दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में एमसीडी की टीम पर हुई पत्थरबाजी मामले में नया मोड़ आया है। अब इस मामले में उत्तर प्रदेश के रामपुर से समाजवादी पार्टी (सपा) सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का नाम सामने आया है। आरोप है कि नदवी मौके पर मौजूद थे और लोगों को उकसाने में भूमिका निभाई।
नई दिल्ली: दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में अवैध कब्जे हटाने गई एमसीडी की टीम पर हुई पत्थरबाजी के मामले में अब उत्तर प्रदेश के रामपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का नाम सामने आया है। आरोप है कि उन्होंने देर रात लोगों को भड़काया, जिसके बाद हालात बिगड़े। इस मामले में पुलिस उनसे पूछताछ करेगी। मोहिबुल्लाह नदवी संसद के पास स्थित एक मस्जिद के इमाम भी हैं।
घटना का पूरा परिदृश्य

दरअसल, दिल्ली के तुर्कमान गेट के पास अवैध कब्जों को हटाने के लिए एमसीडी की टीम देर रात कार्रवाई के लिए गई थी। इस दौरान अचानक भीड़ ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने तुरंत स्थिति को काबू में करने की कोशिश की। सूत्रों के अनुसार, सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी, जो संसद के पास स्थित मस्जिद के इमाम भी हैं, मौके पर मौजूद थे। आरोप है कि उन्होंने लोगों को भड़काया और हिंसा को बढ़ावा दिया। पुलिस ने बताया कि सांसद से पूछताछ की जाएगी और घटना में उनकी भूमिका की जांच की जाएगी।
इस घटना पर बीजेपी नेता और प्रवक्ता नवीन कोहली ने कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश के तहत अवैध कब्जों को हटाया जा रहा था, और समाज से बात भी हो चुकी थी। इसके बावजूद सपा के सांसद के आने से स्थिति और नाजुक हो गई। कोहली ने कहा, डेढ़ बजे रात को कोई अपने घर से तुर्कमान गेट क्यों जाता है? उनकी वजह से माहौल बिगड़ गया। क्या यहां कोई षड्यंत्र रचा गया था? इस पर अखिलेश यादव और सपा को जवाब देना चाहिए।
कोहली ने आगे आरोप लगाया कि इस तरह की राजनीति करना गलत है। लोग भड़काए जा रहे हैं, गलत बयानबाजी से माहौल बिगड़ रहा है। क्या राजनीति करने के लिए लोगों की जान से खेला जा सकता है? उन्होंने शरजील इमाम और उमर खालिद जैसे मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सपा पर बढ़ते दबाव
सपा सांसद के कथित रूप से भीड़ भड़काने की खबर आने के बाद सपा और पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर राजनीतिक दबाव बढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना चुनावी माहौल को भी प्रभावित कर सकती है, क्योंकि दिल्ली जैसे संवेदनशील क्षेत्र में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सांसदों और नेताओं की उपस्थिति ऐसी घटनाओं में हिंसा बढ़ा सकती है। इसलिए पुलिस और प्रशासन को स्थिति की गहन जांच करनी होगी और किसी भी दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी।










