भेड़िया और मेमना: जब ताकत के आगे सच्चाई हार जाती है

भेड़िया और मेमना: जब ताकत के आगे सच्चाई हार जाती है

यह कहानी हमें सत्ता और अत्याचार के उस कुरूप चेहरे को दिखाती है जहाँ ताकतवर हमेशा कमजोर को दबाने की कोशिश करता है। यह हमें सिखाती है कि जब किसी दुष्ट व्यक्ति का इरादा आपको नुकसान पहुँचाने का हो, तो आपकी अच्छाई, सच्चाई या तर्क उसके सामने बेअसर हो जाते हैं, क्योंकि जालिम तो बस जुल्म करने का एक बहाना ढूंढता है।

मुख्य कहानी 

एक दिन की बात है। गर्मी का मौसम था। एक छोटा सा, प्यारा मेमना (भेड़ का बच्चा) प्यास बुझाने के लिए एक पहाड़ी झरने के पास गया। झरना ऊपर से नीचे की तरफ बह रहा था। मेमना नीचे की तरफ खड़े होकर साफ और ठंडे पानी के छोटे-छोटे घूँट भर रहा था।

तभी, झरने के ऊपरी हिस्से पर एक खूंखार भेड़िया आ पहुँचा। भेड़िया बहुत भूखा था और उसकी नजर उस कोमल मेमने पर पड़ी। उसके मुँह में पानी आ गया। वह सीधे उस मेमने को मारकर खा सकता था, लेकिन वह चाहता था कि पहले उसे खाने का कोई 'बहाना' या 'कारण' मिल जाए, ताकि वह खुद को सही साबित कर सके।

भेड़िया गुर्राया और मेमने से बोला, 'अरे ओ छोटे! तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई? तुम मेरे पीने का पानी गंदा कर रहे हो। अब मैं यह कीचड़ वाला पानी कैसे पिऊँगा?'

मेमना डर से कांपने लगा। उसने बड़ी विनम्रता से कहा, 'श्रीमान, आप गलत कह रहे हैं। पानी तो आपकी तरफ से बहकर मेरी तरफ आ रहा है। मैं तो नीचे खड़ा हूँ, इसलिए मेरे पानी पीने से आपका पानी गंदा कैसे हो सकता है?'

भेड़िये ने देखा कि उसका पहला बहाना नहीं चला और मेमने का तर्क सही है। उसने तुरंत दूसरा झूठ बोला, 'अच्छा! तो तुम वही हो जिसने पिछले साल इसी मौसम में मुझे गाली दी थी और मेरा अपमान किया था।'

मेमने ने आश्चर्य से कहा, 'माफ करें श्रीमान, लेकिन पिछले साल तो मेरा जन्म भी नहीं हुआ था। मैं तो अभी सिर्फ छह महीने का हूँ।'

भेड़िये को अब गुस्सा आने लगा क्योंकि उसके सारे झूठे बहाने मेमने की सच्चाई के आगे टिक नहीं पा रहे थे। उसने झुंझलाकर तीसरा बहाना बनाया, 'अगर वह तुम नहीं थे, तो जरूर वह तुम्हारा भाई रहा होगा।'

मेमने ने और ज्यादा डरते हुए जवाब दिया, 'लेकिन श्रीमान, मेरा तो कोई भाई या बहन नहीं है। मैं अपने माता-पिता की इकलौती संतान हूँ।'

अब भेड़िये का सब्र टूट गया। उसे लगा कि बातों से काम नहीं चलेगा और उसकी भूख बढ़ती जा रही थी। उसने अपनी असली फितरत दिखाते हुए कहा, 'अगर वह तेरा भाई नहीं था, तो जरूर तेरा बाप रहा होगा। तुम सब एक जैसे ही हो। तुम मेरी बहस करके मेरा समय बर्बाद कर रहे हो और यही तुम्हारी मौत का कारण बनेगा।'

इतना कहकर वह जालिम भेड़िया उस मासूम और निहत्थे मेमने पर झपटा और उसे मारकर खा गया। बेचारे मेमने की कोई भी सच्चाई, विनम्रता या तर्क उस जालिम के आगे काम न आया।

सीख 

यह कहानी हमें सीख देती है कि जो व्यक्ति स्वभाव से ही दुष्ट और अत्याचारी होता है, उसे किसी को नुकसान पहुँचाने के लिए किसी वाजिब कारण की जरूरत नहीं होती। वह अपनी दुष्टता को सही ठहराने के लिए कोई न कोई झूठा बहाना बना ही लेता है। ऐसे जालिम लोगों के सामने सच्चाई, तर्क या विनम्रता का कोई असर नहीं होता, क्योंकि उनका इरादा पहले से ही बुरा करने का होता है और वे सिर्फ 'बहाना' ढूंढ रहे होते हैं।

Leave a comment