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केंद्र सरकार ने 2027-28 की रबी फसलों का MSP बढ़ाया। गेहूं ₹25 महंगा हुआ। ₹1.86 लाख करोड़ के ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर, दिल्ली ITMS और P&K सब्सिडी को मंजूरी।

केंद्र सरकार ने 2027-28 की छह रबी फसलों का MSP बढ़ाने को मंजूरी दी। गेहूं का MSP ₹25 प्रति क्विंटल बढ़ा। कैबिनेट ने ₹1,86,405 करोड़ के ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर, दिल्ली के ₹1,790 करोड़ ITMS और ₹41,533 करोड़ P&K सब्सिडी को भी मंजूरी दी।

नई दिल्ली: नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बुधवार को किसानों, नवीकरणीय ऊर्जा, कर्मचारी भविष्य निधि और दिल्ली के ट्रैफिक से जुड़े कई अहम फैसलों को मंजूरी दी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2027-28 के लिए छह रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी। गेहूं के MSP में ₹25 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। इसके अलावा ₹1,86,405 करोड़ की लागत वाले ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III को भी मंजूरी मिली है।

गेहूं के MSP में ₹25 प्रति क्विंटल बढ़ोतरी

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद फैसलों की जानकारी दी। सरकार ने रबी सीजन 2027-28 के लिए सभी छह प्रमुख रबी फसलों के MSP में वृद्धि को मंजूरी दी है। इन फसलों में गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों-राई और कुसुम शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, गेहूं के MSP में ₹25 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।

रबी फसलों में सबसे अधिक बढ़ोतरी कुसुम के MSP में हुई है। इसके MSP में ₹675 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई। इसके बाद सरसों-राई के MSP में ₹413 प्रति क्विंटल और मसूर के MSP में ₹390 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।

MSP में यह वृद्धि किसानों को उनकी फसलों के लिए निर्धारित न्यूनतम मूल्य उपलब्ध कराने की सरकार की नीति का हिस्सा है। अलग-अलग फसलों के लिए MSP तय करते समय उत्पादन लागत और कृषि क्षेत्र से जुड़े विभिन्न आर्थिक पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है।

छह रबी फसलों पर बढ़ा MSP

कैबिनेट के फैसले का सीधा संबंध आगामी रबी फसल सीजन से है। रबी फसलों की बुवाई आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर के दौरान शुरू होती है और इनकी कटाई वसंत के महीनों में होती है।

गेहूं देश की प्रमुख रबी फसलों में शामिल है। इसके अलावा सरसों, मसूर, चना, जौ और कुसुम जैसी फसलें भी रबी सीजन में बड़े पैमाने पर उगाई जाती हैं।

सरकार के इस फैसले से किसानों को इन फसलों के लिए घोषित MSP के आधार पर कीमत का संदर्भ मिलेगा। हालांकि, MSP और बाजार में वास्तविक बिक्री मूल्य अलग-अलग हो सकते हैं और वास्तविक कीमतें मंडी, मांग, आपूर्ति और अन्य बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं।

₹1.86 लाख करोड़ के ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर को मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III को भी मंजूरी दी है। इस परियोजना पर कुल ₹1,86,405 करोड़ खर्च किए जाएंगे।

योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नवीकरणीय ऊर्जा के लिए इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम विकसित किया जाएगा। इसका लक्ष्य 2032-33 तक 135 GW तक की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता को ट्रांसमिशन नेटवर्क से जोड़ने में मदद करना है।

सौर और पवन ऊर्जा से बिजली उत्पादन बढ़ने के साथ उसके ट्रांसमिशन के लिए मजबूत नेटवर्क की जरूरत भी बढ़ रही है। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर का उद्देश्य ऐसे ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करना है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा को बिजली ग्रिड में प्रभावी तरीके से एकीकृत किया जा सके।

क्या है ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर?

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर एक ऐसा बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क है, जिसे मुख्य रूप से नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं से पैदा होने वाली बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने के लिए विकसित किया जाता है।

सौर ऊर्जा दिन के समय सूर्य की उपलब्धता पर निर्भर करती है, जबकि पवन ऊर्जा हवा की गति के अनुसार बदलती रहती है। इसलिए बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड में शामिल करने के लिए मजबूत ट्रांसमिशन और ग्रिड प्रबंधन व्यवस्था जरूरी होती है।

प्रस्तावित फेज-III में राज्यों के भीतर ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर रहेगा। इसका उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन वाले क्षेत्रों से बिजली को जरूरत वाले क्षेत्रों तक पहुंचाने की क्षमता बढ़ाना है।

135 GW रिन्यूएबल एनर्जी के लिए ट्रांसमिशन सिस्टम

सरकार के मुताबिक, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III के तहत 135 GW तक की नवीकरणीय ऊर्जा के लिए इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम तैयार किया जाएगा।

यह परियोजना 2032-33 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके जरिए बढ़ती सौर और पवन ऊर्जा क्षमता को बिजली ग्रिड के साथ जोड़ने के लिए आवश्यक ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा।

यह योजना भारत के ऊर्जा संक्रमण और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को ग्रिड से जोड़ने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।

दिल्ली के लिए ₹1,790 करोड़ का स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम

कैबिनेट ने दिल्ली में ट्रैफिक प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए ₹1,790 करोड़ के इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) को भी मंजूरी दी है।

इस सिस्टम का उद्देश्य ट्रैफिक प्रवाह को तकनीक के जरिए बेहतर तरीके से नियंत्रित करना है। इसके तहत सड़कों पर कैमरों, सेंसर और अन्य तकनीकी प्रणालियों का इस्तेमाल किया जाएगा।

सिस्टम के जरिए अलग-अलग सड़कों पर वाहनों की संख्या और उनकी आवाजाही की निगरानी की जा सकेगी। इसके आधार पर ट्रैफिक सिग्नल के संचालन को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश की जाएगी।

ट्रैफिक के हिसाब से बदलेंगे सिग्नल

प्रस्तावित स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम में सिग्नल के संचालन को ट्रैफिक की स्थिति के अनुसार समायोजित किया जा सकता है। जिस दिशा में वाहनों का दबाव अधिक होगा, वहां ट्रैफिक सिग्नल का समय ट्रैफिक फ्लो के अनुसार बदला जा सकेगा।

AI आधारित कैमरों और सेंसर की मदद से वाहनों की संख्या और गति से जुड़ा डेटा जुटाया जाएगा। इससे ट्रैफिक प्रबंधन एजेंसियों को सड़क पर मौजूदा स्थिति के आधार पर निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

नंबर प्लेट की भी होगी पहचान

स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम में वाहनों की नंबर प्लेट पहचानने वाली तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कैमरों के जरिए वाहन की पहचान करने और संबंधित कार्रवाई की प्रक्रिया को तकनीकी रूप से मजबूत करने का लक्ष्य है।

इससे ट्रैफिक निगरानी को अधिक स्वचालित बनाने और नियमों के पालन में मदद मिलने की उम्मीद है।

EPFO की वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000

कैबिनेट ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़ा भी अहम फैसला लिया है। सरकार ने PF के लिए अनिवार्य वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने को मंजूरी दी है।

इस बदलाव का संबंध उन कर्मचारियों से है जिन पर EPFO के तहत अनिवार्य कवरेज लागू होता है। वेतन सीमा में बदलाव से EPFO के दायरे और कर्मचारी भविष्य निधि से जुड़े योगदान पर प्रभाव पड़ सकता है।

इस फैसले का उद्देश्य संगठित क्षेत्र के अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे से जोड़ना है।

P&K उर्वरकों के लिए ₹41,533 करोड़ की सब्सिडी

किसानों से जुड़े एक अन्य फैसले में कैबिनेट ने फॉस्फेटिक और पोटाशिक यानी P&K उर्वरकों के लिए ₹41,533 करोड़ की सब्सिडी मंजूर की है।

उर्वरक सब्सिडी का उद्देश्य किसानों को आवश्यक खाद अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध कराने में मदद करना है। खेती की लागत में उर्वरक एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, इसलिए इसकी कीमत किसानों की उत्पादन लागत को प्रभावित करती है।

सरकार की सब्सिडी व्यवस्था के जरिए किसानों के लिए P&K उर्वरकों की कीमत को नियंत्रित रखने का प्रयास किया जाता है।

कैबिनेट के फैसलों में किसान, ऊर्जा और शहरी परिवहन पर जोर

बुधवार को लिए गए फैसलों में कृषि, ऊर्जा, सामाजिक सुरक्षा और शहरी परिवहन से जुड़े अलग-अलग क्षेत्र शामिल रहे। रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी का सीधा संबंध कृषि और किसानों से है, जबकि ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर का फोकस नवीकरणीय ऊर्जा के लिए ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने पर है।

दिल्ली के लिए ITMS शहरी परिवहन और ट्रैफिक प्रबंधन से जुड़ा है। वहीं EPFO की वेतन सीमा में बदलाव सामाजिक सुरक्षा के दायरे से संबंधित है। P&K उर्वरक सब्सिडी का उद्देश्य खेती में इस्तेमाल होने वाले आवश्यक उर्वरकों की लागत को कम रखने में मदद करना है।

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