CWG 2026: अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने जूडो में रचा इतिहास, भारत को मिले दो स्वर्ण पदक

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने जूडो में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीते। दोनों खिलाड़ियों की ऐतिहासिक जीत से भारत के

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। जूडो प्रतियोगिता में भारत की अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने स्वर्ण पदक जीतकर देश के खेल इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है।

स्पोर्ट्स न्यूज़: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। जूडो प्रतियोगिता में भारत की अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने स्वर्ण पदक जीतकर देश के खेल इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। दोनों खिलाड़ियों ने अपने-अपने वर्ग में गोल्ड मेडल हासिल कर वह उपलब्धि हासिल की, जिसका भारतीय जूडो लंबे समय से इंतजार कर रहा था।

इन जीतों के साथ भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पहली बार जूडो में स्वर्ण पदक हासिल किया। खास बात यह है कि भारत ने पहली बार 1934 में कॉमनवेल्थ खेलों में भाग लिया था और तब से अब तक जूडो में कोई भारतीय खिलाड़ी गोल्ड मेडल नहीं जीत सका था। लगभग 92 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने इस रिकॉर्ड को बदलते हुए भारतीय खेल प्रेमियों को जश्न मनाने का मौका दिया।

अस्मिता डे ने महिला 48 किलोग्राम वर्ग में जीता स्वर्ण

महिला 48 किलोग्राम वर्ग के फाइनल मुकाबले में अस्मिता डे का सामना कनाडा की अनुभवी जूडोका हाइडी क्वाच से हुआ। दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला बेहद कड़ा और रोमांचक रहा। निर्धारित समय तक कोई भी खिलाड़ी निर्णायक बढ़त हासिल नहीं कर सकी, जिसके बाद मुकाबला एक्स्ट्रा टाइम में पहुंच गया।जूडो के नियमों के अनुसार एक्स्ट्रा टाइम में पहला अंक हासिल करने वाला खिलाड़ी विजेता घोषित किया जाता है। 

अस्मिता ने दबाव भरे क्षणों में शानदार संयम दिखाया और निर्णायक अंक हासिल कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। उनकी इस जीत ने न केवल भारत को ऐतिहासिक सफलता दिलाई, बल्कि उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का पहला भारतीय स्वर्ण पदक विजेता भी बना दिया। अस्मिता की सफलता भारतीय महिला जूडो के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। 

हर्ष सिंह बने जूडो में भारत के पहले पुरुष स्वर्ण पदक विजेता

पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में हर्ष सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज को फाइनल में 10-0 के बड़े अंतर से हराया। मुकाबले के दौरान हर्ष पूरी तरह हावी नजर आए और उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। इस प्रभावशाली जीत के साथ हर्ष सिंह कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पहले पुरुष खिलाड़ी बन गए। उनकी तकनीक, आक्रामक रणनीति और आत्मविश्वास ने उन्हें पूरे टूर्नामेंट में सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल रखा।

हर्ष की यह उपलब्धि भारतीय जूडो के विकास का संकेत भी मानी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने इस खेल में बेहतर प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय अनुभव पर जोर दिया है, जिसका परिणाम अब बड़े मंचों पर दिखाई देने लगा है।

पदक तालिका में भारत की स्थिति मजबूत

अस्मिता डे और हर्ष सिंह के स्वर्ण पदकों ने भारत की पदक तालिका में स्थिति को और मजबूत किया है। इन जीतों के बाद भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत अब तक 5 स्वर्ण, 10 रजत और 4 कांस्य पदक जीत चुका है। कुल पदकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी के साथ भारतीय दल शीर्ष देशों की चुनौती को भी मजबूत कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी दिनों में भारत की पदक संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि कई भारतीय खिलाड़ी अपने-अपने मुकाबलों में मजबूत दावेदार बने हुए हैं।

यामिनी मौर्य से भी स्वर्ण की उम्मीद

भारतीय जूडो दल की सफलता यहीं नहीं रुकी है। महिला 57 किलोग्राम वर्ग में यामिनी मौर्य भी फाइनल में पहुंच चुकी हैं। उनका मुकाबला इंग्लैंड की एसिला टोपराक से होना है। यामिनी के प्रदर्शन पर भी भारतीय खेल प्रेमियों की नजरें टिकी हुई हैं। यदि वह स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहती हैं, तो जूडो में भारत का यह अभियान और भी ऐतिहासिक बन सकता है।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में अस्मिता डे और हर्ष सिंह की ऐतिहासिक जीत केवल दो स्वर्ण पदकों तक सीमित नहीं है। यह भारतीय जूडो के लिए एक नए दौर की शुरुआत का संकेत है। वर्षों से अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ी सफलता की तलाश कर रहे भारतीय जूडो को अब वह पहचान मिलती दिखाई दे रही है जिसकी उसे लंबे समय से जरूरत थी।

Leave a comment