UK और खाड़ी देशों में बढ़ा जर्दालू भागलपुरी आम का क्रेज: निर्यात के लिए पटना में बना कार्गो टर्मिनल, किसानों को मिलेगा बड़ा बाजार

भागलपुर के GI टैग वाले जर्दालू आम का UK और मिडिल-ईस्ट में निर्यात बढ़ रहा है। पटना एयरपोर्ट पर कार्गो सुविधा से किसानों को विदेशी बाजार मिलेगा।
UK और खाड़ी देशों में बढ़ा जर्दालू भागलपुरी आम का क्रेज: निर्यात के लिए पटना में बना कार्गो टर्मिनल, किसानों को मिलेगा बड़ा बाजार
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भागलपुर की पहचान बन चुका GI टैग प्राप्त जर्दालू आम अब बिहार की सीमाओं से निकलकर विदेशी बाजारों में अपनी मिठास और खुशबू बिखेर रहा है। इस साल भी भागलपुर के जर्दालू आम को यूके और मिडिल-ईस्ट के देशों में ट्रायल के साथ-साथ कॉमर्शियल शिपमेंट के लिए भेजा गया है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि जर्दालू आम के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। 

भागलपुर के जर्दालू आम को लंबे समय से बिहार के खास कृषि उत्पादों में गिना जाता है। इसकी खास खुशबू, स्वाद और कम रेशे वाली गूदेदार बनावट इसे दूसरी आम की किस्मों से अलग पहचान देती है। भागलपुर और आसपास के इलाकों की मिट्टी और जलवायु इसके उत्पादन के लिए अनुकूल मानी जाती है। जर्दालू को GI टैग मिलने से इसकी क्षेत्रीय पहचान को भी आधिकारिक मान्यता मिली है। 

लोकसभा में भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल के सवाल के जवाब में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि इस साल भी जर्दालू आम को यूके और मिडिल-ईस्ट के बाजारों में भेजा गया है। इसमें ट्रायल शिपमेंट के साथ कॉमर्शियल शिपमेंट भी शामिल है। सरकार के मुताबिक, मौसम की वजह से जर्दालू आम के निर्यात पर किसी बड़े नकारात्मक असर या फसल को हुए बड़े नुकसान की आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। 

विदेशी बाजारों में जर्दालू की बढ़ती मांग भागलपुर के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है। अभी तक स्थानीय और देश के दूसरे हिस्सों में बिकने वाला यह आम अब अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक भी पहुंच रहा है। विदेशी बाजार में मांग बढ़ने पर किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर कीमत मिलने की संभावना बन सकती है।

सरकार की ओर से बताया गया कि खाड़ी देशों में जर्दालू आम के निर्यात के लिए वेपर हीट ट्रीटमेंट या विशेष हॉट वॉटर ट्रीटमेंट अनिवार्य नहीं है। हालांकि निर्यात के लिए संबंधित फाइटोसैनिटरी नियमों का पालन करना जरूरी है। सरकार ने यह भी कहा कि यूरोपीय संघ और खाड़ी देशों में जर्दालू आम में कीटनाशक अवशेष या निर्यात नियमों के उल्लंघन से जुड़ी कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। 

विदेश भेजे जाने वाले आम के लिए गुणवत्ता बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। फल की पैकिंग, ग्रेडिंग, परिवहन और तापमान नियंत्रण जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान देना पड़ता है। आम की गुणवत्ता जितनी बेहतर होगी, विदेशी बाजार में उसकी स्वीकार्यता उतनी ही मजबूत हो सकती है।

इसी दिशा में पटना एयरपोर्ट पर तैयार की गई एयर कार्गो सुविधा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार के अनुसार, पटना एयरपोर्ट पर 21,900 मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता वाला एयर कार्गो टर्मिनल और कोल्ड स्टोरेज सुविधा शुरू की गई है। इससे जर्दालू सहित कृषि उत्पादों को सुरक्षित और तेज तरीके से देश के दूसरे हिस्सों तथा विदेशी बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है। 

पटना में कार्गो सुविधा उपलब्ध होने का सीधा फायदा भागलपुर के आम उत्पादकों और निर्यातकों को मिल सकता है। भागलपुर से आम को पटना तक पहुंचाने के बाद एयर कार्गो के जरिए उसे दूसरे राज्यों या विदेश भेजने की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हो सकती है। इससे लंबी दूरी के परिवहन में लगने वाला समय कम करने और फल की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

जर्दालू आम की सबसे बड़ी चुनौती इसकी ताजगी और गुणवत्ता को बनाए रखना होती है। आम एक नाजुक कृषि उत्पाद है और लंबे समय तक सामान्य परिस्थितियों में रखने पर इसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में कोल्ड स्टोरेज और एयर कार्गो जैसी सुविधाएं निर्यात कारोबार के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

भागलपुर के किसानों को निर्यात बाजार से जोड़ने के लिए एपीडा की वित्तीय सहायता योजनाओं के जरिए भी सहयोग दिए जाने की जानकारी सरकार ने दी है। इसके तहत इंफ्रास्ट्रक्चर, गुणवत्ता सुधार और नए विदेशी बाजारों तक पहुंच बनाने से जुड़ी गतिविधियों में सहायता दी जा रही है। 

विदेशों में जर्दालू आम की पहचान बढ़ाने के लिए प्रचार-प्रसार कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। किसानों को निर्यात की आवश्यकताओं, गुणवत्ता मानकों और उत्पादन से जुड़े पहलुओं के बारे में प्रशिक्षण दिए जाने की भी जानकारी सामने आई है। इससे किसानों को सिर्फ आम उगाने तक सीमित रहने के बजाय वैश्विक बाजार की जरूरतों को समझने में मदद मिल सकती है।

भागलपुर के लिए यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिले की अर्थव्यवस्था में कृषि और बागवानी की बड़ी भूमिका है। जर्दालू आम की अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत होने से आम की मांग बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर पैकिंग, छंटाई, परिवहन और अन्य संबंधित गतिविधियों में भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।

जर्दालू आम की खासियत उसकी खुशबू और स्वाद में छिपी है। पकने के बाद इसका रंग हल्का पीला दिखाई देता है और इसमें विशेष सुगंध होती है। कम रेशा होने के कारण इसे खाने वालों के बीच भी इसकी अलग पहचान है। यही खूबियां इसे प्रीमियम आम की श्रेणी में जगह दिलाने में मदद करती हैं। 

भागलपुर के गंगा किनारे वाले क्षेत्रों की जलोढ़ मिट्टी को भी जर्दालू के लिए अनुकूल माना जाता है। यही स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियां इस आम को उसकी विशिष्ट पहचान देने में भूमिका निभाती हैं। GI टैग इसी क्षेत्रीय विशेषता और पहचान को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

अब जब जर्दालू आम यूके और मिडिल-ईस्ट के बाजारों तक पहुंच रहा है, तो भागलपुर के बागवानों के लिए स्थानीय उत्पादन को वैश्विक मांग से जोड़ने का रास्ता खुल रहा है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थायी जगह बनाने के लिए गुणवत्ता, पैकिंग, समय पर डिलीवरी और निर्यात मानकों का लगातार पालन करना जरूरी होगा।

विदेशी बाजार में किसी फल की मांग बढ़ने के बाद किसानों के सामने उत्पादन बढ़ाने के साथ गुणवत्ता बनाए रखने की चुनौती भी होती है। जर्दालू के मामले में भी यह जरूरी होगा कि बाजार की मांग पूरी करने के दौरान इसकी पारंपरिक गुणवत्ता और स्वाद से समझौता न हो। जर्दालू की असली पहचान उसकी विशिष्ट खुशबू और स्वाद ही है।

निर्यात बढ़ने से किसानों को बाजार के नए विकल्प मिल सकते हैं। अगर विदेशी खरीदारों की मांग लगातार बनी रहती है तो किसान अपने बागानों में बेहतर प्रबंधन, गुणवत्ता वाली पैकिंग और उत्पादन तकनीक पर अधिक निवेश कर सकते हैं। इससे लंबे समय में जर्दालू के पूरे मूल्य-श्रृंखला तंत्र को मजबूती मिल सकती है।

पटना एयरपोर्ट का कार्गो टर्मिनल इस पूरी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है। आम को खेत और बागान से बाजार तक पहुंचाने के बीच जितना कम समय लगेगा, उसकी गुणवत्ता बनाए रखना उतना आसान होगा। खासकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए तेज परिवहन का महत्व और बढ़ जाता है।

सरकार की ओर से निर्यात को बढ़ावा देने के साथ किसानों और निर्यातकों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इससे भागलपुर के जर्दालू आम को केवल बिहार की पहचान के रूप में नहीं बल्कि भारतीय कृषि उत्पाद के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की संभावना मजबूत हो रही है।

इससे स्थानीय किसानों को यह संदेश भी मिलता है कि पारंपरिक कृषि उत्पादों को आधुनिक बाजार व्यवस्था से जोड़कर उनकी आर्थिक क्षमता बढ़ाई जा सकती है। GI टैग जैसे प्रमाणन के साथ अगर बेहतर पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और लॉजिस्टिक्स की सुविधा उपलब्ध हो तो क्षेत्रीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।

भागलपुर के जर्दालू आम का विदेशी बाजार में पहुंचना बिहार के लिए भी गौरव की बात है। एक ओर इससे राज्य के खास कृषि उत्पाद की पहचान विदेशों तक पहुंच रही है, वहीं दूसरी ओर किसानों के लिए नए बाजार और संभावित बेहतर मूल्य का रास्ता खुल रहा है।

कुल मिलाकर, भागलपुर का GI टैग प्राप्त जर्दालू आम इस साल भी यूके और मिडिल-ईस्ट के बाजारों तक पहुंचा है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि निर्यात के लिए पटना एयरपोर्ट पर 21,900 मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता वाला एयर कार्गो टर्मिनल और कोल्ड स्टोरेज सुविधा शुरू की गई है। एपीडा की सहायता, गुणवत्ता सुधार और निर्यात प्रशिक्षण से किसानों व निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिल रही है। जर्दालू की बढ़ती विदेशी मांग भागलपुर के बागवानों के लिए नए बाजार और बेहतर आय की संभावनाएं खोल सकती है।

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