भारत-लेसोथो संबंधों को मिली नई मजबूती, जानें अफ्रीका के इस अनोखे पर्वतीय देश की खासियत

भारत और लेसोथो ने द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा देने पर सहमति जताई है। जानिए अफ्रीका के अनोखे पर्वतीय देश लेसोथो की भौगोलिक विशेषताएं, भारत से उसके संबंध और

भारत और लेसोथो ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए विकास साझेदारी, क्षमता निर्माण, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) तथा संयुक्त राष्ट्र समेत विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

नई दिल्ली: भारत और अफ्रीकी देश लेसोथो ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। दोनों देशों ने विकास साझेदारी, क्षमता निर्माण, कृषि, शिक्षा, मानवीय सहायता, आपदा राहत और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। नई दिल्ली में आयोजित संयुक्त द्विपक्षीय सहयोग आयोग (Joint Bilateral Cooperation Commission-JBCC) की छठी बैठक में दोनों पक्षों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसरों पर विस्तार से चर्चा की।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अफ्रीकी देशों के बीच बढ़ता सहयोग न केवल आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि वैश्विक दक्षिण (Global South) की साझेदारी को भी नई मजबूती प्रदान करता है। लेसोथो के साथ भारत की यह पहल अफ्रीका में अपनी विकास-आधारित कूटनीति को और आगे बढ़ाने का संकेत है।

नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक

विदेश मंत्रालय के अनुसार, 30 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित JBCC की छठी बैठक की संयुक्त अध्यक्षता भारत की ओर से विदेश मंत्रालय के पूर्वी एवं दक्षिणी अफ्रीका प्रभाग के संयुक्त सचिव जनेश काइन और लेसोथो की ओर से विदेश एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध मंत्रालय के प्रधान सचिव थाबांग लेखेला ने की।बैठक के दौरान दोनों देशों ने अपने लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक संबंधों की समीक्षा की और सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति का आकलन किया। 

दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि विकास से जुड़े मुद्दों पर साझेदारी को और व्यापक बनाया जाएगा तथा संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आपसी समन्वय को मजबूत किया जाएगा।

विकास साझेदारी और क्षमता निर्माण पर फोकस

भारत और लेसोथो ने विशेष रूप से क्षमता निर्माण, तकनीकी सहयोग, शिक्षा, कृषि विकास और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। दोनों देशों का मानना है कि कौशल विकास और संस्थागत क्षमता निर्माण के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिल सकती है। मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। 

बदलते जलवायु परिदृश्य और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए दोनों देशों ने इस क्षेत्र में अनुभव और संसाधनों के आदान-प्रदान की आवश्यकता पर बल दिया।

कई समझौतों को अंतिम रूप देने की तैयारी

बैठक में व्यापार, शिक्षा, कृषि, पर्यटन और खाद्य सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। दोनों पक्षों ने कई प्रस्तावित समझौता ज्ञापनों (MoUs) को आगे बढ़ाने और उन्हें जल्द अंतिम रूप देने पर सहमति व्यक्त की। इन समझौतों के माध्यम से दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, निवेश, ज्ञान साझाकरण और तकनीकी सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों का मानना है कि इससे व्यापारिक अवसरों का विस्तार होगा और लोगों के बीच संपर्क भी मजबूत होगा।

भारत ने ISA और CDRI से जुड़ने का दिया निमंत्रण

बैठक के दौरान भारत ने लेसोथो को इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) और कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) का सदस्य बनने का निमंत्रण दिया। ISA का उद्देश्य सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा समाधान उपलब्ध कराना है, जबकि CDRI आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे के विकास पर केंद्रित वैश्विक पहल है। भारत का मानना है कि इन मंचों से जुड़कर लेसोथो नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु अनुकूल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण लाभ प्राप्त कर सकता है।

बैठक के अंत में यह भी तय किया गया कि JBCC की सातवीं बैठक लेसोथो की राजधानी मासेरू में आयोजित की जाएगी। इसकी तिथि दोनों देशों के बीच आपसी सहमति से निर्धारित की जाएगी।

क्या है लेसोथो की खासियत?

लेसोथो दक्षिणी अफ्रीका में स्थित एक छोटा लेकिन भौगोलिक रूप से बेहद अनोखा देश है। यह पूरी तरह से दक्षिण अफ्रीका से घिरा हुआ है, जिसके कारण इसे दुनिया के कुछ चुनिंदा एनक्लेव देशों में गिना जाता है। देश की एक और विशेषता इसकी ऊंचाई है। लेसोथो का पूरा भूभाग समुद्र तल से लगभग 1,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित है। इसी वजह से इसे अक्सर “किंगडम इन द स्काई” यानी “आसमान में बसा साम्राज्य” कहा जाता है।

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