकायतें सही पाई गईं, वहां निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए दोबारा चुनाव कराया जाएगा।

इस फैसले ने राज्य में राजनीतिक माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है।

अभिषेक बनर्जी का ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ बयान चर्चा में

Abhishek Banerjee, जो मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के भतीजे और डायमंड हार्बर से सांसद हैं, ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं पर सीधा हमला बोला।

उन्होंने कहा कि “गुजराती गैंग और उनके सहयोगियों को मेरे डायमंड हार्बर मॉडल को तोड़ने में दस जन्म भी कम पड़ेंगे।” यह टिप्पणी भाजपा नेता Amit Malviya की सोशल मीडिया पोस्ट के जवाब में आई, जिसमें उन्होंने री-पोलिंग को “डायमंड हार्बर मॉडल की हार” बताया था।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह बयान बंगाल चुनाव में बढ़ती क्षेत्रीय बनाम बाहरी राजनीति की बहस को और तेज कर सकता है।

भाजपा ने उठाए लोकतांत्रिक अधिकारों के सवाल

दूसरी ओर भाजपा नेताओं ने चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत किया है। खड़गपुर से भाजपा उम्मीदवार Dilip Ghosh ने कहा कि फालता में लोग लंबे समय से स्वतंत्र रूप से मतदान नहीं कर पा रहे थे।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का फैसला लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरी था। भाजपा का आरोप है कि राज्य में सत्तारूढ़ दल के दबाव और हिंसा के कारण निष्पक्ष चुनाव प्रभावित हुए हैं।

वहीं सिलीगुड़ी सीट से भाजपा उम्मीदवार Shankar Ghosh ने मतगणना से पहले मंदिर में पूजा-अर्चना की और अपनी जीत का भरोसा जताया।

बंगाल में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

मतगणना से पहले पूरे पश्चिम बंगाल में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। Election Commission of India ने बताया कि काउंटिंग सेंटर्स पर तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है।

पहले और दूसरे स्तर पर पहचान पत्रों की मैन्युअल जांच होगी, जबकि तीसरे स्तर पर QR कोड स्कैनिंग के बाद ही प्रवेश दिया जाएगा।

कोलकाता स्थित Netaji Indoor Stadium और भवानीपुर के स्ट्रॉन्ग रूम्स के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। भवानीपुर सीट पर मुख्यमंत्री Mamata Banerjee चुनाव लड़ रही हैं, जबकि उनके खिलाफ भाजपा नेता Suvendu Adhikari मैदान में हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के अधिकारों को बरकरार रखा

मतगणना से पहले Supreme Court of India ने भी अहम टिप्पणी की। अदालत ने केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती को लेकर दायर याचिका में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया और कहा कि काउंटिंग स्टाफ नियुक्त करने का अधिकार चुनाव आयोग का है।

टीएमसी ने आरोप लगाया था कि केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती से मतगणना की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। हालांकि अदालत ने चुनाव आयोग के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया कि केंद्र और राज्य दोनों के कर्मचारी मतगणना प्रक्रिया में शामिल होंगे।

इसके बाद आयोग ने 165 अतिरिक्त मतगणना पर्यवेक्षक और 77 पुलिस पर्यवेक्षक तैनात करने का फैसला किया।

बंगाल में राजनीतिक हिंसा फिर बनी मुद्दा

पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष Samik Bhattacharya ने आरोप लगाया कि राज्य में होने वाली ज्यादातर राजनीतिक हत्याओं के पीछे टीएमसी का हाथ है।

उन्होंने दावा किया कि पिछले तीन वर्षों में राज्य में हुई 95% राजनीतिक हत्याओं में टीएमसी कार्यकर्ता शामिल रहे हैं। वहीं टीएमसी ने भाजपा पर चुनावी माहौल को जानबूझकर तनावपूर्ण बनाने का आरोप लगाया है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल चुनाव में हिंसा, ईवीएम विवाद और सुरक्षा व्यवस्था प्रमुख चुनावी मुद्दे बन गए हैं।

5 राज्यों की मतगणना पर देशभर की नजर

4 मई को पश्चिम बंगाल के अलावा Assam, Tamil Nadu, Kerala और Puducherry में भी मतगणना होनी है।

इन राज्यों के चुनाव परिणाम राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में मुकाबला भाजपा और टीएमसी के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है।

विश्लेषकों के अनुसार, फालता सीट पर दोबारा मतदान और उससे जुड़े विवाद आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं।

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