हम अक्सर दूसरों की सफलता या विशालता को देखकर खुद को छोटा समझने लगते हैं। हम अपनी तुलना दूसरों से करते हैं और दुखी हो जाते हैं। यह कहानी एक छोटे से मिट्टी के दीपक की है जिसे लगता था कि सूरज के सामने उसका कोई वजूद नहीं है, लेकिन वक्त ने उसे उसकी असली कीमत बता दी।
मुख्य कहानी
एक बार शाम के समय, एक घर की मुंडेर पर मिट्टी का एक छोटा सा दीपक जलाया गया। उस समय सूरज डूब रहा था और आसमान में उसकी लालिमा बिखरी हुई थी।
दीपक ने अपनी टिमटिमाती हुई छोटी सी लौ को देखा और फिर सामने चमकते हुए विशाल सूरज को देखा। दीपक का मन उदास हो गया। उसने एक गहरी सांस ली और मन ही मन सोचा, 'कहाँ यह महान सूरज, जिसका प्रकाश पूरी दुनिया को रोशन करता है, जिसकी गर्मी से जीवन चलता है। और कहाँ मैं, एक मिट्टी का तुच्छ सा दीपक। मेरी क्या औकात है? मेरे अंदर तो बस थोड़ा सा तेल है और एक कमजोर सी बाती है जो हवा के एक झोंके से बुझ सकती है। मेरा होना या न होना बराबर ही है।'
दीपक यही सोचकर खुद को बहुत हीन और बेकार महसूस कर रहा था। उसे लगा कि उसके जलने का कोई फायदा नहीं है।
देखते ही देखते सूरज पूरी तरह डूब गया। आसमान की लालिमा खत्म हो गई और चारों तरफ घना अंधेरा छा गया। अब वहां हाथ को हाथ भी दिखाई नहीं दे रहा था। सूरज का वह तेज, जिस पर दीपक को रश्क हो रहा था, अब कहीं नजर नहीं आ रहा था। पूरी दुनिया अंधकार में डूब गई थी।
तभी, उस घने अंधेरे में एक चमत्कार हुआ। उस छोटे से दीपक की लौ, जिसे वह तुच्छ समझ रहा था, उसने अपने आसपास के अंधेरे को चीर दिया। उस अकेले दीपक ने पूरे आँगन और कमरे को रोशन कर दिया। घर के लोग उसी दीपक की रोशनी में अपना काम करने लगे। कोई पढ़ रहा था, तो कोई खाना बना रहा था। सब कह रहे थे, 'कितना प्यारा दीपक है, इसने तो अंधेरा ही भगा दिया।'
उस वक्त दीपक को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसे समझ आया कि सूरज अपनी जगह महान है, वह दिन का राजा है। लेकिन रात के इस घने अंधेरे में, सूरज मदद नहीं कर सकता। यहाँ सिर्फ उसी (दीपक) का महत्व है। अगर वह न होता, तो यह घर अंधेरे में डूबा रहता।
उस रात दीपक पूरे गर्व और स्वाभिमान के साथ जला। उसने अपनी तुलना करना छोड़ दिया क्योंकि अब वह जान गया था कि उसका अपना एक अलग महत्व है।
सीख
यह कहानी हमें सीख देती है कि हमें कभी भी अपनी तुलना दूसरों से करके खुद को कम नहीं आंकना चाहिए। हर व्यक्ति और हर वस्तु का अपना एक खास उद्देश्य और समय होता है। जैसे सूरज दिन में चमकता है, वैसे ही रात के अंधेरे को मिटाने के लिए एक छोटा सा दीपक ही काम आता है। आप छोटे हैं या बड़े, इससे फर्क नहीं पड़ता। फर्क इससे पड़ता है कि आप अपनी जगह पर कितने उपयोगी हैं। इसलिए अपने हुनर पर भरोसा रखें, क्योंकि समय आने पर आप भी चमकेंगे।













