EPF और EPS की wage limit ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 करने के बाद पेंशन गणना को लेकर सवाल बढ़े हैं। जानिए ₹28,000 पेंशन योग्य वेतन और 10 साल की सेवा पर मासिक पेंशन का हिसाब।
EPS Calculation: EPFO की पेंशन योजना में रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली राशि की गणना पेंशन योग्य वेतन और सेवा अवधि के आधार पर होती है। ₹28,000 की पेंशन योग्य सैलरी और 10 साल की पेंशन योग्य सेवा को उदाहरण मानकर फॉर्मूले से मासिक पेंशन की गणना समझी जा सकती है। साथ ही, कंपनी के योगदान का EPS और EPF के बीच बंटवारा भी अहम है।
EPS Pension का फॉर्मूला क्या है?
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO की Employee Pension Scheme (EPS) नौकरीपेशा लोगों के लिए रिटायरमेंट के बाद नियमित आय का एक जरिया है। EPS के तहत पेंशन की राशि तय करने के लिए पेंशन योग्य वेतन और पेंशन योग्य सेवा अवधि को ध्यान में रखा जाता है।

EPFO के अनुसार मासिक पेंशन निकालने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला फॉर्मूला है: मासिक पेंशन = (पेंशनेबल सैलरी × पेंशन योग्य सेवा) ÷ 70।
यहां पेंशनेबल सैलरी का मतलब आखिरी 60 महीनों के औसत वेतन से है। वहीं, पेंशन योग्य सेवा से आशय EPS में योगदान वाली कुल सेवा अवधि से है।
₹28,000 Salary पर 10 साल की नौकरी का हिसाब
अब इसे ₹28,000 की पेंशन योग्य सैलरी और 10 साल की नौकरी के उदाहरण से समझते हैं। अगर कर्मचारी की पेंशन योग्य सैलरी ₹28,000 है और EPS में योगदान वास्तविक सैलरी पर हो रहा है, तो दिए गए फॉर्मूले के अनुसार गणना इस तरह होगी।
मासिक पेंशन = (₹28,000 × 10) ÷ 70 = ₹4,000।
यानी दिए गए उदाहरण के अनुसार 10 साल की पेंशन योग्य सेवा और ₹28,000 की पेंशन योग्य सैलरी पर अनुमानित मासिक पेंशन ₹4,000 होगी। यह गणना EPS के बताए गए फॉर्मूले पर आधारित है। वास्तविक पेंशन राशि कर्मचारी की पात्रता, पेंशन योग्य सेवा और लागू नियमों के अनुसार तय होगी।
EPF में Employee और Employer Contribution
EPF व्यवस्था में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों की ओर से योगदान किया जाता है। कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 12 प्रतिशत हिस्सा PF में जाता है और कंपनी की ओर से भी 12 प्रतिशत योगदान किया जाता है।
हालांकि, कंपनी के पूरे 12 प्रतिशत योगदान को सीधे EPF खाते में नहीं डाला जाता। इसके एक हिस्से को EPS के लिए निर्धारित किया जाता है, जबकि बाकी राशि EPF खाते में जाती है।
पुरानी ₹15,000 की वेतन सीमा के आधार पर कंपनी के योगदान का 8.33 प्रतिशत यानी अधिकतम ₹1,250 प्रति माह EPS में जाता था। नई ₹25,000 की सीमा पर 8.33 प्रतिशत के हिसाब से अधिकतम करीब ₹2,088 प्रति माह EPS फंड में जा सकता है। कंपनी के योगदान का शेष 3.67 प्रतिशत EPF खाते में जाता है।
Wage Limit बढ़ने का क्या असर होगा?
केंद्रीय कैबिनेट के EPF/EPS wage limit को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 करने के फैसले से उन कर्मचारियों के लिए पेंशन योगदान का आधार बढ़ सकता है, जो नई सीमा के दायरे में आते हैं। इससे EPS के तहत पेंशन संबंधी गणना में बदलाव की संभावना बनती है।
हालांकि, सिर्फ वेतन सीमा बढ़ने से हर कर्मचारी की पेंशन अपने आप एक समान नहीं बढ़ेगी। पेंशन की राशि सेवा अवधि, पेंशन योग्य वेतन और EPS में लागू योगदान व्यवस्था जैसे कारकों पर निर्भर करती है।
इसलिए ₹28,000 की सैलरी वाले कर्मचारी के मामले में ऊपर दी गई ₹4,000 की राशि एक गणितीय उदाहरण है। व्यक्तिगत पेंशन का अंतिम निर्धारण EPFO के लागू नियमों और संबंधित कर्मचारी के रिकॉर्ड के आधार पर होगा।












