संसद के मानसून सत्र के बाद कांग्रेस एक बार फिर केंद्र सरकार को घेरने की रणनीति तैयार करने में जुट गई है। इसी सिलसिले में आज, बुधवार को नई दिल्ली में कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक आयोजित होगी।
नई दिल्ली: कांग्रेस की शीर्ष निर्णय लेने वाली संस्था कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की आज यानी 19 अगस्त 2026 को होने वाली बैठक राजनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है। बैठक में देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, केंद्र सरकार के खिलाफ पार्टी की आगे की रणनीति और अगले विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संसद के मॉनसून सत्र के दौरान उठाए गए मुद्दों को अब जमीन पर ले जाने और उन्हें चुनावी मुद्दों में बदलने की होगी।दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में होने वाली CWC बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे करेंगे। पार्टी के वरिष्ठ नेता, जिनमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश और केसी वेणुगोपाल समेत कई प्रमुख पदाधिकारी शामिल हैं, बैठक में हिस्सा लेंगे। बैठक का एक अहम एजेंडा आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए संगठन और राजनीतिक रणनीति तैयार करना होगा।
यूपी चुनाव के लिए किन मुद्दों पर फोकस?
कांग्रेस के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनावी राज्य उत्तर प्रदेश है। 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी को अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए स्पष्ट मुद्दों और प्रभावी संगठन की जरूरत होगी। संसद के हालिया मॉनसून सत्र में कांग्रेस और विपक्षी दलों ने छात्रों, रोजगार, शिक्षा, सरकारी भर्तियों और कथित अनियमितताओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
CWC बैठक में इस बात पर चर्चा हो सकती है कि इन मुद्दों को उत्तर प्रदेश के युवाओं और आम मतदाताओं के बीच किस तरह प्रभावी ढंग से रखा जाए। खास तौर पर छात्र आंदोलनों और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों को कांग्रेस सरकार के खिलाफ जवाबदेही के मुद्दे के रूप में पेश कर सकती है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का प्रदर्शन हालिया वर्षों में गठबंधन और संगठनात्मक समीकरणों से काफी प्रभावित रहा है। ऐसे में पार्टी के लिए केवल मुद्दे उठाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें स्थानीय स्तर पर अभियान में बदलना भी जरूरी होगा।
राम मंदिर चढ़ावा मामले पर सरकार को घेरने की तैयारी
CWC के एजेंडे में अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद को भी शामिल किए जाने की संभावना है। कांग्रेस इस मामले को पारदर्शिता और जवाबदेही से जोड़कर सरकार तथा संबंधित संस्थाओं पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर सकती है। हालांकि, इस मामले की जांच और उससे जुड़े कानूनी पहलू अभी अलग-अलग स्तरों पर जारी हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए यह मुद्दा उठाते समय तथ्यों और आधिकारिक जांच के निष्कर्षों को आधार बनाना महत्वपूर्ण होगा।

परिसीमन और महिला आरक्षण पर भी होगी चर्चा
केंद्र सरकार की ओर से परिसीमन के जरिए महिला आरक्षण लागू करने की संभावित तैयारी भी CWC बैठक में अहम विषय हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर विपक्षी दलों से समर्थन का आह्वान किया है। कांग्रेस पहले ही प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाती रही है। पार्टी का तर्क है कि परिसीमन की प्रक्रिया में दक्षिणी राज्यों और राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व के संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
कांग्रेस इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी दलों के साथ समन्वय बढ़ाने की रणनीति पर भी विचार कर सकती है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश पहले ही संकेत दे चुके हैं कि पार्टी इस मुद्दे पर विभिन्न दलों के संपर्क में है। उनके मुताबिक, सरकार के संभावित कदमों को देखते हुए विपक्ष को अपनी रणनीति पहले से तैयार रखनी होगी।
पंजाब समेत पांच राज्यों के चुनाव पर नजर
CWC बैठक में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों की तैयारियों की समीक्षा भी हो सकती है। इन राज्यों के चुनाव 2027 में होने हैं और चुनाव आयोग की प्रक्रियाएं भी आगे बढ़ रही हैं। पंजाब में कांग्रेस के सामने आम आदमी पार्टी से मुकाबले के साथ-साथ संगठन को मजबूत करने की चुनौती है।
उत्तराखंड में BJP के खिलाफ सत्ता विरोधी माहौल को भुनाना पार्टी की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। वहीं गोवा और मणिपुर में कांग्रेस को स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के हिसाब से अलग रणनीति तैयार करनी होगी।












