CBSE मूल्यांकन विवाद: राहुल गांधी ने उठाए सवाल, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग तेज

CBSE मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। राहुल गांधी ने इस पर सवाल उठाते हुए शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग की है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से जुड़ी कथित गड़बड़ियों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी और शिक्षा मंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई न होना यह दर्शाता है कि सरकार की प्राथमिकता छात्रों के भविष्य से ज्यादा अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाना है।

नई दिल्ली: भारत में शिक्षा प्रणाली और परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रियाओं को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद सामने आया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली और मूल्यांकन से जुड़े ठेकों के आवंटन पर गंभीर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी एक बयान में आरोप लगाया कि सीबीएसई की मूल्यांकन प्रणाली में कथित अनियमितताओं और तकनीकी खामियों ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि इस मामले पर प्रधानमंत्री Narendra Modi की चुप्पी और शिक्षा मंत्रालय की ओर से स्पष्ट जवाब न मिलना चिंता का विषय है।

मूल्यांकन प्रक्रिया पर उठे सवाल

कांग्रेस नेता के अनुसार, सीबीएसई द्वारा ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के लिए जारी की गई निविदा प्रक्रिया के दौरान कई तकनीकी मानकों में बदलाव किए गए। उन्होंने दावा किया कि प्रारंभिक चरणों में योग्य बोलीदाताओं की कमी के बाद पात्रता मानदंडों को क्रमशः कम किया गया, जिसके बाद संबंधित कंपनी को अनुबंध प्रदान किया गया।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि स्कैनिंग गुणवत्ता, तकनीकी प्रमाणन और अन्य आवश्यक मानकों में कथित रूप से बदलाव किए गए, जिससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्न खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों और शिक्षकों द्वारा मूल्यांकन प्रणाली से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

छात्रों और शिक्षकों की चिंताओं का उल्लेख

विपक्ष के नेता ने दावा किया कि कई छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं के स्कैन की गुणवत्ता, कथित रूप से गायब पृष्ठों और मूल्यांकन पोर्टल की तकनीकी समस्याओं को लेकर शिकायतें दर्ज कराई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ शिक्षकों ने नई प्रणाली को देशभर में लागू करने से पहले अतिरिक्त परीक्षण और तैयारी की आवश्यकता पर जोर दिया था। उनके अनुसार, यदि ऐसी चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया है, तो इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से कहा गया है कि अनुबंध और मूल्यांकन प्रक्रिया निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के अनुरूप संचालित की गई है।

स्वतंत्र जांच की मांग

राहुल गांधी ने पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने की मांग दोहराते हुए कहा कि जांच का दायरा निविदा प्रक्रिया से लेकर अनुबंध आवंटन और मूल्यांकन प्रणाली के क्रियान्वयन तक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है, क्योंकि परीक्षा प्रणाली सीधे लाखों छात्रों के शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य से जुड़ी होती है। उनके अनुसार, छात्रों और अभिभावकों का विश्वास बनाए रखने के लिए सभी तथ्यों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब भारत में विभिन्न राष्ट्रीय परीक्षाओं की पारदर्शिता, तकनीकी सुरक्षा और मूल्यांकन प्रक्रियाओं को लेकर व्यापक चर्चा चल रही है। राहुल गांधी ने अपने एक अन्य बयान में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET से जुड़े छात्रों के साथ हुई बातचीत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कई छात्रों ने परीक्षा सुरक्षा और कथित पेपर लीक घटनाओं को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की थीं। विपक्ष लगातार परीक्षा सुधार, डिजिटल सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर सरकार से स्पष्टीकरण मांग रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसी बड़ी शिक्षा व्यवस्था में तकनीकी बदलाव और डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रियाएं पारदर्शिता तथा दक्षता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, किसी भी नई प्रणाली की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन, गुणवत्ता नियंत्रण और स्वतंत्र निगरानी पर निर्भर करती है।

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