रूस से तेल ले जा रहे 'एक्वा टाइटन' टैंकर ने चीन का गंतव्य छोड़कर भारत की ओर रुख किया। भारत ने हाल में रूसी तेल आयात बढ़ाया है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू ईंधन आपूर्ति मजबूत होगी।
World News: भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर करता है। इस बीच चीन जा रहे एक रूसी तेल टैंकर ने अचानक U-Turn लिया और अब भारत की ओर रुख कर लिया है। तेल से भरे इस टैंकर का नाम 'एक्वा टाइटन' है, जिसने जनवरी के आखिर में बाल्टिक सागर के एक बंदरगाह से तेल लोड किया था। शुरू में इसने चीन के रिझाओ बंदरगाह को अपना गंतव्य बताया था, लेकिन मार्च के मध्य में दक्षिण-पूर्व एशियाई जल क्षेत्र में इसका रास्ता बदल गया और अब यह टैंकर भारत की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
अमेरिका की नीति के बाद भारत ने बढ़ाया रूसी तेल आयात
भारत ने इस बदलाव से पहले रूस से तेल की खरीद में तेजी दिखाई है। अमेरिका ने भारत से रूसी तेल की खरीद बढ़ाने का संकेत दिया है, जिसके बाद भारतीय रिफाइनर ने हाल के हफ्तों में करीब 30 मिलियन बैरल रूसी तेल खरीदा है। इस कदम का उद्देश्य ईरान और मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण देश में तेल आपूर्ति में आई कमी को पूरा करना और घरेलू बाजार में ईंधन की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
चीन से भारत की ओर बढ़ती तेल की खेप

चीन पहले रूस से तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा था, क्योंकि भारत ने कुछ समय पहले रूस से तेल की खरीद कम कर दी थी। लेकिन अब चीन की तुलना में भारत ने रूस से तेल आयात बढ़ाकर प्राथमिक खरीदार बनने की दिशा में कदम उठाया है। जापान, दक्षिण कोरिया और अन्य देशों के रूस से तेल की खरीद फिर से शुरू करने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की मांग और कीमतों पर असर पड़ने की संभावना है।
और टैंकर भी भारत की ओर
वॉर्टेक्सा लिमिटेड के अनुसार, रूस से तेल ले जा रहे कम से कम सात टैंकरों ने अपनी यात्रा के दौरान गंतव्य बदलकर भारत का रुख किया है। इनमें 'स्वेजमैक्स ज़ूज़ू एन.' भी शामिल है, जो भारत के सिक्का बंदरगाह पहुंचने वाला है। इसके पास कजाख CPC ब्लेंड कच्चा तेल भरा है, जिसे रूस के काला सागर स्थित नोवोरोस्सिय्स्क बंदरगाह से लाया गया। यह टैंकर मार्च की शुरुआत में चीन की ओर जाने के बजाय भारत की तरफ लौट गया।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए रणनीतिक कदम
इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक कदम उठा रहा है। रूसी तेल की लगातार आपूर्ति से घरेलू रिफाइनर ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने में सक्षम होंगे। इसके साथ ही, भारत मध्य-पूर्व और अन्य संकटग्रस्त क्षेत्रों से तेल की आपूर्ति में आई कमी को भी पूरा कर सकेगा।








