चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में भारतीय बाजार में रही तेजी ने दूसरी छमाही यानी अक्टूबर से मार्च के दौरान आईपीओ बाजार के लिए भी मजबूत माहौल तैयार किया है। प्राइम डाटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक, 25 सितंबर तक करीब 145 कंपनियों को सेबी से आईपीओ लाने की मंजूरी मिल चुकी है।
बिजनेस न्यूज़: भारतीय IPO बाजार के लिए वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही काफी सक्रिय रह सकती है। अप्रैल से सितंबर के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद प्राथमिक बाजार में कंपनियों की दिलचस्पी बनी हुई है। प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक, 25 सितंबर तक करीब 145 कंपनियों को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) से IPO लाने की मंजूरी मिल चुकी थी। इन प्रस्तावित इश्यू का अनुमानित कुल आकार करीब 2.75 लाख करोड़ रुपये है।
हालांकि, मंजूरी मिलने वाली सभी कंपनियां तत्काल बाजार में उतरें, यह जरूरी नहीं है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस पूरी पाइपलाइन में से करीब 1 लाख करोड़ से 1.2 लाख करोड़ रुपये के IPO ही वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में लॉन्च हो सकते हैं। यानी मंजूर इश्यू के अनुमानित आकार का करीब 35-45 फीसदी हिस्सा ही वास्तविक रूप से बाजार में आ सकता है।
बड़े नामों से IPO बाजार में बढ़ेगी चर्चा
आगामी महीनों में कई बड़ी कंपनियां सार्वजनिक निर्गम की तैयारी में हैं। प्रस्तावित IPO की सूची में जियो प्लेटफॉर्म्स, अवाडा इलेक्ट्रो, ओयो और जेप्टो जैसे चर्चित नाम शामिल हैं। इनमें जियो प्लेटफॉर्म्स के संभावित इश्यू का आकार करीब 35,000 करोड़ रुपये बताया गया है। इसके अलावा अवाडा इलेक्ट्रो करीब 7,600 करोड़ रुपये, ओवेरावल स्टेज यानी ओयो करीब 6,650 करोड़ रुपये और क्विक-कॉमर्स कंपनी जेप्टो करीब 5,106 करोड़ रुपये का IPO ला सकती है। क्रेडिला फाइनेंशियल सर्विसेज और डोर्फ-कैटल केमिकल्स के प्रस्तावित इश्यू का आकार करीब 5,000-5,000 करोड़ रुपये आंका गया है।
- जियो प्लेटफॉर्म्स - 35,000 करोड़ रुपये
- अवाडा इलेक्ट्रो - 7,600 करोड़ रुपये
- ओयो - 6,650 करोड़ रुपये
- जेप्टो - 5,106 करोड़ रुपये
- क्रेडिला फाइनेंशियल सर्विसेज - 5,000 करोड़ रुपये
पहली छमाही में रही मिली-जुली तस्वीर

वित्त वर्ष की पहली छमाही में IPO बाजार की शुरुआत अपेक्षाकृत धीमी रही। प्राइम डेटाबेस के अनुसार, अप्रैल से अगस्त के बीच कंपनियों ने IPO के माध्यम से करीब 46,453 करोड़ रुपये जुटाए। यह 2025 की समान अवधि में जुटाए गए 55,338 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 16 फीसदी कम था। हालांकि, सितंबर आते-आते प्राथमिक बाजार में गतिविधियां काफी तेज हो गईं।
सितंबर में करीब 31 कंपनियों ने IPO लॉन्च किए और इन निर्गमों के जरिए लगभग 39,214 करोड़ रुपये जुटाए गए। इस दौरान NSE का IPO खास आकर्षण रहा। करीब 22,560 करोड़ रुपये का यह इश्यू देश के सबसे बड़े IPO में शामिल रहा और प्राथमिक बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी को फिर से सामने लाया।
त्योहारी सीजन से मिल सकता है सपोर्ट
वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में त्योहारी सीजन और बड़े प्रस्तावित IPO बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक हो सकते हैं। अगर कंपनियां बाजार की परिस्थितियों को अनुकूल पाती हैं, तो कई प्रस्तावित निर्गम लॉन्च हो सकते हैं। इससे निवेशकों के सामने अलग-अलग सेक्टर और कंपनियों में निवेश के नए विकल्प खुलेंगे।हालांकि, IPO की सफलता केवल इश्यू के आकार पर निर्भर नहीं करती। कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार की संभावनाएं, वैल्यूएशन, सेक्टर का माहौल और बाजार की स्थिति जैसे कई पहलू निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।











