उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी में निर्माणाधीन हाइड्रो प्रोजेक्ट की DRT टनल में गुरुवार शाम बड़ा हादसा हो गया। टनल के अंदर अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा आने से वहां काम कर रहे मजदूर फंस गए।
चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले में निर्माणाधीन सुरंग के अंदर हुए भीषण हादसे में कम से कम 7 मजदूरों की मौत हो गई है। पीपलकोटी क्षेत्र में एक हाइड्रो प्रोजेक्ट की DRT टनल में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा घुसने से कई मजदूर फंस गए। राहत और बचाव अभियान में अब तक 18 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जबकि 3 मजदूरों की तलाश जारी है।
हादसे के बाद सुरंग के भीतर पानी, गाद और मलबा भर जाने से रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। SDRF, NDRF, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें मौके पर लगातार बचाव कार्य में जुटी हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी पूरे ऑपरेशन पर नजर बनाए हुए हैं और उन्होंने बचाव अभियान को युद्धस्तर पर चलाने के निर्देश दिए हैं।
पीपलकोटी में निर्माणाधीन DRT टनल में कैसे हुआ हादसा?
जानकारी के अनुसार, चमोली के पीपलकोटी इलाके में एक हाइड्रो प्रोजेक्ट के लिए सुरंग का निर्माण कार्य चल रहा था। गुरुवार शाम करीब 6:30 से 7 बजे के बीच सुरंग के भीतर अचानक एक कैविटी से बड़ी मात्रा में पानी और मलबा निकल आया। घटना उस समय हुई जब मजदूर सुरंग के अंदर निर्माण कार्य में लगे हुए थे। बताया गया कि टनल के भीतर अचानक तेज आवाज के साथ पानी और भारी मलबा तेजी से फैलने लगा। हादसा इतना अचानक हुआ कि वहां काम कर रहे लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचने का पर्याप्त समय नहीं मिला।
यह सुरंग करीब 3.5 किलोमीटर लंबी बताई जा रही है और हादसा टनल के लगभग 1.8 किलोमीटर अंदर हुआ। टनल के प्रवेश द्वार से करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर तक पानी और मलबा पहुंचने के कारण कई मजदूर इसकी चपेट में आ गए।
सुरंग में गले तक पानी और गाद, रेस्क्यू में बड़ी चुनौती

टनल के अंदर बचाव अभियान चलाना राहत टीमों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। पानी के साथ आई भारी गाद और मलबे ने सुरंग के कई हिस्सों में रास्ता अवरुद्ध कर दिया। कुछ स्थानों पर बचावकर्मियों को बेहद सीमित जगह में पहुंचकर फंसे लोगों की तलाश करनी पड़ रही है। अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जानकारी में टनल के अंदर 22 मजदूरों के फंसे होने की बात सामने आई थी। इनमें से 18 को रेस्क्यू टीमों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बाद में 7 मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई, जबकि 3 लोगों का अभी तक पता नहीं चल सका है।
रात के समय सुरंग के भीतर लगातार मलबा जमा होने और असुरक्षित परिस्थितियों के कारण बचाव अभियान को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा था। हालात का आकलन करने के बाद लापता मजदूरों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन दोबारा शुरू किया गया।
पानी और मलबे में फंसे मजदूरों के बीच मची अफरातफरी
प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, हादसे के दौरान सुरंग के अंदर अचानक अफरातफरी फैल गई। पानी और मलबे का तेज बहाव आने से मजदूर इधर-उधर बचने के लिए भागने लगे। कई लोग बहाव के साथ टनल के बाहरी हिस्से की ओर पहुंचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन भारी गाद और मलबे के कारण उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
सुरंग के भीतर निर्माण कार्य के दौरान ग्रेविटी पैकिंग का काम चल रहा था। इसी बीच कैविटी से पानी और मलबा आने की घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। बचावकर्मी अब आधुनिक उपकरणों और उपलब्ध संसाधनों की मदद से सुरंग के प्रभावित हिस्से तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री धामी कर रहे रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे की जानकारी मिलने के तुरंत बाद अधिकारियों को तेजी से राहत और बचाव कार्य चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रभावित मजदूरों और उनके परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने को कहा है। बताया गया है कि सुरंग निर्माण कार्य में उत्तराखंड के अलावा छत्तीसगढ़ और झारखंड के मजदूर भी कार्यरत थे। मुख्यमंत्री ने इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी बातचीत कर घटना और राहत अभियान की जानकारी साझा की है।









