दतिया में मिला झांसी राज का दुर्लभ बैज, 50 रुपये की खरीद निकली ऐतिहासिक धरोहर

दतिया में पुजारी के घर से झांसी राज्य का दुर्लभ पीतल बैज और महारानी विक्टोरिया का ऐतिहासिक चित्र मिला। 50 रुपये में खरीदा बैज अब महत्वपूर्ण धरोहर माना जा रहा है।

मध्य प्रदेश के दतिया में एक पुजारी के घर से झांसी साम्राज्य और ब्रिटिश काल से जुड़ी दो दुर्लभ ऐतिहासिक वस्तुएं मिली हैं। इनमें महारानी विक्टोरिया का दुर्लभ चित्र और झांसी राज्य का आधिकारिक पीतल बैज शामिल है, जिन्हें पुरातत्वविद महत्वपूर्ण खोज मान रहे हैं।

दतिया: मध्य प्रदेश के दतिया जिले में इतिहास से जुड़ी एक अनोखी खोज ने पुरातत्व विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। ज्ञान भारतम मिशन के तहत हुए सर्वेक्षण में एक बुजुर्ग पुजारी के घर से झांसी साम्राज्य और ब्रिटिश शासनकाल के दो दुर्लभ अवशेष सामने आए हैं। इनमें एक ऐतिहासिक चित्र और झांसी राज्य का आधिकारिक पीतल बैज शामिल है, जिन्हें महत्वपूर्ण विरासत सामग्री माना जा रहा है।

पुजारी के संग्रह से सामने आई ऐतिहासिक धरोहर

दतिया जिले के 75 वर्षीय पुजारी राधावल्लभ मिश्रा के घर में वर्षों से सुरक्षित रखी गई कुछ पुरानी वस्तुएं अब इतिहास के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रही हैं। ज्ञान भारतम मिशन के तहत जब पुरातत्व विशेषज्ञों की टीम ने उनके संग्रह का निरीक्षण किया, तो उन्हें दो ऐसी वस्तुएं मिलीं जिन्होंने शोधकर्ताओं को भी चौंका दिया।

दतिया में मिला झांसी राज का दुर्लभ बैज, 50 रुपये की खरीद निकली ऐतिहासिक धरोहर

विशेषज्ञों के अनुसार ये अवशेष लगभग डेढ़ से दो शताब्दी पुराने हो सकते हैं और भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण दौर की जानकारी देने में मददगार साबित होंगे। इन खोजों को दस्तावेजीकृत कर आगे के अध्ययन के लिए संरक्षित किया जा रहा है।

महारानी विक्टोरिया और भारतीय शासकों का दुर्लभ चित्र

सर्वेक्षण के दौरान मिली सबसे महत्वपूर्ण वस्तुओं में एक दुर्लभ सामूहिक चित्र है, जिसे ‘विक्टोरिया ग्रुप’ के नाम से जाना जाता है। बताया जा रहा है कि यह चित्र पूना फोटोग्राफिक कंपनी द्वारा तैयार किया गया था और इसमें ब्रिटिश महारानी विक्टोरिया के साथ भारत की कई प्रमुख रियासतों के शासक दिखाई देते हैं।

चित्र में बड़ौदा, मैसूर, इंदौर, ग्वालियर, जयपुर, त्रावणकोर और नागपुर के शासकों के अलावा हैदराबाद के निजाम और उनके प्रधानमंत्री नवाब आसमान जाह भी नजर आते हैं। समय के प्रभाव के कारण चित्र का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका है, जिससे कुछ ऐतिहासिक विवरण अस्पष्ट हो गए हैं।

राधावल्लभ मिश्रा के अनुसार उन्होंने यह चित्र कई दशक पहले एक फोटो फ्रेम बनाने वाली दुकान से प्राप्त किया था, जहां यह लंबे समय से पड़ा हुआ था।

झांसी साम्राज्य का दुर्लभ आधिकारिक बैज

दूसरी महत्वपूर्ण खोज एक अंडाकार पीतल का बैज है, जिसे पुरातत्वविद झांसी राज्य के प्रशासनिक इतिहास से जोड़ रहे हैं। बैज पर ‘चपरास श्री महाराजाधिराज झांसी संवत 1896’ अंकित है, जो वर्ष 1840 ईस्वी के आसपास का संकेत देता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैज झांसी राजमहल के कर्मचारियों या चपरासियों की वर्दी पर लगाया जाता होगा। यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के विवाह से पहले राजा गंगाधर राव के शासनकाल से संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था का प्रमाण मानी जा रही है।

मात्र 50 रुपये में खरीदी थी अनमोल वस्तु

इस खोज का सबसे रोचक पहलू यह है कि राधावल्लभ मिश्रा ने इस दुर्लभ पीतल बैज को करीब 30 वर्ष पहले एक कबाड़ी या पुराने बर्तनों की दुकान से केवल 50 रुपये में खरीदा था। उस समय उन्हें इसकी ऐतिहासिक महत्ता का अंदाजा नहीं था।

आज पुरातत्व विशेषज्ञ इसे अत्यंत महत्वपूर्ण विरासत सामग्री मान रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे अवशेष इतिहास के उन पहलुओं को समझने में मदद करते हैं, जिनका लिखित रिकॉर्ड सीमित उपलब्ध है।

ज्ञान भारतम मिशन से सामने आ रही हैं नई खोजें

पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार ज्ञान भारतम मिशन का उद्देश्य लोगों के घरों और निजी संग्रहों में सुरक्षित ऐतिहासिक वस्तुओं की पहचान और संरक्षण करना है। इस अभियान के तहत कई लोग स्वयं आगे आकर अपने परिवारों में वर्षों से सुरक्षित रखी गई ऐतिहासिक सामग्री की जानकारी दे रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि दतिया में मिली यह खोज न केवल झांसी और बुंदेलखंड के इतिहास को समझने में मदद करेगी, बल्कि ब्रिटिश काल और भारतीय रियासतों के संबंधों पर भी नई जानकारी उपलब्ध करा सकती है। फिलहाल दोनों वस्तुओं का विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है और इन्हें ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में संरक्षित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

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