देवरिया की गैंगस्टर कोर्ट ने हृदयानंद यादव की 2.10 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति राज्य सरकार के पक्ष में जब्त करने का आदेश दिया है। अदालत ने माना कि आरोपित ने अपनी वैध आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित कर परिजनों के नाम पर खरीदी थी।
देवरिया: आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में देवरिया की अदालत ने गैंगस्टर हृदयानंद यादव के खिलाफ बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने उसकी 2.10 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को राज्य सरकार के पक्ष में जब्त करने का आदेश दिया है। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संपत्ति को अवैध आय से अर्जित माना।
अदालत ने संपत्ति जब्ती के आदेश को ठहराया सही
देवरिया की गैंगस्टर कोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि हृदयानंद यादव की ओर से अर्जित संपत्ति उसकी घोषित और वैध आय के मुकाबले काफी अधिक है। अपर सत्र न्यायाधीश जगन्नाथ की अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद दो करोड़ 10 लाख 67 हजार रुपये मूल्य की संपत्ति को राज्य सरकार के पक्ष में जब्त करने का आदेश दिया।
अदालत ने यह भी माना कि जिलाधिकारी द्वारा पहले जारी किया गया संपत्ति जब्ती आदेश कानूनी रूप से उचित था। इसके साथ ही आरोपित के परिजनों की ओर से दाखिल आपत्तियों और याचिकाओं को खारिज कर दिया गया।
परिजनों के नाम पर खरीदी गई थी संपत्ति
अभियोजन पक्ष के अनुसार हृदयानंद यादव ने कथित रूप से आपराधिक गतिविधियों से अर्जित धन का उपयोग करते हुए अपनी पत्नी, माता और भाई के नाम पर संपत्तियां खरीदी थीं। जांच में सामने आया कि सलेमपुर क्षेत्र के पिपरा मोहन इलाके में कई अचल संपत्तियां परिजनों के नाम दर्ज थीं।
इसके अलावा दो ट्रक और अन्य वाहन भी परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीदे गए थे। अभियोजन का दावा था कि इन संपत्तियों का वास्तविक नियंत्रण और लाभ आरोपित के पास ही था। अदालत ने इन तथ्यों को रिकॉर्ड में शामिल करते हुए निर्णय सुनाया।
मासिक आय और संपत्ति में बड़ा अंतर
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि हृदयानंद यादव की घोषित मासिक आय लगभग सात हजार रुपये थी। अदालत ने टिप्पणी की कि इतनी सीमित आय के आधार पर करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित करना संभव नहीं माना जा सकता।
न्यायालय ने कहा कि प्रस्तुत साक्ष्य यह दर्शाते हैं कि संपत्तियां वैध आय के स्रोतों से अर्जित नहीं की गई थीं। इसी आधार पर अदालत ने जब्ती की कार्रवाई को उचित ठहराया और राज्य सरकार के पक्ष में आदेश पारित किया।
कई आपराधिक मामलों में वांछित रहा आरोपित
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि हृदयानंद यादव जनपद का हिस्ट्रीशीटर रहा है और उसके खिलाफ विभिन्न थानों में 10 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। उसे कथित तौर पर तार बाबू गैंग का सरगना भी बताया गया।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ दर्ज मामलों के कारण क्षेत्र में लंबे समय तक भय और दहशत का माहौल बना रहा। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक की संस्तुति पर जिलाधिकारी ने वर्ष 2021 में गैंगस्टर कोर्ट में संपत्ति जब्त करने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था, जिस पर अब अदालत ने अंतिम फैसला सुनाया है।
अपराध से अर्जित संपत्ति पर सख्त कार्रवाई
इस फैसले को संगठित अपराध और अवैध संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। अदालत के आदेश के बाद संबंधित चल और अचल संपत्तियां अब राज्य सरकार के नियंत्रण में चली जाएंगी। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई अपराध से अर्जित संपत्ति पर अंकुश लगाने और कानून के शासन को मजबूत करने में मदद करेगी।











