पश्चिम चंपारण की निरकला कुमारी ने बीपीएससी 70वीं परीक्षा में 70वीं रैंक हासिल कर बीडीओ पद प्राप्त किया है। पिता के निधन और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद परिवार के सहयोग और मेहनत से उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की।
बिहार: बीपीएससी 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के परिणाम में पश्चिम चंपारण की निरकला कुमारी ने उल्लेखनीय सफलता हासिल करते हुए 70वीं रैंक प्राप्त की है। सीमित संसाधनों और पारिवारिक कठिनाइयों के बीच उन्होंने संघर्ष का रास्ता चुना और प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) पद पर चयनित होकर क्षेत्र की बेटियों के लिए नई मिसाल कायम की है।
कठिन परिस्थितियों में भी नहीं डगमगाया संकल्प
पश्चिम चंपारण जिले के वाल्मीकिनगर क्षेत्र के गनौली गांव की रहने वाली निरकला कुमारी की सफलता की कहानी संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति का उदाहरण है। बचपन में ही पिता स्वर्गीय बलि गुरु का निधन हो गया था, जिसके बाद परिवार पर आर्थिक और सामाजिक जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ गया। हालांकि इन चुनौतियों ने उनके सपनों को कमजोर नहीं किया।
![]()
निरकला ने शुरू से ही शिक्षा को अपने जीवन का सबसे बड़ा हथियार माना। संसाधनों की कमी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य तय किया। लगातार मेहनत और अनुशासित तैयारी के दम पर उन्होंने बीपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल कर ली।
मां और भाइयों के सहयोग ने दिखाई नई राह
निरकला की उपलब्धि के पीछे उनके परिवार का बड़ा योगदान रहा। उनकी मां बिकनी देवी और दोनों भाई कपिलदेव गुरु तथा धनेश्वर ने हर परिस्थिति में उनका साथ दिया। परिवार ने खेती और मजदूरी कर उनकी पढ़ाई का खर्च उठाया ताकि उनकी शिक्षा प्रभावित न हो।
परिवार के सदस्यों ने कभी भी आर्थिक तंगी को निरकला की पढ़ाई के आड़े नहीं आने दिया। यही वजह रही कि उन्होंने अपनी तैयारी पर पूरा ध्यान केंद्रित रखा और एक-एक चरण पार करते हुए अंतिम चयन सूची में जगह बनाई।
बीडीओ बनकर बढ़ाया क्षेत्र का सम्मान
बीपीएससी 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में 70वीं रैंक प्राप्त करने के बाद निरकला का चयन प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) पद के लिए हुआ है। परिणाम घोषित होने के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में खुशी का माहौल है। उनके घर पर बधाई देने वालों का लगातार आना-जाना लगा हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि निरकला ने यह साबित कर दिया है कि सफलता केवल संसाधनों से नहीं बल्कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से हासिल की जाती है। उनकी उपलब्धि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गई है।
युवाओं के लिए बनी प्रेरणा
निरकला की सफलता उन छात्रों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों में अपने सपनों को पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे तो बड़ी से बड़ी चुनौती भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकती।
स्थानीय लोगों और शिक्षकों का मानना है कि निरकला की उपलब्धि से क्षेत्र के युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रेरित होंगे। खासकर ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली छात्राओं के लिए यह सफलता एक मजबूत उदाहरण बनकर सामने आई है, जो उन्हें बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला देगी।








