बक्सा के जंगल में फिर गूंजी रॉयल बंगाल टाइगर की दहाड़, बिहार से लाई गई बाघिन को छोड़ा गया

बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से लाई गई बाघिन को बक्सा टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया। यह बक्सा में टाइगर आबादी फिर बसाने की बड़ी पहल है।
बक्सा के जंगल में फिर गूंजी रॉयल बंगाल टाइगर की दहाड़, बिहार से लाई गई बाघिन को छोड़ा गया
Photo Credit / Attribution: Google

पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में स्थित बक्सा टाइगर रिजर्व के जंगलों में लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर रॉयल बंगाल टाइगर की मौजूदगी दर्ज हुई है। बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से लाई गई एक बाघिन को शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 को बक्सा के जंगल में छोड़ा गया। बाघ संरक्षण की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बक्सा में बाघों की स्थायी आबादी को फिर से स्थापित करने के उद्देश्य से शुरू किए गए चरणबद्ध पुनर्वास कार्यक्रम के तहत यह पहली बड़ी कार्रवाई है। बाघिन को जंगल में छोड़ने के दौरान केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी समेत वन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

बिहार के पश्चिम चंपारण स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से इस बाघिन को विशेष प्रक्रिया के तहत चुना गया था। करीब तीन साल की इस बाघिन को सुरक्षित तरीके से पकड़ने के बाद स्वास्थ्य जांच और जरूरी औपचारिकताएं पूरी की गईं। इसके बाद उसे पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व तक पहुंचाया गया। यह स्थानांतरण सामान्य सड़क यात्रा से अलग था और बाघिन को भारतीय वायुसेना के विशेष विमान के जरिए पश्चिम बंगाल लाया गया। 30 सितंबर की सुबह वह बक्सा पहुंची, जहां वन विभाग की टीम ने उसके स्वास्थ्य और व्यवहार पर लगातार नजर रखी।

बक्सा पहुंचने के बाद बाघिन को तत्काल खुले जंगल में नहीं छोड़ा गया था। उसे राजाभातखावा क्षेत्र में तैयार किए गए विशेष सॉफ्ट-रिलीज एनक्लोजर में रखा गया, ताकि नए वातावरण में वह धीरे-धीरे अभ्यस्त हो सके। वन्यजीव पुनर्वास में इस तरह की व्यवस्था का उद्देश्य जानवर को अचानक नए इलाके में छोड़ने के बजाय नियंत्रित माहौल में उसके व्यवहार, स्वास्थ्य और भोजन की स्थिति पर नजर रखना होता है। रिपोर्टों के मुताबिक बाघिन ने नए स्थान पर भोजन किया और उसकी गतिविधियों पर वन विभाग की टीम लगातार निगरानी करती रही।

अब बाघिन को बक्सा के जंगल में छोड़ दिया गया है। इस कदम के साथ बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों की आबादी दोबारा स्थापित करने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से आगे बढ़ी है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार यह चरणबद्ध कार्यक्रम बक्सा में एक ऐसी बाघ आबादी तैयार करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है, जो लंबे समय तक टिकाऊ और स्वावलंबी हो सके। बक्सा ऐतिहासिक रूप से उत्तर बंगाल का महत्वपूर्ण बाघ क्षेत्र रहा है, लेकिन पिछले कई दशकों में यहां स्थायी बाघ आबादी खत्म हो गई थी।

बक्सा टाइगर रिजर्व का जंगल जैव विविधता के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह क्षेत्र भूटान और असम के जंगलों से जुड़े बड़े पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है। ऐसे में यहां बाघों की मौजूदगी केवल एक प्रजाति की वापसी नहीं बल्कि पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। बाघ खाद्य श्रृंखला में शीर्ष शिकारी के रूप में काम करता है और उसकी मौजूदगी जंगल में अन्य वन्यजीवों और शिकार प्रजातियों की संख्या तथा व्यवहार को भी प्रभावित कर सकती है।

बक्सा में बाघों की वापसी की योजना अचानक शुरू नहीं हुई है। इसके लिए कई वर्षों से तैयारियां चल रही थीं। वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों की ओर से आवास, शिकार आधार, सुरक्षा और मानव गतिविधियों जैसे कई पहलुओं का अध्ययन किया गया है। हालांकि कुछ वन्यजीव विशेषज्ञों ने बक्सा में बाघ पुनर्वास की चुनौतियों को लेकर सवाल भी उठाए हैं। विशेषज्ञों ने विशेष रूप से पर्याप्त शिकार आधार, जंगल की स्थिति और रिजर्व के भीतर मानव गतिविधियों को महत्वपूर्ण कारक बताया है।

बाघिन के जंगल में छोड़े जाने के बाद उसकी निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी। रिपोर्टों के अनुसार उसे रेडियो कॉलर के माध्यम से ट्रैक किए जाने की व्यवस्था की गई है। इससे वन विभाग उसके आवागमन, क्षेत्र के इस्तेमाल और व्यवहार पर नजर रख सकेगा। बाघिन कहां जाती है, किस क्षेत्र में अधिक समय बिताती है, उसका भोजन और शिकार व्यवहार कैसा रहता है और वह नए वातावरण में किस तरह खुद को ढालती है, इन सभी पहलुओं की निगरानी पुनर्वास कार्यक्रम के लिए अहम होगी।

बक्सा में केवल एक बाघिन को छोड़ने तक यह अभियान सीमित नहीं रहने वाला है। योजना के तहत आने वाले समय में कुछ और बाघों को चरणबद्ध तरीके से यहां लाने की तैयारी है। पश्चिम बंगाल के वन मंत्री मनोज कुमार ओरांव के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि दो से तीन और बाघों को चरणबद्ध तरीके से लाने की योजना है। इसका उद्देश्य धीरे-धीरे ऐसी आबादी तैयार करना है, जो आगे चलकर प्राकृतिक रूप से बढ़ सके।

बाघों को एक रिजर्व से दूसरे रिजर्व में स्थानांतरित करना बेहद संवेदनशील प्रक्रिया होती है। इसमें जानवर की सुरक्षा के साथ-साथ उसके स्वास्थ्य, आनुवंशिक विविधता और नए क्षेत्र की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना पड़ता है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की बाघिन को बक्सा लाने के दौरान भी वन्यजीव विशेषज्ञों और अधिकारियों ने इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई। बाघिन को सुरक्षित तरीके से पकड़ने के बाद उसे विशेष परिवहन व्यवस्था के माध्यम से पश्चिम बंगाल पहुंचाया गया।

इस पूरे अभियान में बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच वन्यजीव संरक्षण को लेकर समन्वय भी देखने को मिला है। बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से बाघिन को निकालकर पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व में बसाने का यह प्रयास दो राज्यों के बीच संरक्षण सहयोग का उदाहरण है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने भी इस स्थानांतरण को बक्सा में बाघों की वापसी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से बक्सा तक बाघिन का सफर भी अपने आप में चुनौतीपूर्ण था। बाघिन को पहले जंगल से सुरक्षित तरीके से पकड़ना पड़ा। इसके बाद उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत ट्रैंक्विलाइज किया गया, स्वास्थ्य जांच की गई और विशेष कंटेनर में सुरक्षित रखा गया। फिर उसे सैन्य परिवहन विमान के माध्यम से पश्चिम बंगाल पहुंचाया गया। वहां से सड़क मार्ग से बक्सा के निर्धारित क्षेत्र तक ले जाया गया। पूरी प्रक्रिया के दौरान उसके स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी गई।

बक्सा में बाघों की वापसी से पर्यटन की संभावनाओं को लेकर भी उम्मीदें बढ़ी हैं। अलीपुरद्वार और उत्तर बंगाल पहले से ही जंगल, चाय बागानों और वन्यजीव पर्यटन के लिए प्रसिद्ध क्षेत्र हैं। बक्सा में बाघों की स्थायी आबादी स्थापित होने पर जंगल सफारी और वन पर्यटन को नया आकर्षण मिल सकता है। हालांकि पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के साथ वन्यजीवों के आवास और सुरक्षा को प्राथमिकता देना भी जरूरी होगा, ताकि पर्यटन के कारण जंगल और जानवरों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

बक्सा को लेकर वन पर्यटन के विस्तार की बड़ी योजनाओं की भी चर्चा हुई है। पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से बक्सा और असम के मानस क्षेत्र को जोड़कर बड़े वन पर्यटन क्षेत्र के विकास की योजना का उल्लेख किया गया है। हालांकि ऐसी योजनाओं के साथ संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को संतुलित रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। बक्सा में बाघ पुनर्वास कार्यक्रम के सामने मानव गतिविधि और जंगल के भीतर मौजूद गांवों का मुद्दा भी एक चुनौती के रूप में सामने आया है।

बाघों के लिए पर्याप्त शिकार आधार किसी भी पुनर्वास कार्यक्रम की सफलता का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। यदि जंगल में बाघ के लिए पर्याप्त प्राकृतिक शिकार उपलब्ध नहीं होगा तो बाघों का लंबे समय तक वहां टिके रहना मुश्किल हो सकता है। इसी कारण बक्सा में बाघों की वापसी के साथ वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास और पर्याप्त शिकार प्रजातियों को बनाए रखना भी वन विभाग के सामने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी। विशेषज्ञों ने भी बक्सा की तैयारियों का आकलन करते समय इन पहलुओं पर जोर दिया है।

मानव-बाघ संघर्ष की संभावना को लेकर भी सतर्कता जरूरी होगी। बक्सा के कोर क्षेत्र में कुछ गांव और मानवीय गतिविधियां मौजूद हैं। ऐसे में बाघों की आवाजाही बढ़ने पर स्थानीय लोगों की सुरक्षा और वन्यजीवों की सुरक्षा दोनों को लेकर निगरानी बढ़ानी होगी। वन विभाग की ओर से जागरूकता कार्यक्रम और निगरानी व्यवस्था को इसीलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय समुदायों को बाघ की मौजूदगी की स्थिति में क्या सावधानी बरतनी है और जंगल से जुड़े क्षेत्रों में किस तरह व्यवहार करना है, इसकी जानकारी देना भी जरूरी होगा।

बक्सा में बाघों की वापसी को लेकर वन विभाग का कहना है कि इस कार्यक्रम की तैयारी कई वर्षों से चल रही है और वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर इसे आगे बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि लंबे समय तक चली तैयारी और निगरानी के आधार पर बाघों को दोबारा बसाने की कोशिश की जा रही है। वहीं विशेषज्ञों का एक वर्ग इस बात पर जोर देता है कि पुनर्वास की सफलता के लिए पर्याप्त आवास, शिकार आधार और मानव गतिविधियों का बेहतर प्रबंधन जरूरी है।

फिलहाल बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से आई यह बाघिन बक्सा के जंगल में पहुंच चुकी है और उसके साथ उत्तर बंगाल के इस महत्वपूर्ण वन क्षेत्र में बाघों की वापसी की नई उम्मीद जुड़ गई है। जंगल में छोड़े जाने के बाद अब वन विभाग की निगरानी में उसके व्यवहार और गतिविधियों को देखा जाएगा। आने वाले समय में और बाघों को यहां लाने की योजना के साथ यह अभियान आगे बढ़ेगा। अगर बक्सा में उपयुक्त आवास, पर्याप्त शिकार और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जाता है तो यह क्षेत्र फिर से रॉयल बंगाल टाइगर के महत्वपूर्ण आवा

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