दिल्ली एयरपोर्ट पर यात्री के हैंड बैग से मिली बंदर की खोपड़ी, CISF ने पुलिस को सौंपा

दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर CISF ने यात्री के हैंड बैग से बंदर की कथित खोपड़ी और चांदी डिजाइन वाला लकड़ी का डंडा बरामद किया। यात्री को पुलिस के हवाले किया गया।

दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के दौरान CISF ने एक यात्री के हैंड बैग से बंदर की कथित खोपड़ी बरामद की। यात्री दिल्ली से हैदराबाद जा रहा था। उसके साथ मिला लकड़ी का डंडा भी जांच के लिए पुलिस को सौंपा गया

नई दिल्ली: राष्टीय राजधानी नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (IGI) पर सुरक्षा जांच के दौरान एक यात्री के हैंड बैग से बंदर की कथित खोपड़ी मिलने के बाद हड़कंप मच गया। यात्री दिल्ली से हैदराबाद जाने वाली फ्लाइट में सवार होने की तैयारी कर रहा था। प्री-एम्बार्केशन सिक्योरिटी चेक के दौरान केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों को उसके बैग में संदिग्ध वस्तु नजर आई। विस्तृत जांच में खोपड़ी के साथ चांदी की डिजाइन वाला एक असामान्य लकड़ी का डंडा भी मिला। CISF ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यात्री को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस के हवाले कर दिया। बरामद वस्तु भी जांच एजेंसियों को सौंप दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों के तहत की जा रही है।

सुरक्षा जांच के दौरान सामने आया मामला

घटना उस समय सामने आई जब यात्री को दिल्ली से हैदराबाद जाने वाली फ्लाइट पकड़नी थी। एयरपोर्ट पर यात्रियों के लिए निर्धारित प्री-एम्बार्केशन सिक्योरिटी चेक के दौरान CISF कर्मियों ने उसके हैंड बैगेज की जांच की। जांच के दौरान बैग के अंदर एक ऐसी वस्तु दिखाई दी, जो सामान्य यात्रा सामान का हिस्सा नहीं लग रही थी। सुरक्षा कर्मियों ने बैग को अलग कर उसकी गहन जांच शुरू की। तलाशी के दौरान एक खोपड़ी बरामद हुई।

पूछताछ में यात्री ने सुरक्षा कर्मियों को बताया कि यह बंदर की खोपड़ी है। इसके साथ बैग से एक लकड़ी का डंडा भी बरामद हुआ, जिस पर चांदी जैसी डिजाइन बनी हुई थी। बरामदगी के बाद एयरपोर्ट सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई और आगे की कार्रवाई शुरू की गई।

वन्यजीव से जुड़ी वस्तु होने पर बढ़ी जांच

खोपड़ी के वन्यजीव से संबंधित होने की जानकारी सामने आने के बाद मामले को सामान्य सुरक्षा उल्लंघन के बजाय वन्यजीव संरक्षण से जुड़े मामले के रूप में देखा गया।

अधिकारियों ने मामले में वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है। अब जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि बरामद खोपड़ी वास्तव में किस प्रजाति के बंदर की है और वह यात्री तक कैसे पहुंची। साथ ही, जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यात्री इसे अपने साथ विमान में क्यों ले जा रहा था। इस संबंध में यात्री से पूछताछ की जा रही है।

CISF ने यात्री को पुलिस के हवाले किया

मामले की प्रारंभिक जांच और बरामदगी के बाद CISF ने यात्री को स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया। खोपड़ी सहित बरामद सामग्री भी पुलिस को सौंप दी गई है। अब पुलिस और संबंधित विभाग यह जांच करेंगे कि यात्री ने किसी कानून का उल्लंघन किया है या नहीं। यदि बरामद वस्तु संरक्षित वन्यजीव से संबंधित पाई जाती है, तो उसके स्रोत, कब्जे और परिवहन से जुड़े पहलुओं की भी जांच हो सकती है। मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच पूरी होने और बरामद वस्तु की आधिकारिक पहचान के बाद स्पष्ट होगी।

खोपड़ी कहां से आई, इसकी जांच

इस घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यात्री के पास बंदर की खोपड़ी आई कहां से। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि इसे किसी स्थान से खरीदा गया था, किसी धार्मिक या पारंपरिक उद्देश्य से रखा गया था या फिर इसे किसी अन्य कारण से ले जाया जा रहा था।

इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि यात्री को वन्यजीव से संबंधित ऐसी वस्तु को विमान में ले जाने की अनुमति थी या नहीं। अधिकारियों के लिए बरामदगी का स्रोत पता लगाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वन्यजीवों और उनके अंगों से संबंधित अवैध व्यापार को रोकने के लिए देश में कई कानूनी प्रावधान लागू हैं।

एयरपोर्ट सुरक्षा में CISF की भूमिका

दिल्ली का IGI एयरपोर्ट देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में शामिल है और यहां यात्रियों तथा उनके सामान की सुरक्षा जांच कई स्तरों पर की जाती है। इस घटना में भी नियमित सुरक्षा जांच के दौरान संदिग्ध वस्तु की पहचान हुई। इसके बाद बैग की विस्तृत तलाशी लेकर वस्तु को बरामद किया गया।

CISF देश के प्रमुख हवाई अड्डों की सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एयरपोर्ट पर यात्रियों के सामान की जांच के दौरान संदिग्ध या प्रतिबंधित वस्तु मिलने पर संबंधित एजेंसियों को सूचना देकर आगे की कार्रवाई की जाती है।

वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत कार्रवाई

भारत में वन्यजीवों से जुड़े मामलों के लिए वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 प्रमुख कानूनों में से एक है। किसी संरक्षित वन्यजीव या उसके अंगों से संबंधित वस्तु का कब्जा, परिवहन या व्यापार परिस्थितियों और प्रजाति के आधार पर कानूनी कार्रवाई का विषय बन सकता है।

इस मामले में भी जांच एजेंसियां बरामद खोपड़ी की पहचान और उसके स्रोत की जानकारी जुटा रही हैं। केवल यात्री के बयान के आधार पर इसकी अंतिम कानूनी स्थिति तय नहीं होगी। जांच के दौरान बरामद वस्तु की प्रकृति और संबंधित परिस्थितियों की पुष्टि की जाएगी।

पहले भी एयरपोर्ट पर बरामद हुए हैं जंगली जानवर

एयरपोर्ट पर यात्रियों के सामान से वन्यजीव या विदेशी प्रजातियों के जीव मिलने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। ऐसी घटनाएं सुरक्षा के साथ-साथ वन्यजीव तस्करी और अवैध व्यापार को लेकर भी चिंता पैदा करती हैं।

जून 2026 में मुंबई एयरपोर्ट पर भी एक यात्री के सामान से कई जीवित जंगली और विदेशी जानवर बरामद किए जाने का मामला सामने आया था। रिपोर्ट के अनुसार, बैंकॉक से मुंबई पहुंचे एक यात्री के सामान की जांच के दौरान गिलहरी, अजगर, गिरगिट और इगुआना समेत कई जानवर मिले थे। ऐसे मामलों में एयरपोर्ट सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ वन विभाग और अन्य संबंधित विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

वन्यजीव तस्करी रोकने की चुनौती

वन्यजीवों या उनके अंगों को अवैध रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना संरक्षण एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वन्यजीव तस्करी को जैव विविधता के लिए बड़ा खतरा माना जाता है। जानवरों के जीवित होने के अलावा उनके अंगों, खाल, हड्डियों और अन्य हिस्सों की अवैध खरीद-बिक्री भी कई जगहों पर संरक्षण संबंधी चिंता का विषय रही है।

दिल्ली एयरपोर्ट पर हुई यह बरामदगी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सुरक्षा जांच के दौरान ऐसी वस्तु की पहचान की गई, जिसे यात्री अपने हैंड बैग में लेकर विमान में जाने की कोशिश कर रहा था।

जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी तस्वीर

फिलहाल मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवालों के जवाब जांच के बाद सामने आएंगे। पुलिस और संबंधित वन्यजीव अधिकारी यह पता लगाएंगे कि खोपड़ी किस प्रजाति की है, वह यात्री के पास कैसे पहुंची और उसे विमान से हैदराबाद ले जाने का उद्देश्य क्या था। CISF द्वारा यात्री और बरामद वस्तु को पुलिस के हवाले किए जाने के बाद आगे की कार्रवाई जांच एजेंसियों के स्तर पर होगी।

इस घटना ने एक बार फिर एयरपोर्ट पर कड़ी सुरक्षा जांच की अहमियत को सामने ला दिया है। नियमित चेकिंग के दौरान संदिग्ध वस्तु की पहचान होने से संभावित वन्यजीव संबंधी उल्लंघन की जांच का रास्ता खुला है। मामले में कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

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