कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी में हरियाणा को शामिल करने की मांग, संसद में दीपेंद्र हुड्डा का प्रदर्शन

दीपेंद्र हुड्डा ने संसद में कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी में हरियाणा को शामिल करने की मांग उठाई और खिलाड़ियों के योगदान का हवाला दिया।

संसद परिसर में दीपेंद्र सिंह हुड्डा और हरियाणा के कांग्रेस सांसदों ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी में हरियाणा को शामिल करने की मांग उठाई। उन्होंने राज्य के खिलाड़ियों के पदक योगदान का हवाला देते हुए सह-मेजबानी देने की अपील की।

नई दिल्ली: कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी को लेकर हरियाणा कांग्रेस सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया। राज्यसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय खेलों में हरियाणा के खिलाड़ियों का योगदान सबसे अधिक रहा है, इसलिए राज्य को मेजबानी या कम से कम सह-मेजबानी का अवसर मिलना चाहिए।

संसद परिसर में उठी हरियाणा को मेजबानी देने की मांग

कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी को लेकर संसद परिसर में हरियाणा कांग्रेस के सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया। राज्यसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ जयप्रकाश (जेपी), वरुण मुलाना, सतपाल ब्रह्मचारी और कर्मबीर बौद्ध भी प्रदर्शन में शामिल हुए। सांसदों ने केंद्र सरकार से मांग की कि हरियाणा को 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स का मेजबान या कम से कम सह-मेजबान राज्य बनाया जाए।

दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि हरियाणा देश को सबसे अधिक पदक विजेता खिलाड़ी देने वाले राज्यों में शामिल है। उनका तर्क था कि जब अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में राज्य के खिलाड़ी लगातार भारत के लिए सबसे अधिक पदक जीत रहे हैं, तो खेलों की मेजबानी में भी हरियाणा को उचित स्थान मिलना चाहिए।

पदक प्रदर्शन का हवाला देकर रखी मांग

दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को मिले 13 स्वर्ण पदकों में से 7 स्वर्ण पदक हरियाणा के खिलाड़ियों ने जीते। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के 39 स्वर्ण पदकों में से 24 स्वर्ण हरियाणा के खिलाड़ियों के खाते में आए थे।

उनका कहना था कि देश की कुल आबादी में हरियाणा की हिस्सेदारी लगभग दो प्रतिशत है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय खेलों में राज्य के खिलाड़ी भारत के लिए सबसे अधिक पदक जीतते हैं। ऐसे में खिलाड़ियों के योगदान का सम्मान करते हुए हरियाणा को खेल आयोजन का अवसर मिलना चाहिए।

बजट और मेजबानी को लेकर सरकार पर सवाल

प्रदर्शन के दौरान दीपेंद्र हुड्डा ने आरोप लगाया कि खेलो इंडिया जैसी योजनाओं में हरियाणा को अपेक्षाकृत कम बजट मिला, जबकि अन्य राज्यों को अधिक आवंटन किया गया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के हितों को ध्यान में रखते हुए संसाधनों और अवसरों का निष्पक्ष वितरण होना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि संसद के भीतर और बाहर लगातार यह मांग रखी गई थी कि यदि भारत को 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 ओलंपिक की मेजबानी मिलती है तो हरियाणा को आयोजन का हिस्सा बनाया जाए। हालांकि, खेल मंत्रालय की ओर से आयोजन को अहमदाबाद तक सीमित रखने की घोषणा के बाद उनकी मांग स्वीकार नहीं हुई।

सह-मेजबानी की मांग दोहराई

दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि यदि हरियाणा को पूर्ण मेजबानी देना संभव नहीं है, तो कम से कम सह-मेजबान राज्य का दर्जा दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार इससे राज्य के खिलाड़ियों, खेल अधोसंरचना और खेल संस्कृति को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा के खिलाड़ी केवल राज्य नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए पदक जीतते हैं और उनके योगदान के अनुरूप सम्मान मिलना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को आगे भी विभिन्न मंचों पर उठाया जाएगा और हरियाणा को खेल आयोजनों में उचित भागीदारी दिलाने के लिए राजनीतिक और लोकतांत्रिक स्तर पर प्रयास जारी रहेंगे।

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