मणिपुर CM से मुलाकात पर KHRC नाराज, Pherzawl प्रतिनिधिमंडल से अलग प्रशासन की मांग प्राथमिकता देने की अपील

KHRC ने टिपाइमुख विधायक और Pherzawl CSOs की मणिपुर CM से मुलाकात पर आपत्ति जताई। प्रतिनिधिमंडल ने सड़क, बिजली, बैंकिंग और ADC के मुद्दे उठाए थे।

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह से टिपाइमुख विधायक और फेरजॉल के CSO प्रतिनिधियों की मुलाकात पर KHRC ने आपत्ति जताई। संगठन ने सुरक्षा, न्याय और अलग प्रशासन की मांग को विकास संबंधी मुद्दों से ऊपर रखने की अपील की।

इंफाल: कुकी ह्यूमन राइट्स काउंसिल (KHRC) ने 30 सितंबर को टिपाइमुख के विधायक नगुरसंगलूर सनाते और फेरजॉल जिले के विभिन्न नागरिक समाज संगठनों (CSOs) के प्रतिनिधियों की मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह से मुलाकात पर आपत्ति जताई है। KHRC ने कहा कि जब बड़ी संख्या में लोग विस्थापन और न्याय से जुड़े सवालों का सामना कर रहे हैं, ऐसे समय में राज्य सरकार के साथ बातचीत समुदाय के सामूहिक राजनीतिक संघर्ष को कमजोर कर सकती है।

हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 30 सितंबर को हुई बैठक में प्रतिनिधिमंडल ने फेरजॉल क्षेत्र की सड़क, बिजली, बैंकिंग और प्रशासनिक जरूरतों को मुख्यमंत्री के सामने रखा था। मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने शांति और स्थिरता को प्राथमिकता बताते हुए प्रतिनिधिमंडल को उठाए गए मुद्दों पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

KHRC ने बैठक को लेकर क्या कहा?

KHRC ने अपने बयान में टिपाइमुख विधायक और फेरजॉल जिले के CSO प्रतिनिधियों की मुख्यमंत्री से मुलाकात की आलोचना की। संगठन का कहना है कि विस्थापन, सुरक्षा और न्याय से जुड़े सवालों का समाधान किए बिना केवल विकास संबंधी आश्वासनों पर बातचीत करना समुदाय की राजनीतिक मांगों को पीछे कर सकता है।

KHRC ने विशेष रूप से ह्मार समुदाय के युवाओं और शिक्षित वर्ग से अपील की कि वे केंद्र और मणिपुर सरकार की कथित “डिवाइड एंड रूल” नीति से प्रभावित न हों। यह संगठन का आरोप और राजनीतिक आकलन है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है।

संगठन ने कहा कि समुदाय की राजनीतिक मांगों को विकास परियोजनाओं के मुद्दों से अलग करके देखा जाना चाहिए। उसके अनुसार, सड़क, बिजली और बैंकिंग जैसी सुविधाएं जरूरी हैं, लेकिन सुरक्षा और न्याय के सवालों के समाधान के बिना केवल विकास पर्याप्त नहीं है।

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के सामने क्या मुद्दे उठाए?

30 सितंबर को मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में टिपाइमुख विधानसभा क्षेत्र के विधायक नगुरसंगलूर सनाते और फेरजॉल जिले के विभिन्न नागरिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।

प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्र में सड़क संपर्क सुधारने, बिजली की उपलब्धता बढ़ाने, बैंकिंग सुविधाएं शुरू करने और प्रस्तावित फेरजॉल ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (ADC) से जुड़े मुद्दों पर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित किया।

प्रतिनिधिमंडल ने जिरीबाम-टिपाइमुख सड़क को मौजूदा जिला सड़क के दर्जे से बढ़ाकर राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा देने की मांग भी रखी। प्रतिनिधियों के अनुसार, यह मार्ग NH-37 और NH-102 के बीच महत्वपूर्ण संपर्क उपलब्ध करा सकता है और जिरीबाम, टिपाइमुख तथा आसपास के क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर कर सकता है।

बिजली और बैंकिंग सुविधाओं की भी मांग

प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्र में बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं को भी मुख्यमंत्री के सामने रखा। इसमें सिपुइकाउन पावर स्टेशन से परबुंग तक प्रस्तावित बिजली लाइन कनेक्शन को लागू करने तथा अन्य क्षेत्रों तक बिजली आपूर्ति बढ़ाने की मांग शामिल थी।

बैंकिंग सुविधा की कमी को लेकर भी प्रतिनिधिमंडल ने चिंता जताई। प्रतिनिधियों ने कहा कि क्षेत्र में बैंकिंग सेवाओं के अभाव के कारण स्थानीय लोगों को वित्तीय सेवाओं तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए क्षेत्र में बैंक स्थापित करने की मांग रखी गई।

इसके अलावा, प्रस्तावित फेरजॉल ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल को लेकर स्थानीय लोगों की चिंताओं और आकांक्षाओं को भी मुख्यमंत्री के सामने रखा गया।

मुख्यमंत्री खेमचंद ने शांति को बताया प्राथमिकता

मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के दौरान कहा कि मणिपुर में शांति और स्थिरता की बहाली प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सामान्य स्थिति और स्थिरता के बिना विकास तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाना मुश्किल होगा।

मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को यह भी आश्वासन दिया कि उसके द्वारा उठाए गए मुद्दों की जांच की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में इन मांगों के लिए किसी निश्चित समयसीमा, स्वीकृत बजट या परियोजनाओं की तत्काल मंजूरी की घोषणा नहीं की गई है।

फेरजॉल जिले की भौगोलिक और सामाजिक स्थिति

फेरजॉल मणिपुर का एक सीमावर्ती जिला है, जिसकी सीमाएं असम और मिजोरम से लगती हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, जिले में ह्मार समुदाय की बड़ी आबादी रहती है।

क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति के कारण सड़क संपर्क, बिजली और बैंकिंग जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता स्थानीय प्रशासन और निवासियों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। प्रतिनिधिमंडल ने इन्हीं बुनियादी जरूरतों को लेकर राज्य सरकार के हस्तक्षेप की मांग की है।

KHRC की अलग प्रशासन की मांग

KHRC ने अपने बयान में विकास संबंधी मांगों के साथ समुदाय की राजनीतिक मांग को भी प्रमुखता से रखा। संगठन ने भारत के संविधान के तहत कुकी समुदाय के लिए अलग राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की मांग दोहराई है।

संगठन का कहना है कि अलग प्रशासन की व्यवस्था समुदाय के जीवन, जमीन और पहचान की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। KHRC ने फेरजॉल जिले के नागरिक समाज संगठनों से भी इस राजनीतिक मांग को लेकर एकजुट रहने की अपील की।

यह मांग KHRC का राजनीतिक रुख है। इसे मुख्यमंत्री के साथ 30 सितंबर की बैठक में प्रतिनिधिमंडल द्वारा रखी गई बुनियादी ढांचे संबंधी मांगों के साथ समान नहीं माना जाना चाहिए। उपलब्ध बैठक संबंधी रिपोर्टों में मुख्य रूप से सड़क, बिजली, बैंकिंग और फेरजॉल ADC से जुड़े मुद्दों का उल्लेख है।

2023 से जारी जातीय संघर्ष का संदर्भ

KHRC ने अपने बयान में मई 2023 से मणिपुर में जारी जातीय हिंसा का भी उल्लेख किया। संगठन ने हिंसा के दौरान कुकी समुदाय के लोगों की मौतों और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के कई आरोप लगाए।

KHRC ने डेविड ह्मार की कथित हत्या और जोसांगकिम ह्मार की मौत का उल्लेख किया तथा कुछ अन्य गंभीर आरोप भी लगाए। संगठन ने यह भी दावा किया कि इस अवधि में 200 से अधिक कुकी नागरिक मारे गए। इन आंकड़ों और आरोपों को KHRC के दावों के रूप में देखा जाना चाहिए; उपलब्ध रिपोर्ट में इन सभी मामलों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

वहीं, PTI की 30 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, मई 2023 में शुरू हुए जातीय संघर्ष में कम से कम 306 लोगों की मौत हुई थी और 49 लोग लापता थे, जबकि हजारों लोग विस्थापित हुए थे। रिपोर्ट के अनुसार संघर्ष मुख्य रूप से इंफाल घाटी के मैतेई और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों के कुकी समुदायों के बीच हुआ तथा इसका असर जिरीबाम जिले तक भी पहुंचा था।

तीन साल बाद ह्मार प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री से मुलाकात

PTI के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने बताया कि 2023 में जातीय संघर्ष शुरू होने के बाद यह पहली बार था जब फेरजॉल जिले के ह्मार समुदाय का प्रतिनिधिमंडल इंफाल में मुख्यमंत्री से मिला।

प्रतिनिधि ने शांति की उम्मीद जताते हुए कहा कि ह्मार समुदाय शांति चाहता है। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब राज्य में विभिन्न समुदायों के बीच संवाद और सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिशें जारी हैं।

मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, अप्रैल में जिरीबाम जिले में मैतेई और ह्मार समुदायों के प्रतिनिधियों के बीच एक शांति पहल भी हुई थी। सरकार का कहना है कि इस पहल से दोनों समुदायों के बीच शांति और सद्भाव बनाए रखने में मदद मिली है।

राज्य सरकार और KHRC के रुख में अंतर

30 सितंबर की बैठक और उसके बाद KHRC की प्रतिक्रिया मणिपुर में विकास, शांति और राजनीतिक समाधान को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोणों को सामने लाती है।

राज्य सरकार की ओर से बैठक में सड़क, बिजली, बैंकिंग और प्रशासनिक मुद्दों को संबोधित करने के साथ शांति और स्थिरता को विकास की पूर्व शर्त बताया गया। दूसरी ओर, KHRC ने सुरक्षा, न्याय और राजनीतिक मांगों को प्राथमिकता देने की अपील की है।

फिलहाल, फेरजॉल क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी मांगों पर सरकार ने मुद्दों की जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। दूसरी ओर, KHRC ने अलग प्रशासन की अपनी मांग दोहराते हुए समुदाय के संगठनों से इस मुद्दे पर एकजुट रहने की अपील की है। आने वाले समय में इन मांगों पर सरकार की कार्रवाई और क्षेत्र में जारी शांति प्रयास मणिपुर की स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे।

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