दिल्ली के होटल अग्निकांड में गुरुग्राम के अग्रवाल परिवार की तीन पीढ़ियां खत्म हो गईं। पत्नी, बेटा-बहू और दो पोतियों सहित पांच लोगों की मौत से पूरा परिवार उजड़ गया। बुजुर्ग राधेश्याम अग्रवाल ICU में वेंटिलेटर पर हैं और अनजान हैं।
गुरुग्राम: दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल फ्लोरिश स्टे में हुए भीषण अग्निकांड ने गुरुग्राम के एक प्रतिष्ठित अग्रवाल परिवार की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। इस दर्दनाक हादसे में परिवार की तीन पीढ़ियां एक साथ खत्म हो गईं, जबकि 70 वर्षीय राधेश्याम अग्रवाल अभी भी अस्पताल में वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
यह घटना न केवल एक परिवार के लिए बल्कि पूरे इलाके के लिए गहरे सदमे का कारण बनी है, जहां एक ही श्मशान में पांच चिताएं एक साथ जलीं और हर आंख नम हो गई।
ICU में भर्ती पिता को नहीं पता परिवार उजड़ चुका है
परिवार के सबसे बुजुर्ग सदस्य राधेश्याम अग्रवाल इस समय साकेत स्थित मैक्स अस्पताल के ICU में भर्ती हैं और वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि उन्हें अभी तक इस बात की जानकारी नहीं दी गई है कि उनकी पत्नी, बेटा, बहू और दोनों पोतियां अब इस दुनिया में नहीं रहीं।
परिवार के सदस्य उन्हें बचाने के प्रयास में अस्पताल के आसपास मौजूद हैं, लेकिन बाहर पूरा परिवार इस अग्निकांड में खत्म हो चुका है।
होटल में ठहरा पूरा परिवार, अचानक भड़की आग
जानकारी के अनुसार, परिवार दिल्ली इसलिए आया था क्योंकि राधेश्याम अग्रवाल की तबीयत खराब थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी देखभाल के लिए पूरा परिवार होटल फ्लोरिश स्टे में ठहरा हुआ था।
सुबह अचानक होटल में आग लग गई, जिसने कुछ ही मिनटों में पूरे भवन को अपनी चपेट में ले लिया। धुआं और लपटें इतनी तेज थीं कि लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला।
तीन पीढ़ियों का एक साथ अंत
इस हादसे में राधेश्याम अग्रवाल की पत्नी, बेटा विवेक अग्रवाल, बहू तर्जनी अग्रवाल और उनकी दो पोतियों जीविशा और वारिया की मौत हो गई। परिवार के सभी सदस्य आग और दम घुटने के कारण गंभीर रूप से झुलस गए थे।
इसके अलावा तीन अन्य रिश्तेदार भी इस हादसे का शिकार हुए, जिनमें राजस्थान निवासी जवरी लाल अग्रवाल, उनकी पत्नी कमला अग्रवाल और मामा अशोक पंसारी शामिल हैं।

एक साथ जलीं पांच चिताएं, श्मशान में सन्नाटा
गुरुग्राम के सेक्टर-32 स्थित श्मशान घाट में जब एक साथ पांच शवों का अंतिम संस्कार किया गया तो माहौल बेहद भावुक हो गया। परिवार और रिश्तेदारों के लिए यह दृश्य असहनीय था।
रिश्तेदारों ने कांपते हाथों से अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कीं, जबकि हर कोई इस त्रासदी से स्तब्ध नजर आया। एक ही परिवार की तीन पीढ़ियों का इस तरह खत्म होना सभी के लिए गहरा आघात था।
नाना ने दिए थे नातिनों को फ्लैट और घर
परिवार की इस कहानी को और दर्दनाक बनाने वाला पहलू यह है कि तर्जनी अग्रवाल के पिता प्रेम बंसल ने अपनी बेटी और दामाद को गुरुग्राम में एक आलीशान कोठी उपहार में दी थी।
इसके अलावा उन्होंने दोनों नातिनों के नाम पर फ्लैट भी खरीदे थे, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रहे। लेकिन नियति ने ऐसा मोड़ लिया कि जिन बच्चों के लिए ये सपने देखे गए थे, वे अब इस दुनिया में नहीं हैं।
परीक्षा देने आई बेटी भी हादसे की शिकार
जानकारी के अनुसार, बड़ी बेटी जीविशा बेंगलुरु में पढ़ाई कर रही थी और परीक्षा के लिए उसे पहले आने से रोका गया था। हालांकि दादाजी की तबीयत बिगड़ने पर वह दिल्ली आई थी।
परिवार ने उसे पहले यात्रा से मना किया था, लेकिन बाद में फ्लाइट बुक कर उसे बुलाया गया। यही फैसला उसके जीवन का आखिरी सफर साबित हुआ।
आग के वक्त क्या हुआ होटल में
प्रत्यक्षदर्शियों और जांच के अनुसार आग सुबह करीब 8:30 बजे लगी। कुछ ही मिनटों में धुआं पूरे होटल में फैल गया। कई लोग खिड़कियों और छत से बचने की कोशिश करते दिखे।
कुछ लोगों ने जान बचाने के लिए खिड़कियों से छलांग लगाई, जबकि कई लोग धुएं में फंसकर बाहर नहीं निकल पाए।
रिश्तेदारों की भी टूटी जिंदगी
इस हादसे में शामिल अन्य रिश्तेदार भी उसी होटल में ठहरे हुए थे। अजमेर से आए रिटायर्ड बैंक अधिकारी जवरी लाल अग्रवाल और उनकी पत्नी कमला अग्रवाल भी इस आग में मारे गए।
परिवार के अन्य सदस्य जो अस्पताल में भर्ती थे, अब पूरी तरह टूट चुके हैं और उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आगे जीवन कैसे चलेगा।
पुलिस और प्रशासन की जांच जारी
स्थानीय प्रशासन और फायर विभाग ने घटना की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में आग के कारणों का पता लगाया जा रहा है और यह भी देखा जा रहा है कि क्या होटल में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं।
पुलिस सीसीटीवी फुटेज और होटल स्टाफ से पूछताछ कर रही है ताकि घटना की पूरी सच्चाई सामने आ सके।
होटल सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने दिल्ली के होटल सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार आग तेजी से फैल गई, जिससे यह संकेत मिलता है कि सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त नहीं थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फायर अलार्म और आपातकालीन निकास सही ढंग से काम कर रहे होते, तो कई जानें बचाई जा सकती थीं।
समाज में गहरा सदमा और शोक
इस हादसे ने न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय समुदाय तक हर जगह इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया जा रहा है।
लोग इसे एक ऐसी त्रासदी बता रहे हैं, जिसने एक खुशहाल परिवार को पूरी तरह खत्म कर दिया।












