Raksha Bandhan 2026: राखी के त्योहार पर होगा ₹30000 करोड़ का कारोबार, डिजाइनर और स्वदेशी राखियों की बढ़ी मांग

Raksha Bandhan 2026 पर देशभर में करीब ₹30,000 करोड़ के कारोबार का अनुमान है। इस बार डिजाइनर, स्वदेशी और खास थीम वाली राखियों की मांग बढ़ी है। जानें

रक्षा बंधन का त्योहार इस साल 28 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, जबकि भाई बहनों की रक्षा का वचन देते हैं।

बिजनेस न्यूज़: भारत में रक्षा बंधन 2026 का त्योहार 28 अगस्त को मनाया जाएगा और इससे पहले देशभर के बाजारों में राखी, मिठाई, कपड़े और उपहारों की खरीदारी तेज हो गई है। व्यापारिक संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के अनुमान के मुताबिक, इस साल सिर्फ राखियों का कारोबार करीब ₹25,000 करोड़ तक पहुंच सकता है। भाई-बहन के लिए खरीदे जाने वाले उपहार, मिठाइयां, कपड़े और दूसरे त्योहार से जुड़े उत्पादों को शामिल करने पर कुल कारोबार ₹30,000 करोड़ से ज्यादा होने का अनुमान है।

रक्षा बंधन भारत के प्रमुख पारंपरिक त्योहारों में शामिल है। इस दिन बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनके सुख, स्वास्थ्य व लंबी उम्र की कामना करती हैं। बदले में भाई बहनों को उपहार देते हैं और उनके साथ अपने रिश्ते को मजबूत करने का संकल्प लेते हैं। बदलते समय के साथ इस त्योहार से जुड़ा बाजार भी तेजी से विस्तार कर रहा है।

पिछले साल से 45% अधिक राखी कारोबार का अनुमान

CAIT के मुताबिक, 2025 में रक्षा बंधन के दौरान देशभर में राखियों का कारोबार करीब ₹17,000 करोड़ रहा था। इस साल यह आंकड़ा बढ़कर ₹25,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। यानी राखी बाजार में करीब 45 फीसदी की वृद्धि देखी जा सकती है। वर्ष 2023 में राखी से जुड़ा कारोबार लगभग ₹12,000 करोड़ बताया गया था। हालांकि, इन आंकड़ों में कई बार मिठाई, उपहार, कपड़े और अन्य त्योहारी खरीदारी को अलग रखा जाता है। यही वजह है कि अगर पूरे रक्षा बंधन बाजार को देखा जाए तो कुल आर्थिक गतिविधि इससे काफी ज्यादा हो सकती है।

व्यापारियों को उम्मीद है कि त्योहार से पहले के अंतिम दिनों में बाजारों में ग्राहकों की संख्या और बढ़ेगी। ऑफलाइन दुकानों के साथ-साथ ई-कॉमर्स और ऑनलाइन गिफ्ट प्लेटफॉर्म भी इस मांग का लाभ उठा रहे हैं।

डिजाइनर राखियों ने बढ़ाया आकर्षण

इस साल बाजार में पारंपरिक सूती और रेशमी राखियों के साथ डिजाइनर और थीम आधारित राखियों की मांग भी देखने को मिल रही है। CAIT के महासचिव और भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल के मुताबिक, इस बार कई ऐसी राखियां बाजार में आई हैं, जिनके डिजाइन देश की उपलब्धियों और आत्मनिर्भरता से जुड़े विचारों से प्रेरित हैं।

इनमें ‘विकसित भारत राखी’, ‘आत्मनिर्भर भारत राखी’, ‘वोकल फॉर लोकल राखी’, ‘भारत गौरव राखी’, ‘राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी’ और ‘नारी वंदन राखी’ जैसी थीम शामिल हैं। इसके अलावा कुछ राखियों को लोकप्रिय राष्ट्रीय अभियानों और समकालीन घटनाक्रमों से जोड़कर भी तैयार किया गया है। इस तरह की थीम वाली राखियां खास तौर पर उन ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं, जो पारंपरिक त्योहार के साथ आधुनिक डिजाइन और विशेष संदेश भी पसंद करते हैं।

देश के अलग-अलग हिस्सों की स्वदेशी राखियों की मांग

रक्षा बंधन के बाजार में क्षेत्रीय हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पाद भी अपनी पहचान बना रहे हैं। अलग-अलग राज्यों और शहरों की पारंपरिक कला से जुड़ी राखियां इस साल ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं। बाजार में नागपुर की खादी राखी, जयपुर की सांगानेरी कला राखी, पुणे की सीड राखी, असम की चाय पत्ती राखी, कोलकाता की जूट राखी, मुंबई की सिल्क राखी और बिहार की मधुबनी राखी जैसी वैरायटी उपलब्ध हैं। 

बेंगलुरु की पुष्प राखियों समेत कई अन्य स्थानीय उत्पाद भी ग्राहकों के बीच लोकप्रिय बताए जा रहे हैं। सीड राखियों को लेकर खास दिलचस्पी देखी जा रही है, क्योंकि इन्हें पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के तौर पर पेश किया जाता है। इसी तरह खादी और हस्तनिर्मित राखियां भी स्थानीय कारीगरों और छोटे कारोबारियों के लिए नए अवसर पैदा कर रही हैं।

राखी के साथ गिफ्ट और मिठाई बाजार को भी फायदा

रक्षा बंधन का आर्थिक असर सिर्फ राखियों की बिक्री तक सीमित नहीं रहता। बहन और भाई एक-दूसरे को कपड़े, घड़ियां, इलेक्ट्रॉनिक सामान, परफ्यूम, ज्वेलरी, चॉकलेट और अन्य उपहार भी देते हैं। इसके अलावा मिठाई की दुकानों, फूल विक्रेताओं, पैकेजिंग कारोबार और डिलीवरी सेवाओं में भी मांग बढ़ती है।

व्यापारिक संगठनों का मानना है कि त्योहार के दौरान होने वाली यह खरीदारी छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े रिटेल ब्रांडों तक को कारोबार का अतिरिक्त अवसर देती है।

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