चेनालिसिस रिपोर्ट: प्रतिबंधों के बीच रूस-ईरान ने बढ़ाया क्रिप्टो आधारित भुगतान नेटवर्क

चेनालिसिस रिपोर्ट के अनुसार रूस, ईरान और उत्तर कोरिया ने क्रिप्टो आधारित वैकल्पिक भुगतान नेटवर्क विकसित किया। साइबर सुरक्षा और वैश्विक वित्तीय निगरानी पर नई बहस

चेनालिसिस की रिपोर्ट के अनुसार रूस, ईरान और उत्तर कोरिया ने प्रतिबंधों के बीच क्रिप्टो आधारित वैकल्पिक भुगतान नेटवर्क का विस्तार किया है। रिपोर्ट में साइबर अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग और डिजिटल वित्तीय सुरक्षा से जुड़ी नई वैश्विक चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया है।

मास्को: अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहे रूस, ईरान और उत्तर कोरिया ने डिजिटल परिसंपत्तियों (क्रिप्टोकरेंसी) के माध्यम से एक वैकल्पिक भुगतान नेटवर्क विकसित किया है। ब्लॉकचेन विश्लेषण से जुड़ी संस्था चेनालिसिस (Chainalysis) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में इन देशों से जुड़े क्रिप्टो लेनदेन का कुल मूल्य लगभग 9.92 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। रिपोर्ट के अनुसार यह आंकड़ा वर्ष 2024 की तुलना में कई गुना अधिक है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह नेटवर्क केवल निवेश या डिजिटल भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उपयोग अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा लेनदेन और अन्य सीमा-पार वित्तीय गतिविधियों के लिए भी किया जा रहा है। हालांकि विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा इन गतिविधियों की निगरानी लगातार बढ़ाई जा रही है।

पारंपरिक बैंकिंग से अलग भुगतान व्यवस्था

अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण कई देशों की वैश्विक बैंकिंग प्रणाली तक पहुंच सीमित हो गई है। ऐसे में क्रिप्टोकरेंसी आधारित भुगतान माध्यम को एक वैकल्पिक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, रूस, ईरान और उत्तर कोरिया ने ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करते हुए ऐसा नेटवर्क विकसित किया है, जिसके जरिए पारंपरिक बैंकिंग चैनलों से बाहर वित्तीय लेनदेन किए जा सकते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय भुगतान को आसान बनाना और प्रतिबंधों के प्रभाव को कम करना माना जा रहा है।

रूस ने विकसित किया डिजिटल टोकन

रिपोर्ट के मुताबिक रूस ने अपनी राष्ट्रीय मुद्रा रूबल से जुड़ा एक डिजिटल टोकन विकसित किया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय भुगतान में उपयोग किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि इस प्रणाली के तहत घरेलू स्तर पर रूबल जमा कर विदेशों में डिजिटल टोकन के माध्यम से भुगतान किया जा सकता है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस नेटवर्क पर लाखों लेनदेन दर्ज किए जा चुके हैं और हजारों सक्रिय खाते इससे जुड़े हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे डिजिटल टोकन भविष्य में प्रतिबंधों से प्रभावित देशों के लिए वैकल्पिक वित्तीय साधन बन सकते हैं।

ईरान ने ऊर्जा व्यापार में बढ़ाया क्रिप्टो का उपयोग

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में कुछ घरेलू क्रिप्टो प्लेटफॉर्म का उपयोग अंतरराष्ट्रीय भुगतान और ऊर्जा कारोबार से जुड़े लेनदेन के लिए किया जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक वित्तीय प्रतिबंधों के कारण ईरान लंबे समय से वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों की तलाश में रहा है। ऐसे में डिजिटल मुद्राएं सीमा-पार भुगतान के एक नए माध्यम के रूप में उभर रही हैं। हालांकि इन गतिविधियों की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक विवरण विभिन्न देशों की जांच एजेंसियों द्वारा अलग-अलग स्तर पर किए जा रहे हैं।

उत्तर कोरिया और साइबर अपराध पर बढ़ती चिंता

रिपोर्ट में उत्तर कोरिया से जुड़े साइबर अपराधों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि वर्ष 2025 के दौरान उत्तर कोरिया से जुड़े हैकर समूहों ने कई बड़े साइबर हमलों के जरिए बड़ी मात्रा में डिजिटल संपत्तियां हासिल कीं। विशेष रूप से फरवरी 2025 में एक प्रमुख क्रिप्टो एक्सचेंज पर हुए साइबर हमले का उल्लेख किया गया है। अमेरिकी जांच एजेंसियों ने इस हमले की जांच करते हुए इसे उत्तर कोरिया से जुड़े हैकर नेटवर्क से जोड़ने का दावा किया है। हालांकि संबंधित मामलों की जांच अभी भी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के स्तर पर जारी है।

मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर भी निगरानी

चेनालिसिस की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एशिया के कुछ संगठित नेटवर्क क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ये नेटवर्क डिजिटल परिसंपत्तियों के जरिए अवैध धन को वैध वित्तीय प्रणाली में शामिल करने की कोशिश करते हैं। अंतरराष्ट्रीय नियामक संस्थाएं ऐसे नेटवर्क पर लगातार निगरानी बढ़ा रही हैं ताकि अवैध वित्तीय गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लॉकचेन तकनीक पारदर्शी होने के बावजूद, कई बार जटिल लेनदेन संरचनाओं और विभिन्न डिजिटल वॉलेट के कारण जांच प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण हो जाती है।

फर्जी पहचान और रिमोट नौकरियों का नया खतरा

रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। इसके अनुसार, कुछ संगठित समूहों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डीपफेक तकनीक और फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर दुनिया भर की तकनीकी और क्रिप्टो कंपनियों में रिमोट नौकरियां हासिल करने की कोशिश की।

रिपोर्ट का दावा है कि ऐसे नेटवर्क ने दो वर्षों के दौरान बड़ी मात्रा में धन एकत्र किया। कई मामलों में स्थानीय सहयोगियों के माध्यम से कंपनियां बनाई गईं ताकि कर्मचारियों की वास्तविक पहचान छिपाई जा सके। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में कंपनियों को भर्ती प्रक्रिया के दौरान डिजिटल सत्यापन और पहचान जांच को और मजबूत करना होगा।

वैश्विक नियामकों के सामने नई चुनौती

क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग तेजी से बढ़ने के साथ-साथ दुनिया भर की सरकारों और वित्तीय नियामकों के सामने नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। एक ओर ब्लॉकचेन तकनीक तेज, पारदर्शी और कम लागत वाले अंतरराष्ट्रीय भुगतान का माध्यम प्रदान करती है, वहीं दूसरी ओर इसका दुरुपयोग प्रतिबंधों से बचने, साइबर अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध वित्तीय गतिविधियों में किए जाने की आशंका भी बनी रहती है। इसी कारण अमेरिका, यूरोप, एशिया और अन्य क्षेत्रों की नियामक एजेंसियां क्रिप्टो लेनदेन की निगरानी के लिए नए नियम और तकनीकी प्रणालियां विकसित कर रही हैं।

डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल तीन देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक डिजिटल वित्तीय व्यवस्था में हो रहे बड़े बदलाव का संकेत भी है। आने वाले वर्षों में केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC), ब्लॉकचेन आधारित भुगतान प्रणाली और अंतरराष्ट्रीय डिजिटल वित्तीय नेटवर्क की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है। साथ ही, पारदर्शिता, साइबर सुरक्षा और नियामक सहयोग भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभ बनेंगे।

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