BRICS Security Meeting 2026: भारत की अध्यक्षता में सुरक्षा प्रमुखों की अहम बैठक, गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां रहेंगी मुख्य एजेंडा

BRICS Security Meeting 2026 में भारत की अध्यक्षता में सदस्य देशों के सुरक्षा प्रमुख जुटेंगे। गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां आतंकवाद और साइबर खतरों पर होगी चर्चा

भारत की अध्यक्षता में आज, सोमवार से ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और उच्च प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होने जा रही है। इस बैठक की अध्यक्षता भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval करेंगे।

नई दिल्ली: भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स (BRICS) देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) और उच्च प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण बैठक आज, सोमवार से शुरू होने जा रही है। इस बैठक की अध्यक्षता भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल करेंगे। सितंबर में प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले आयोजित यह बैठक सदस्य देशों के बीच रणनीतिक समन्वय और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श करेंगे। विशेष रूप से आतंकवाद, साइबर सुरक्षा, नई और उभरती तकनीकों के दुरुपयोग, सूचना सुरक्षा तथा गैर-पारंपरिक खतरों पर व्यापक चर्चा होने की उम्मीद है।

गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां रहेंगी मुख्य एजेंडा

विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस वर्ष की बैठक का प्रमुख विषय तेजी से बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और उससे उत्पन्न हो रही नई चुनौतियां हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर हमलों, डिजिटल अपराधों, ड्रोन तकनीक और अन्य उभरती तकनीकों के दुरुपयोग से पैदा होने वाले जोखिमों पर सदस्य देशों के प्रतिनिधि अपने विचार साझा करेंगे।

इसके अलावा, आतंकवाद-रोधी सहयोग और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के सुरक्षित उपयोग से संबंधित ब्रिक्स संयुक्त कार्य समूहों की प्रगति की समीक्षा भी बैठक के एजेंडे में शामिल है। सदस्य देश भविष्य की सुरक्षा रणनीतियों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सहयोग के नए क्षेत्रों पर भी चर्चा करेंगे।

ईरान की महत्वपूर्ण भागीदारी पर नजर

BRICS Security Meeting 2026: भारत की अध्यक्षता में सुरक्षा प्रमुखों की अहम बैठक, गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां रहेंगी मुख्य एजेंडा

बैठक का एक प्रमुख आकर्षण ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोहम्मद बगेर जोलगाद्र की भागीदारी होगी। हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में कूटनीतिक गतिविधियों और क्षेत्रीय तनाव में कमी के बाद यह ईरान की महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठकों में से एक मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की मौजूदगी ब्रिक्स मंच पर क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने में मदद कर सकती है। साथ ही, यह पश्चिम एशिया के प्रमुख देशों के बीच संवाद और सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर भी प्रदान करेगी। भारत के लिए भी यह बैठक ईरान के साथ व्यापार, ऊर्जा और क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं पर भविष्य की संभावनाओं को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है।

चीन ने जताई सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की इच्छा

बैठक से पहले भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने सोशल मीडिया के माध्यम से चीन का आधिकारिक रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि चीन वर्तमान अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा स्थिति, प्रमुख वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों तथा पारंपरिक और गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों पर अन्य ब्रिक्स देशों के साथ विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए तैयार है।

उन्होंने यह भी कहा कि चीन सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए सकारात्मक राजनीतिक माहौल तैयार करने की उम्मीद करता है और वैश्विक शांति तथा सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए सदस्य देशों के साथ सुरक्षा एवं राजनीतिक सहयोग को और मजबूत करना चाहता है।

BRICS मंच का बढ़ता वैश्विक महत्व

हाल के वर्षों में ब्रिक्स समूह का वैश्विक प्रभाव लगातार बढ़ा है। संगठन में नए सदस्य देशों के शामिल होने के बाद इसकी राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे समय में जब दुनिया विभिन्न भू-राजनीतिक संघर्षों, साइबर खतरों और आर्थिक अनिश्चितताओं का सामना कर रही है, ब्रिक्स देशों के बीच सुरक्षा सहयोग की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है।

नई दिल्ली में होने वाली यह बैठक न केवल सदस्य देशों के बीच विश्वास और समन्वय को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करने का भी अवसर प्रदान करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बैठक के निष्कर्ष सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के एजेंडे और भविष्य की रणनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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