धर्मेंद्र प्रधान के बाद तीन राज्यों में शिक्षा मंत्रियों के इस्तीफे की मांग, पेपर लीक और परीक्षा विवाद पर सियासत तेज

पेपर लीक और परीक्षा विवाद को लेकर सियासत गरमा गई है। धर्मेंद्र प्रधान के बाद अब तीन राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के इस्तीफे की मांग उठ रही है। जानिए पूरा

नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनकी जगह प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है

Education Minister Resignation Demand: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को लेकर हालिया राजनीतिक विवाद के बीच अब तीन राज्यों में भी शिक्षा मंत्रियों के इस्तीफे की मांग उठने लगी है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पंजाब में विपक्षी दलों और राजनीतिक नेताओं ने अलग-अलग परीक्षा विवादों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर संबंधित मंत्रियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

इन राज्यों में उठ रहे राजनीतिक विवादों का संबंध परीक्षा प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक के आरोपों और छात्रों से जुड़ी लंबित योजनाओं से है। हालांकि, संबंधित पक्षों ने इन आरोपों पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं और कुछ नेताओं ने इस्तीफे की मांग को राजनीतिक बयानबाजी करार दिया है।

आंध्र प्रदेश में नारा लोकेश के इस्तीफे की मांग

आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने जिला चयन समिति (DSC) भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य के शिक्षा मंत्री नारा लोकेश से इस्तीफे की मांग की है। जगन मोहन रेड्डी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि यदि किसी परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आते हैं तो संबंधित मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने केंद्रीय स्तर पर शिक्षा मंत्रालय से जुड़े घटनाक्रम का संदर्भ देते हुए आंध्र प्रदेश में भी राजनीतिक जवाबदेही की मांग की।

जगन ने आरोप लगाया कि करीब 3.5 लाख अभ्यर्थियों से जुड़ी DSC परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू से भी सवाल किया कि क्या वह अपने बेटे और शिक्षा मंत्री नारा लोकेश का बचाव करेंगे या राजनीतिक जवाबदेही के सिद्धांत को लागू करेंगे। हालांकि, नारा लोकेश ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया। 

उन्होंने कहा कि नैतिक जिम्मेदारी की बात करने वाले नेताओं का अपना राजनीतिक रिकॉर्ड भी देखा जाना चाहिए। इस तरह आंध्र प्रदेश में परीक्षा विवाद को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ गया है।

तेलंगाना में बीजेपी ने शिक्षा विभाग को लेकर उठाए सवाल

तेलंगाना में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी से शिक्षा विभाग को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की है। तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने आरोप लगाया कि राज्य में विद्यार्थियों की ट्यूशन फीस रीइंबर्समेंट योजना के तहत बड़ी राशि लंबित है। बीजेपी नेता के अनुसार, यदि सरकार करीब 12,000 करोड़ रुपये के कथित लंबित भुगतान को पूरा करने में सक्षम नहीं है, तो मुख्यमंत्री को शिक्षा विभाग अपने पास नहीं रखना चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे को छात्रों और उच्च शिक्षा से जुड़े परिवारों के लिए महत्वपूर्ण बताया।

रामचंदर राव ने नीट परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी द्वारा निकाली गई रैली पर भी सवाल उठाए। बीजेपी का आरोप है कि सरकार को पहले राज्य के विद्यार्थियों से जुड़े लंबित मुद्दों का समाधान करना चाहिए। हालांकि, इन आरोपों पर राज्य सरकार का पक्ष भी महत्वपूर्ण है और संबंधित आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक होगी।

पंजाब में भी परीक्षा पेपर लीक का मुद्दा

पंजाब में बीजेपी ने कथित फार्मेसी परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर राज्य के संबंधित मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने आम आदमी पार्टी (AAP) पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।सिरसा ने दावा किया कि कथित तौर पर पैसे के लेन-देन के बाद फार्मेसी परीक्षा का पेपर लीक हुआ और इससे हजारों विद्यार्थियों के प्रभावित होने की बात कही। 

उन्होंने दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि पेपर लीक होने की स्थिति में संबंधित मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि कथित पेपर लीक के बावजूद पंजाब में संबंधित मंत्री के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक निष्कर्ष के आधार पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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