देहरादून में दून यूनिवर्सिटी के छात्रों का बवाल, VIDEO वायरल; कार में तोड़फोड़ और सड़क पर हुड़दंग के आरोप

देहरादून में दून यूनिवर्सिटी के छात्रों पर फ्रेशर्स पार्टी के बाद हुड़दंग, कार में तोड़फोड़ और राहगीरों से अभद्रता के आरोप लगे हैं। VIDEO वायरल है।
देहरादून में दून यूनिवर्सिटी के छात्रों का बवाल, VIDEO वायरल; कार में तोड़फोड़ और सड़क पर हुड़दंग के आरोप
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देहरादून में दून यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों पर फ्रेशर्स पार्टी के बाद सड़क पर हुड़दंग करने, कार में तोड़फोड़ करने और राहगीरों के साथ अभद्रता करने के आरोप लगे हैं। घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं, जिनमें कुछ युवक सड़क पर शर्ट उतारकर घूमते और हंगामा करते नजर आने का दावा किया जा रहा है। मामले की जानकारी सामने आने के बाद विश्वविद्यालय के छात्रों के व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि मामला एक अनौपचारिक फ्रेशर्स पार्टी के बाद का है।

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के अनुसार, पार्टी खत्म होने के बाद कुछ छात्रों का समूह सड़क पर पहुंच गया। आरोप है कि यहां छात्रों ने काफी देर तक हंगामा किया और सार्वजनिक स्थान पर अनुशासनहीनता की। इसी दौरान एक कार को नुकसान पहुंचाए जाने की बात भी सामने आई है। राहगीरों के साथ अभद्र व्यवहार किए जाने के आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। वीडियो सामने आने के बाद लोग सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह के व्यवहार को लेकर नाराजगी जता रहे हैं।

बताया जा रहा है कि छात्रों की ओर से सड़क पर इस तरह का व्यवहार किए जाने के कारण वहां से गुजर रहे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सामान्य तौर पर किसी शैक्षणिक संस्थान में आयोजित फ्रेशर्स कार्यक्रम छात्रों के आपसी परिचय और मनोरंजन के लिए होते हैं, लेकिन यदि कार्यक्रम के बाद छात्र सार्वजनिक स्थान पर पहुंचकर कानून-व्यवस्था या आम लोगों की सुविधा प्रभावित करते हैं तो मामला गंभीर हो जाता है।

वायरल वीडियो में कुछ युवकों को सड़क पर बिना शर्ट के घूमते हुए देखा जाने का दावा किया जा रहा है। इसके अलावा वाहन के साथ तोड़फोड़ और राहगीरों से अभद्रता की बातें भी सामने आई हैं। हालांकि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले सभी लोगों की पहचान और घटना से जुड़ी हर जानकारी की आधिकारिक पुष्टि अभी जरूरी है। केवल सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं है। पुलिस या प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना में कौन-कौन लोग शामिल थे और वास्तविक स्थिति क्या थी।

घटना को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि कथित तौर पर यह सब फ्रेशर्स पार्टी के बाद हुआ। कॉलेज और विश्वविद्यालयों में फ्रेशर्स पार्टी नए विद्यार्थियों के स्वागत का कार्यक्रम होती है। ऐसे आयोजनों में छात्र सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत, नृत्य और अन्य गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। कार्यक्रम परिसर के भीतर आयोजित होने पर संस्थान की अपनी व्यवस्थाएं और अनुशासन के नियम लागू होते हैं। लेकिन कार्यक्रम के बाद सड़क या सार्वजनिक स्थान पर किसी तरह का हुड़दंग आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

देहरादून में पिछले कुछ समय से छात्रों और युवाओं से जुड़े वायरल वीडियो के कई मामले सामने आए हैं। अगस्त में प्रेमनगर क्षेत्र में एक छात्र की कार के अंदर कथित पिटाई का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। उस मामले को रैगिंग से जोड़कर देखा गया था और पुलिस ने शिकायत मिलने की स्थिति में जांच की बात कही थी।

इसी तरह देहरादून में छात्रों से जुड़े अन्य विवादों में भी पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा है। अगस्त में पटेलनगर क्षेत्र में दो छात्र गुटों के बीच विवाद के दौरान फायरिंग की घटना सामने आई थी, जिसमें एक छात्र घायल हुआ था। घटना के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की थी।

इन घटनाओं के बीच दून यूनिवर्सिटी के छात्रों से जुड़े ताजा मामले ने विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले युवाओं के व्यवहार और सार्वजनिक स्थानों पर उनकी जिम्मेदारी को लेकर चर्चा तेज कर दी है। छात्र जीवन में स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी है। किसी कार्यक्रम या पार्टी के दौरान उत्साह में किया गया ऐसा व्यवहार जो दूसरे लोगों के लिए परेशानी या खतरा पैदा करे, वह केवल मनोरंजन नहीं रह जाता।

सार्वजनिक संपत्ति या किसी व्यक्ति के निजी वाहन को नुकसान पहुंचाना भी गंभीर विषय है। यदि जांच में कार में तोड़फोड़ की पुष्टि होती है तो नुकसान के लिए जिम्मेदारी तय की जा सकती है। इसी तरह राहगीरों से अभद्रता या उन्हें परेशान करने की शिकायत सामने आती है तो पुलिस संबंधित धाराओं में कार्रवाई कर सकती है। फिलहाल इन सभी पहलुओं पर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या फ्रेशर्स पार्टी के आयोजन के दौरान पर्याप्त निगरानी की गई थी। किसी भी बड़े छात्र कार्यक्रम में आयोजकों और संस्थान की जिम्मेदारी होती है कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो और छात्रों की गतिविधियां परिसर से बाहर निकलने के बाद भी अनावश्यक परेशानी का कारण न बनें। खासकर ऐसे कार्यक्रमों के बाद छात्र समूहों की आवाजाही और सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी होता है।

दून यूनिवर्सिटी देहरादून का प्रमुख शैक्षणिक संस्थान है और यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से विद्यार्थी पढ़ने आते हैं। विश्वविद्यालय से जुड़े किसी भी छात्र के विवादित व्यवहार का असर केवल संबंधित छात्रों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे संस्थान की छवि पर भी पड़ सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में तथ्यों की निष्पक्ष जांच और दोष साबित होने पर उचित कार्रवाई महत्वपूर्ण होती है।

इस मामले में वायरल वीडियो की भूमिका भी अहम हो सकती है। यदि वीडियो वास्तविक घटना का है और उसका स्थान व समय जांच में प्रमाणित होता है तो पुलिस के लिए घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है। वीडियो से यह भी पता लगाया जा सकता है कि मौके पर कितने लोग मौजूद थे, किस वाहन को नुकसान पहुंचा और विवाद की शुरुआत किस तरह हुई। हालांकि वीडियो को संदर्भ से काटकर देखने के बजाय पूरी घटना की जांच जरूरी होगी।

राहगीरों से कथित अभद्रता का मामला भी गंभीर है, क्योंकि सार्वजनिक सड़क किसी एक व्यक्ति या समूह के लिए नहीं होती। सड़क पर गुजर रहे लोगों को बिना किसी डर या परेशानी के आवागमन का अधिकार है। यदि कोई समूह नशे, उत्साह या किसी अन्य वजह से सड़क पर हंगामा करता है और दूसरों को परेशान करता है तो पुलिस की जिम्मेदारी बनती है कि स्थिति को नियंत्रित करे।

देहरादून पुलिस ने हाल के दिनों में छात्रों और युवाओं से जुड़े कई मामलों में सख्ती दिखाई है। फायरिंग की घटनाओं के बाद पुलिस ने छात्रावासों और पीजी में रहने वाले युवाओं की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने की बात भी कही थी। देर रात अनावश्यक रूप से घूमने वाले छात्रों पर भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।

दून यूनिवर्सिटी के इस मामले में भी अब लोगों की नजर पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया पर है। यदि शिकायत दर्ज होती है तो पुलिस वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर घटना की जांच कर सकती है। विश्वविद्यालय प्रशासन भी अपने स्तर पर छात्रों की पहचान कर अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार कर सकता है। कार्रवाई का स्वरूप जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगा।

फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। इस तरह के मामलों में सबसे जरूरी है कि वीडियो को सनसनी फैलाने के लिए इस्तेमाल करने के बजाय संबंधित एजेंसियों को जांच करने का अवसर दिया जाए। किसी भी छात्र की पहचान या भूमिका की पुष्टि किए बिना उसके बारे में आरोपात्मक टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।

अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह घटना छात्रों के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी एक महत्वपूर्ण सबक होगी। फ्रेशर्स पार्टी या किसी भी छात्र कार्यक्रम का उद्देश्य नए विद्यार्थियों का स्वागत, आपसी मेलजोल और सकारात्मक माहौल बनाना होता है। कार्यक्रम के बाद सड़क पर हुड़दंग, वाहन में तोड़फोड़ या आम लोगों से अभद्रता जैसी गतिविधियां उस उद्देश्य को पूरी तरह बदल देती हैं।

कुल मिलाकर देहरादून में दून यूनिवर्सिटी के छात्रों से जुड़ा यह मामला वायरल वीडियो के कारण चर्चा में है। फ्रेशर्स पार्टी के बाद कथित तौर पर सड़क पर हुड़दंग, कार में तोड़फोड़, शर्ट उतारकर घूमने और राहगीरों से अभद्रता के आरोप सामने आए हैं। अब इस मामले में पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन की जांच से ही स्पष्ट होगा कि वीडियो में दिखाई देने वाले लोग कौन हैं, घटना किन परिस्थितियों में हुई और वास्तव में किस तरह की कार्रवाई की जरूरत है

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