यूक्रेन के पूर्व रक्षा मंत्री मायखाइलो फेडोरोव ने रूस के साथ जारी युद्ध के बीच राष्ट्रपति चुनाव कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को रूस के हाथों बंधक नहीं बनाया जा सकता। यूक्रेन में मार्शल लॉ के कारण चुनाव फिलहाल निलंबित हैं।
कीव: यूक्रेन के पूर्व रक्षा मंत्री मायखाइलो फेडोरोव ने देश में युद्ध के बीच राष्ट्रपति चुनाव कराने की मांग उठाई है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस के साथ फरवरी 2022 से जारी युद्ध के कारण यूक्रेन में मार्शल लॉ लागू है और चुनाव स्थगित हैं। फेडोरोव की मांग को राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के नेतृत्व के लिए युद्ध शुरू होने के बाद की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौतियों में से एक माना जा रहा है।
फेडोरोव ने मंगलवार को यूट्यूब पर जारी एक वीडियो में कहा कि लोकतंत्र को रूस के हाथों बंधक नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने तर्क दिया कि यूक्रेन जिस संघर्ष का सामना कर रहा है, उसका एक प्रमुख उद्देश्य देश की स्वतंत्रता और उसके यूरोपीय लोकतांत्रिक भविष्य की रक्षा करना है।
युद्ध के बीच चुनाव कराने की मांग
मायखाइलो फेडोरोव ने अपने वीडियो में राष्ट्रपति जेलेंस्की का सीधे नाम नहीं लिया, लेकिन उनका संदेश स्पष्ट रूप से देश की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा था। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को ऐसा कानूनी, सुरक्षित और व्यावहारिक तंत्र तैयार करना चाहिए, जिससे लंबे समय तक युद्ध जारी रहने की स्थिति में भी पूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल की जा सके।
रूस के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद यूक्रेन में मार्शल लॉ लागू है। इसके तहत सामान्य चुनावी प्रक्रिया को निलंबित किया गया है। युद्ध की परिस्थितियों में मतदान कराने को लेकर सुरक्षा, विस्थापित नागरिकों की भागीदारी और चुनावी बुनियादी ढांचे से जुड़े कई सवाल सामने आते हैं।
फेडोरोव का ताजा बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह हाल तक जेलेंस्की सरकार में रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। ऐसे में उनकी ओर से युद्ध के बीच चुनाव की मांग सरकार के भीतर और बाहर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर चल रही बहस को तेज कर सकती है।
जुलाई में रक्षा मंत्री पद से हटाए गए थे फेडोरोव
35 वर्षीय फेडोरोव को जुलाई के अंत में रक्षा मंत्री के पद से अचानक हटा दिया गया था। उन्होंने इस पद पर केवल करीब छह महीने काम किया था। उनके कार्यकाल के दौरान रक्षा मंत्रालय में तकनीक, डेटा और ड्रोन आधारित युद्ध क्षमता को बढ़ाने पर जोर दिया गया।
फेडोरोव को मंत्रालय में कामकाज को अधिक आधुनिक बनाने और भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रयासों को आगे बढ़ाने का श्रेय भी दिया गया। हालांकि, उनके कार्यकाल के दौरान सैन्य नेतृत्व के साथ तनाव की खबरें भी सामने आईं।
उनकी बर्खास्तगी के बाद यूक्रेन के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए थे। बाद में सेना के कमांडर-इन-चीफ ओलेक्सांद्र सिरस्की को भी बदला गया। फेडोरोव को सरकार में अन्य पदों की पेशकश किए जाने की जानकारी सामने आई, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर केवल रक्षा मंत्री के रूप में लौटने की इच्छा जताई।
शासन व्यवस्था में संकट का दावा
अपने वीडियो संदेश में फेडोरोव ने यूक्रेन में शासन व्यवस्था से जुड़े एक व्यापक संकट की बात कही। उन्होंने कहा कि देश बदलाव से डर रहा है और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं युद्ध के प्रयासों को नुकसान पहुंचा रही हैं।
उनका कहना था कि लंबे समय तक चलने वाले युद्ध के दौरान लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने चुनाव कराने के लिए तत्काल किसी निश्चित तारीख का प्रस्ताव नहीं दिया, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जिससे युद्ध की परिस्थितियों में भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को दोबारा शुरू किया जा सके।
फेडोरोव ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर भी कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की। उन्होंने यह संकेत नहीं दिया कि वह खुद राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ना चाहते हैं या किसी राजनीतिक अभियान का हिस्सा बनने जा रहे हैं।
जेलेंस्की की ओर से अभी प्रतिक्रिया नहीं
फेडोरोव के बयान पर राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की ओर से तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दोनों के बीच संबंधों और रक्षा मंत्रालय से फेडोरोव की विदाई को लेकर पहले से ही राजनीतिक चर्चाएं होती रही हैं।
फेडोरोव की बर्खास्तगी के बाद सरकार में उनकी भूमिका को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई गई थीं। अब युद्ध के दौरान चुनाव कराने की उनकी मांग ने उन्हें एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
यूक्रेन के लिए चुनाव कराना केवल राजनीतिक निर्णय नहीं है, बल्कि इसके साथ सुरक्षा और प्रशासन से जुड़े गंभीर सवाल भी जुड़े हैं। देश के कई हिस्से युद्ध से प्रभावित हैं, लाखों नागरिक विस्थापित हो चुके हैं और कुछ क्षेत्र रूसी नियंत्रण में हैं। ऐसी स्थिति में स्वतंत्र और सुरक्षित मतदान कराना एक बड़ी चुनौती हो सकती है।
फेडोरोव का तकनीकी और ड्रोन युद्ध में योगदान
फेडोरोव यूक्रेन की डिजिटल और तकनीकी युद्ध रणनीति से जुड़े प्रमुख चेहरों में रहे हैं। वह पहले डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन मंत्री के रूप में काम कर चुके हैं। रूस के पूर्ण पैमाने पर हमले के शुरुआती दौर में उन्होंने स्वयंसेवी आईटी नेटवर्क को संगठित करने में भूमिका निभाई।
उन्होंने यूक्रेन की ड्रोन क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर फंड जुटाने के अभियान को भी आगे बढ़ाया। इसके अलावा उन्होंने युद्ध में डेटा और तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया और सैन्य इकाइयों के प्रदर्शन को बेहतर तरीके से मापने के लिए डिजिटल प्रणालियों का इस्तेमाल किया।
रक्षा मंत्री के तौर पर भी ड्रोन, हाई-टेक युद्ध प्रणाली और आधुनिक सैन्य खरीद उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहे। उन्होंने अंतरिक्ष तकनीक और सैटेलाइट संचार के युद्ध में इस्तेमाल को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुद्दे उठाए थे।
एलन मस्क और स्टारलिंक को लेकर भी चर्चा में रहे
रक्षा मंत्री के कार्यकाल के दौरान फेडोरोव ने स्पेसएक्स के संस्थापक एलन मस्क से रूस द्वारा स्टारलिंक सैटेलाइट नेटवर्क के संभावित सैन्य इस्तेमाल को रोकने का आग्रह किया था।

यूक्रेन के युद्ध प्रयासों में स्टारलिंक की भूमिका महत्वपूर्ण रही है, क्योंकि सैटेलाइट इंटरनेट ने युद्ध के दौरान संचार व्यवस्था को बनाए रखने में मदद की। तकनीक और सैन्य अभियानों के बीच बढ़ते संबंधों को लेकर फेडोरोव लगातार मुखर रहे।
उनका दृष्टिकोण यह रहा है कि यूक्रेन पारंपरिक सैन्य क्षमता के साथ-साथ तकनीक, ड्रोन, डेटा और नवाचार के जरिए रूस के मुकाबले अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।
फेडोरोव की बर्खास्तगी के बाद नई नियुक्ति
फेडोरोव को रक्षा मंत्री पद से हटाए जाने के बाद जेलेंस्की ने येवगेनी खमारा को कार्यवाहक रक्षा मंत्री नियुक्त किया। खमारा लंबे समय से खुफिया क्षेत्र से जुड़े अधिकारी रहे हैं और उनकी सार्वजनिक राजनीतिक प्रोफाइल अपेक्षाकृत कम रही है।
फेडोरोव को सरकार में उप प्रधानमंत्री या सैन्य नवाचार से जुड़े पद की पेशकश किए जाने की खबरें भी सामने आईं। हालांकि, उन्होंने रक्षा मंत्री के पद पर वापसी को प्राथमिकता देने की बात कही थी।
उनकी ताजा राजनीतिक पहल से यह संकेत जरूर मिलता है कि रक्षा मंत्रालय से हटने के बाद भी वह यूक्रेन की शासन व्यवस्था और युद्ध नीति से जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखने वाले महत्वपूर्ण नेता बने रह सकते हैं।
युद्ध, लोकतंत्र और चुनाव के बीच कठिन संतुलन
यूक्रेन के सामने इस समय सबसे कठिन सवालों में से एक यह है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। युद्ध के दौरान चुनाव कराने के लिए मतदाताओं की सुरक्षा, मतदान केंद्रों की उपलब्धता, सैनिकों और विदेशों में रह रहे नागरिकों की भागीदारी तथा विस्थापित लोगों के मतदान अधिकार जैसे मुद्दों का समाधान जरूरी होगा।
दूसरी ओर, लंबे समय तक चुनाव न होने से राजनीतिक जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। फेडोरोव ने इसी चुनौती की ओर संकेत करते हुए कहा है कि लोकतंत्र को युद्ध के कारण स्थायी रूप से निलंबित नहीं किया जाना चाहिए।
हालांकि, चुनाव की प्रक्रिया कब और किन परिस्थितियों में शुरू होगी, यह यूक्रेन की सुरक्षा स्थिति और मार्शल लॉ से जुड़े फैसलों पर निर्भर करेगा।
जेलेंस्की सरकार के लिए बढ़ी राजनीतिक चुनौती
फेडोरोव की मांग को केवल चुनावी मुद्दे के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि यह जेलेंस्की सरकार की शासन शैली और युद्धकालीन प्रशासन पर व्यापक बहस को भी जन्म दे सकती है। पूर्व रक्षा मंत्री का यह कहना कि देश शासन व्यवस्था के संकट का सामना कर रहा है, सरकार के लिए राजनीतिक रूप से असहज सवाल खड़े करता है।
फिलहाल फेडोरोव ने अपनी अगली राजनीतिक भूमिका स्पष्ट नहीं की है। उन्होंने अपने वीडियो में व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा के बजाय लोकतांत्रिक प्रक्रिया को केंद्र में रखा।
अब निगाहें इस बात पर होंगी कि जेलेंस्की सरकार इस मांग पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या यूक्रेन युद्ध की परिस्थितियों के बीच चुनावी प्रक्रिया को फिर से शुरू करने के लिए कोई व्यावहारिक योजना सामने लाता है।











