दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार प्रमुख कारणों का खुलासा हो गया है। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण और धूल वायु प्रदूषण के दो मुख्य गुनहगार हैं।
नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण लंबे समय से एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय चुनौती बना हुआ है। अब इस समस्या की जड़ को लेकर एक अहम खुलासा हुआ है। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वाहनों से निकलने वाला उत्सर्जन और धूल प्रदूषण दिल्ली-एनसीआर की खराब हवा के दो सबसे बड़े कारण हैं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों सहित सभी संबंधित एजेंसियों से चार हफ्तों के भीतर ठोस एक्शन प्लान पेश करने का निर्देश दिया है।
CAQM ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा?
सीएक्यूएम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि दिल्ली-एनसीआर में सर्दी और गर्मी—दोनों मौसमों में वायु गुणवत्ता बिगड़ने के पीछे मुख्य भूमिका ट्रांसपोर्ट सेक्टर से होने वाला प्रदूषण और सड़क, निर्माण स्थलों व खुले इलाकों से उड़ने वाली धूल की है। रिपोर्ट के अनुसार, निजी और व्यावसायिक वाहनों की बढ़ती संख्या, ट्रैफिक जाम, पुराने डीजल वाहन और सार्वजनिक परिवहन पर अत्यधिक दबाव, हवा की गुणवत्ता को लगातार खराब कर रहे हैं। वहीं, निर्माण गतिविधियां, कच्ची सड़कें, खुले प्लॉट और अपर्याप्त मैकेनाइज्ड सफाई धूल प्रदूषण को और बढ़ा रही हैं।
अक्सर दिल्ली के प्रदूषण के लिए त्योहारों पर पटाखों को जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है। हालांकि, CAQM ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह समस्या सिर्फ मौसमी या त्योहारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे दीर्घकालिक और संरचनात्मक कारण हैं। सीएक्यूएम की इस रिपोर्ट ने उस बहस को भी बल दिया है, जिसमें विशेषज्ञ लगातार कह रहे हैं कि जब तक वाहनों और धूल पर सख्त नियंत्रण नहीं होगा, तब तक स्थायी समाधान संभव नहीं है।

जाम वाले एमसीडी टोल प्लाजा होंगे पुनर्गठित
सीएक्यूएम ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म उपायों की सिफारिश की है। इनमें एक अहम प्रस्ताव दिल्ली नगर निगम (MCD) के टोल प्लाजा से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, कई टोल प्लाजा ट्रैफिक जाम का बड़ा कारण बन चुके हैं, जिससे वाहन लंबे समय तक खड़े रहते हैं और अधिक प्रदूषण फैलता है। ऐसे टोल प्लाजा को री-डिजाइन, शिफ्ट या ऑटोमेशन के जरिए जाम-मुक्त करने की सिफारिश की गई है।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ—जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली शामिल हैं—ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:
- CAQM की सिफारिशों पर अनावश्यक आपत्तियां न उठाई जाएं
- केंद्र सरकार, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकारें
- नगर निगम, एमसीडी और अन्य स्थानीय निकाय
सभी को चार सप्ताह के भीतर स्पष्ट और समयबद्ध एक्शन प्लान दाखिल करना होगा।










