जनगणना 2026: संवेदनशील सवालों के लिए कर्मियों को मिलेगी खास ट्रेनिंग, जाति से विवाह तक दर्ज होगी जानकारी

जनगणना 2027 के दूसरे चरण में जाति समेत जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक और अन्य जानकारी दर्ज की जाएगी। संवेदनशील सवालों को सही तरीके से पूछने और जवाब दर्ज करने के

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और गोवा जैसे राज्यों में जनगणना का दूसरा चरण दिसंबर में शुरू होना है। इसे देखते हुए जनगणना कर्मियों को संवेदनशील और मुश्किल सवाल पूछने के तरीके को लेकर विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 

नई दिल्ली: भारत में होने वाली जनगणना 2026 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। जनगणना के दूसरे चरण में लोगों से कई ऐसे सवाल पूछे जाएंगे, जिन्हें सामाजिक और व्यक्तिगत रूप से संवेदनशील माना जाता है। इनमें धर्म, जाति, मातृभाषा, विवाह, संतान, प्रजनन क्षमता, दिव्यांगता, प्रवासन, शिक्षा और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े सवाल शामिल हैं। इन सवालों को पूछने और उनके जवाब दर्ज करने के लिए जनगणना कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

अधिकारियों का जोर इस बात पर है कि प्रगणक नागरिकों से बातचीत के दौरान सम्मानजनक और सहज व्यवहार करें। उन्हें किसी भी उत्तर पर बहस करने, जवाब को सही या गलत ठहराने अथवा अपनी ओर से कोई धारणा बनाने से बचने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि इतने बड़े स्तर पर होने वाली जनगणना के आंकड़ों की विश्वसनीयता काफी हद तक प्रगणकों और पर्यवेक्षकों के प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर निर्भर करेगी।

संवेदनशील सवालों को पूछने के लिए विशेष निर्देश

जनगणना के दौरान कर्मियों को परिवारों के साथ व्यवस्थित तरीके से बातचीत करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, प्रत्येक उत्तरदाता के साथ विश्वास का माहौल बनाना जरूरी है, ताकि लोग बिना झिझक सही जानकारी दे सकें। धर्म, जाति, लिंग, विवाह और संतान से जुड़े सवालों को पूछते समय विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। इसी तरह दिव्यांगता, प्रवासन, प्रजनन क्षमता और आर्थिक गतिविधियों से संबंधित सवालों के जवाब भी बिना किसी पूर्वाग्रह के दर्ज करने होंगे।

प्रगणकों को यह भी समझाया जाएगा कि उत्तरदाता की ओर से दी गई जानकारी पर व्यक्तिगत टिप्पणी या सवाल नहीं किया जाना चाहिए। उनका काम केवल निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जानकारी हासिल करना और उसे सही तरीके से दर्ज करना होगा।

34 लाख से ज्यादा कर्मियों की होगी भूमिका

भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण की ओर से राज्यों को प्रशिक्षण और जनगणना प्रक्रिया को लेकर निर्देश भेजे गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, जनसंख्या गणना के लिए 34 लाख से अधिक प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की भूमिका होगी। इतने बड़े मानवबल को एक समान प्रक्रिया और दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रशिक्षित करना चुनौतीपूर्ण काम है।

इसलिए प्रशिक्षण की गुणवत्ता, उसकी समयसीमा और अलग-अलग स्तरों पर निगरानी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में जनगणना के दौरान जानकारी जुटाने की प्रक्रिया में अनावश्यक अंतर न रहे।

रियल टाइम निगरानी से होगी ट्रेनिंग की समीक्षा

प्रशिक्षण कार्यक्रम की प्रगति पर नजर रखने के लिए सीएमएमएस पोर्टल पर उपलब्ध प्रशिक्षण डैशबोर्ड का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके माध्यम से अलग-अलग स्तरों पर प्रशिक्षण की स्थिति की रियल टाइम निगरानी की जा सकेगी। इसके अलावा एचबीएल क्रिएटर वेब मैप जैसी तकनीक का इस्तेमाल भी निगरानी और प्रबंधन के लिए किया जाएगा। 

अधिकारियों का लक्ष्य है कि सभी कर्मियों को निर्धारित समय के भीतर आवश्यक प्रशिक्षण मिल जाए और जनगणना शुरू होने से पहले उनकी तैयारियों की समीक्षा पूरी हो सके।

पहली बार आधिकारिक आंकड़ों में जातीय संरचना का विस्तृत रिकॉर्ड

जनगणना 2026 को एक और वजह से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आजादी के बाद पहली बार आधिकारिक जनगणना के आंकड़ों में जातीय संरचना से जुड़ी विस्तृत जानकारी दर्ज की जाएगी। इसके लिए प्रगणकों को जाति से जुड़े सवाल पूछने की प्रक्रिया और जवाब दर्ज करने के तरीके को लेकर विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा।

हालांकि, जाति और धर्म जैसे विषय लोगों की सामाजिक पहचान से जुड़े होने के कारण संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में प्रशिक्षण के दौरान निष्पक्षता और उत्तरदाता के प्रति सम्मान को प्रमुखता दी जा रही है।

चार राज्यों में दिसंबर से शुरू होगा दूसरा चरण

विधानसभा चुनावों को देखते हुए उत्तर प्रदेश, गोवा, पंजाब और उत्तराखंड में जनगणना का दूसरा चरण निर्धारित कार्यक्रम से पहले शुरू किया जाएगा। इन राज्यों में जनसंख्या गणना की शुरुआत 5 दिसंबर से प्रस्तावित है। यहां तैनात किए जाने वाले कर्मियों की ट्रेनिंग 21 नवंबर तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि इसके बाद अंतिम तैयारियों, संशोधन और कर्मियों की तैनाती के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

देश के अन्य हिस्सों में जहां दूसरा चरण बाद में आयोजित किया जाना है, वहां प्रशिक्षण प्रक्रिया को 15 जनवरी 2027 तक पूरा करने की योजना है। वहीं, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फबारी वाले क्षेत्रों में जनगणना का दूसरा चरण अलग समय-सारणी के अनुसार पहले ही शुरू किया जा रहा है।

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