बुंदेलखंड में झांसी-मानिकपुर और खैरार-भीमसेन दोहरी रेल लाइन परियोजना का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। 4,329 करोड़ रुपये की इस परियोजना से छह जिलों में रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी, ट्रेनों की गति बढ़ेगी और व्यापार व यात्रियों दोनों को लाभ मिलेगा।
बांदा: बुंदेलखंड की झांसी-मानिकपुर और खैरार-भीमसेन दोहरी रेल लाइन परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। परियोजना के कई हिस्सों पर ट्रेनों का संचालन शुरू हो चुका है, जबकि शेष कार्य वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके पूरा होने के बाद यात्रियों को बेहतर रेल सुविधा मिलेगी, माल परिवहन तेज होगा और क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।
बुंदेलखंड डबल रेल लाइन परियोजना से विकास को मिलेगी नई रफ्तार
बुंदेलखंड में लंबे समय से प्रतीक्षित झांसी-मानिकपुर और खैरार-भीमसेन दोहरी रेल लाइन परियोजना अब तेजी से साकार होती दिखाई दे रही है। उत्तर मध्य रेलवे की इस महत्वाकांक्षी योजना के कई हिस्सों पर ट्रेनों का संचालन शुरू हो चुका है। परियोजना पूरी होने के बाद झांसी, महोबा, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर और कानपुर सहित छह जिलों की रेल कनेक्टिविटी पहले से अधिक मजबूत होगी। इससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलने के साथ-साथ क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी नई दिशा मिलेगी।

वर्ष 2018 में स्वीकृत इस परियोजना पर लगभग 4,329 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। कुल 431 किलोमीटर लंबी इस परियोजना को 26 निर्माण खंडों में बांटा गया है। इनमें महोबा और खैरार की कार्ड लाइन भी शामिल है, जिनका निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। अब तक 177 किलोमीटर से अधिक हिस्से पर दोहरी रेल लाइन चालू की जा चुकी है और हाल ही में मऊरानीपुर-रोरा सेक्शन पर भी ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ है।
दोहरी रेल लाइन बनने से यात्रियों को मिलेगा बड़ा फायदा
फिलहाल कई स्थानों पर एकल रेल लाइन होने के कारण ट्रेनों को क्रॉसिंग के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। दोहरी लाइन बनने के बाद अप और डाउन ट्रेनों का संचालन अलग-अलग ट्रैक पर होगा, जिससे क्रॉसिंग में लगने वाला समय कम होगा और ट्रेनों की औसत गति बढ़ेगी।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि परियोजना पूरी होने के बाद ट्रेनों को आउटर पर खड़ा रखने की समस्या काफी कम हो जाएगी। यात्रियों की यात्रा अधिक सुगम होगी और समय पर ट्रेनें चलाने में भी आसानी होगी। इसके अलावा भविष्य में नई ट्रेनों के संचालन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
व्यापार और किसानों को भी होगा लाभ
बुंदेलखंड क्षेत्र से बड़ी मात्रा में पत्थर, गिट्टी, दाल, तिलहन और अन्य कृषि उत्पाद देश के विभिन्न राज्यों में भेजे जाते हैं। दोहरी रेल लाइन बनने के बाद मालगाड़ियों की आवाजाही तेज होगी, जिससे स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। उद्योगों तक कच्चा माल समय पर पहुंचेगा और किसानों के उत्पाद भी कम समय में बड़े बाजारों तक पहुंच सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर रेल नेटवर्क से निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पूरे बुंदेलखंड की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
कानपुर-झांसी के बीच मिलेगा मजबूत वैकल्पिक रेल मार्ग
खैरार-भीमसेन रेलखंड का दोहरीकरण पूरा होने के बाद रेलवे को कानपुर और झांसी के बीच एक मजबूत वैकल्पिक रेल मार्ग मिल जाएगा। वर्तमान में उरई वाला रेल मार्ग उत्तर मध्य रेलवे के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है। किसी तकनीकी खराबी, रखरखाव कार्य या दुर्घटना की स्थिति में ट्रेनों का संचालन प्रभावित हो जाता है।
नई दोहरी रेल लाइन तैयार होने के बाद आवश्यकता पड़ने पर ट्रेनों को भीमसेन-खैरार-बांदा-महोबा-झांसी मार्ग से आसानी से संचालित किया जा सकेगा। इससे पूरे रेलवे नेटवर्क की परिचालन क्षमता बढ़ेगी और मालगाड़ियों के साथ-साथ यात्री ट्रेनों का संचालन भी अधिक व्यवस्थित होगा।
निर्माण कार्य के दौरान केन, बेतवा और यमुना जैसी नदियों में आई बाढ़ के कारण पुल निर्माण प्रभावित हुआ, जिससे परियोजना में कुछ देरी हुई। अब रेलवे ने शेष कार्य वर्ष 2027 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। परियोजना पूरी होने के बाद बुंदेलखंड को आधुनिक, तेज और अधिक सक्षम रेल नेटवर्क मिलेगा, जिससे क्षेत्र के विकास को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।











